दिनांक : 05-Dec-2022 12:17 AM   रायपुर, छत्तीसगढ़ से प्रकाशन   संस्थापक : पूज्य श्री स्व. भरत दुदानी जी
Follow us : Youtube | Facebook | Twitter English English Hindi Hindi
Shadow

Vishesh Lekh

विशेष-लेख : संगीत, नृत्य की कोई भाषा नहीं होती

विशेष-लेख : संगीत, नृत्य की कोई भाषा नहीं होती

Chhattisgarh, Vishesh Lekh
छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव कल की ढलती हुई शाम के साथ ही समाप्त हो चुका है। इस वर्ë...
विशेष लेख : छत्तीसगढ़ में समृद्ध होते किसान, बीते चार सालों में खेती-किसानी में नया उत्साह देखने को मिला

विशेष लेख : छत्तीसगढ़ में समृद्ध होते किसान, बीते चार सालों में खेती-किसानी में नया उत्साह देखने को मिला

Chhattisgarh, Vishesh Lekh
छत्तीसगढ़ में बीते चार सालों में खेती-किसानी में नया उत्साह देखने को मिल रहा है। इन वर्षाें में जहां खेती का रकबा बढ़ा है, वहीं कृषि उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी हुई है। राज्य में लगभग 30 लाख हेक्टेयर में खरीफ की फसल ली जा रही है। खरीफ में सर्वाधिक धान की फसल ली जाती है। धान की फसलों की व्यवस्थित खरीदी व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा की जाती है। इस वर्ष समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी एक नवम्बर से प्रारंभ होने जा रही है। लगभग 01 करोड़ 10 लाख मेट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया है। छत्तीसगढ़ में खेती-किसानी में आया बदलाव मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की किसान हितैषी नीतियों का परिणाम है। किसानों को समर्थन मूल्य का उचित मूल्य दिलाने के साथ ही उन्हें इनपुट सब्सिडी के रूप में राजीव गांधी किसान न्याय योजना का लाभ भी दिया जा रहा है। इस योजना के तहत धान की फसल लेने वाले किसानों को 9000 रूपए और धान के अलावा ख...
विशेष लेख : छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य में है यहां की लोककला का प्राणतत्व

विशेष लेख : छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य में है यहां की लोककला का प्राणतत्व

Chhattisgarh, Tribal Area News and Welfare, Vishesh Lekh
छत्तीसगढ़ी लोककला में लोकनृत्य संपूर्ण प्रमुख छत्तीसगढ़ के जनजीवन की सुन्दर झांकी है। राग-द्वेष, तनाव, पीड़ा से सैकड़ों कोस दूर आम जीवन की स्वच्छंदता व उत्फुल्लता के प्रतीक लोकनृत्य यहां की माटी के अलंकार है। छत्तीसगढ़ के लोकनृत्य सुआ, करमा, पंथी राउत नाचा, चंदैनी, गेड़ी, नृत्य, परब नृत्य, दोरला, मंदिरी नृत्य, हुलकी पाटा, ककसार, सरहुल शैला गौरवपाटा, गौरव, परथौनी, दशहरा आदि हैं। छत्तीसगढ़ के लोकनृत्य में यहां की लोककला का प्राणतत्व है। यह मानवीय जीवन के उल्लास - उमंग-उत्साह के साथ परंपरा के पर्याय हैं। समस्त सामाजिक, धार्मिक व विविध अवसरों पर छत्तीसगढ़ वासियों द्वारा अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने के ये प्रमुख उद्विलास हैं। छत्तीसगढ़ की नृत्य परंपरा अनंत व असीम है। छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकनृत्यों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है :- सुआ नृत्य यह छत्तीसगढ़ का सबसे लोकप्रिय नृत्य है। छत्तीस...
मुख्यमंत्री ने सरदार वल्लभ भाई पटेल को उनकी जयंती एवं पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी को उनकी पुण्य तिथि पर किया याद

मुख्यमंत्री ने सरदार वल्लभ भाई पटेल को उनकी जयंती एवं पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी को उनकी पुण्य तिथि पर किया याद

Chhattisgarh, India, Vishesh Lekh
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने देश के प्रथम उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री स्वर्गीय सरदार वल्लभ भाई पटेल की 31 अक्टूबर को जयंती पर उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री ने सरदार पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा है कि सरदार वल्लभ भाई पटेल सर्वाेच्च देशभक्ति, दृढ़ इच्छा शक्ति, दृढ़ विश्वास और साहस के लिए जाने जाते हैं। देश के स्वतंत्रता संग्राम में उनकी अग्रणी भूमिका थी। उन्होंने देश के एकीकरण और अखण्ड भारत के निर्माण में अविस्मरणीय योगदान दिया। उनकी याद और सम्मान में हर साल उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। श्री बघेल ने कहा कि स्वतंत्र भारत के निर्माण में उनकी भूमिका को कभी नहीं भुलाया जा सकता। मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी को उनकी पुण्य तिथि पर किया नमन मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने 31 अक्टूबर को पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की प...
स्वर्गीय श्री पंथराम वर्मा के मूर्ति अनावरण के मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा “इनको सुनकर जीवंत हो उठता था स्वाधीनता आंदोलन के संघर्ष का चित्र”

स्वर्गीय श्री पंथराम वर्मा के मूर्ति अनावरण के मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा “इनको सुनकर जीवंत हो उठता था स्वाधीनता आंदोलन के संघर्ष का चित्र”

Chhattisgarh, Vishesh Lekh
सर्वाेदय आंदोलन से जुड़े मध्य प्रदेश भूदान बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय श्री पंथराम वर्मा की मूर्ति का अनावरण आज मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने दुर्ग जिले ग्राम मटंग पहुंचकर किया। उन्होंने परिवार व ग्रामीणजनों की उपस्थिति में स्वर्गीय श्री पंथराम वर्मा की मूर्ति पर पुष्प अर्पण कर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री इसके बाद स्वर्गीय श्री पंथराम वर्मा के निवास पहुंचे और उनके परिवारजनों के साथ रूबरू हुए। परिवारजनों से मुलाकात के पश्चात उन्होंने स्वर्गीय श्री वर्मा के साथ अपने बाल्यकाल के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि वे उन सौभाग्यशाली व्यक्तियों में से एक हैं, जिन्हें स्वर्गीय श्री पंथराम वर्मा जैसे विद्वान और सरल स्वभाव वाले व्यक्ति का स्नेह और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। स्वर्गीय श्री वर्मा ने दुर्ग के इंदिरा मार्केट में जब महात्मा गांधी जी का आगमन हुआ था उस समय उन्होंने अपने पिताजी के कंधों...
‘नदी पर कविता लिखो’ जैसा कभी गुरूजी ने कहा था ‘गाय पर निबन्ध लिखो’

‘नदी पर कविता लिखो’ जैसा कभी गुरूजी ने कहा था ‘गाय पर निबन्ध लिखो’

Vishesh Lekh
घर में एक गाय थी, उसे रोज देखते थे घर के पास नदी थी, उसे भी देखते थे गाय नदी जैसी थी, सतत दूध देती थी नदी गाय जैसी थी, सतत जल देती थी भरपूर दूध पिया, पेट भर गया, भरपूर पानी पिया, जी भर गया, अब गाय का दूध सूख चुका है अब नदी का जल सूख चुका है। बेशक मैं अपराधी हूँ, चाहे जो सजा दो लेकिन मुझसे यह न कहो कि गाय पर निबन्ध लिखो या नदी पर कविता लिखो। अब नहीं लिख सकता मैं बचपन की बात और थी।" -द्वारिका प्रसाद अग्रवाल ...
विशेष लेख : चिकित्सालय से बोल रहा हूँ

विशेष लेख : चिकित्सालय से बोल रहा हूँ

Vishesh Lekh
शहर की मुख्य सड़क पर सैकड़ों एकड़ के भू-भाग पर एक विशालकाय सात-आठ मंज़िला ढांचा स्थित है, लोग इसे चिकित्सालय कहते हैं। साइन-बोर्ड को देखने से पता चलता है कि यह मात्र चिकित्सालय ही नहीं अनुसंधान केंद्र भी है। हालांकि आज तक किस विषय पर अनुसंधान हुआ है एवं उससे मरीजों को क्या फायदा मिला है, यह स्वयं अनुसंधान का विषय है। यह तथाकथित चिकित्सालय पचास वर्ष से भी ज्यादा पुराना बताया जाता है। इसके बारे में तमाम किवदंतियाँ प्रचलित हैं। एक समय था जब इसे राज्य का सर्वोत्कृष्ट चिकित्सालय माना जाता था। यह गुजरे जमाने की बात है। उस समय चिकित्सक को भगवान का दूसरा रूप समझा जाता था एवं विकल्प के अभाव में मरीज चिकित्सालय स्टाफ की हर नौटंकी, बदतमीजी एवं बेवकूफी बरदाश्त कर लेता था। किन्तु अब परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं। आज की तारीख में चिकित्सक वहाँ वेतनभोगी कर्मचारी से ज्यादा की हैसियत नहीं रखता है एवं यह ...
दीवाली पर पटाखे जलाते समय रखें सावधानी, लापरवाही से हो सकती है दुर्घटना

दीवाली पर पटाखे जलाते समय रखें सावधानी, लापरवाही से हो सकती है दुर्घटना

Vishesh Lekh
रोशनी के त्योहार दीवाली पर पटाखों की रौनक न दिखे तो त्योहार अधूरा सा लगता है। बच्चों के साथ बड़ों को भी दीपावली में फूलझड़ी और पटाखें जलाने में बेहद आनंद आता है। पटाखें जलाते समय बच्चों का खास ध्यान रखना जरूरी है। असावधानीवश कई बार पटाखों और फूलझड़ी से बच्चों के हाथ जल जाते हैं। अगर जली हुई जगह का तुंरत उपचार नहीं किया जाए तो परेशानी बढ़ सकती है। दीवाली के दिन अगर आप भी पटाखें और फुलझड़ी जला रहे हैं तो सावधानी के साथ जलाएं। लापरवाही या दुर्घटनावश अगर किसी का हाथ जल जाए तो तुरंत घर में ही प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टर के पास जाएं। शरीर के किसी अंग के जलने पर इसका दो तरह का प्रभाव होता है। सुपरफिशल बर्न में जलने के बाद छाला हो जाता है, जबकि डीप बर्न में शरीर का जला हिस्सा सुन्न हो जाता है। अगर जले हुए हिस्से पर दर्द या जलन हो रही है तो इसका मतलब हालत गंभीर नहीं है। ऐसे में जले हुए हिस्से को...
विशेष लेख : छत्तीसगढ़िया ओलंपिक की लहर चहुंओर

विशेष लेख : छत्तीसगढ़िया ओलंपिक की लहर चहुंओर

India, Vishesh Lekh
छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेलों के प्रति लोगों की रूचि बढ़ाने के लिए राज्य सरकार गांव, नगर, कस्बों में छत्तीसगढ़िया ओलंपिक का आयोजन कर रही है। इस खेल महाकुंभ को लेकर बच्चों से लेकर युवा, पुरुषों और महिलाओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। हर वर्ग के लोग पारंपरिक खेलों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार जिस तरह से छत्तीसगढ़ी परंपरा विरासत और संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन को सहेजने में लगी है। उसी तरह से प्रदेश के पारंपरिक खेल कंचा, भंवरा, कबड्डी, खो-खो, लंगडी दौड़, 100 मीटर दौड़, कुर्सी दौड़, पिट्ठुल, गेड़ी दौड़, बिल्लस फुगड़ी, गिल्ली डंडा, लंबी कूद जैसे पारंपरिक खेलों को भी बचाए रखने के लिए प्रयासरत है। इन खेलों के प्रति लोगों में रूचि बढ़ाने के लिए राज्य सरकार प्रदेश में छत्तीसगढ़िया ओलंपिक का आयोजन कर रही है। इन पारंपरिक खेल प्रतिस्पर्धाओं में तो लोग हिस्सा ले ही रहे हैं, ...
एममबीबीएस की पढ़ाई हिंदी में – एक सार्थक पहल

एममबीबीएस की पढ़ाई हिंदी में – एक सार्थक पहल

Vishesh Lekh
एमबीबीएस की पढ़ाई हिंदी में प्रारम्भ करने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य बन रहा है। चिकित्सा विज्ञान की शिक्षा हिंदी में प्रारम्भ करना निःसंदेह एक चुनौतीपूर्ण कार्य था जिसे मध्यप्रदेश ने संभव कर दिखाया। तर्क-कुतर्क का दौर तो पहले भी चलता रहा है एवं आगे भी चलता रहेगा। किन्तु इस बार हिंदी कार्यान्वयन के लिये जिस इच्छाशक्ति का परिचय दिया गया उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाये कम है। यह तर्क कि उच्च स्तरीय शिक्षा मात्र अंग्रेजी में संभव है, पूर्णतः आधारहीन है। जर्मनी, फ्रांस, रूस, चीन में उच्च शिक्षण पहले से ही उनकी अपनी भाषा में है एवं ये राष्ट्र शिक्षण के साथ अनुसंधान में भी बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं। इस संबंध में पर्याप्त शोध हो चुके हैं कि शिक्षण यदि मातृभाषा में हो तो बच्चे ज्यादा जल्दी सीखते हैं। चूंकि हिंदी हमारी संस्कृति के ज्यादा करीब है अतः हिंदी माध्यम में शिक्षण प्रारम्भ होने से उच्च...