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एममबीबीएस की पढ़ाई हिंदी में – एक सार्थक पहल

20/10/2022 posted by Arun Mishra Vishesh Lekh    

एमबीबीएस की पढ़ाई हिंदी में प्रारम्भ करने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य बन रहा है। चिकित्सा विज्ञान की शिक्षा हिंदी में प्रारम्भ करना निःसंदेह एक चुनौतीपूर्ण कार्य था जिसे मध्यप्रदेश ने संभव कर दिखाया।

तर्क-कुतर्क का दौर तो पहले भी चलता रहा है एवं आगे भी चलता रहेगा। किन्तु इस बार हिंदी कार्यान्वयन के लिये जिस इच्छाशक्ति का परिचय दिया गया उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाये कम है। यह तर्क कि उच्च स्तरीय शिक्षा मात्र अंग्रेजी में संभव है, पूर्णतः आधारहीन है। जर्मनी, फ्रांस, रूस, चीन में उच्च शिक्षण पहले से ही उनकी अपनी भाषा में है एवं ये राष्ट्र शिक्षण के साथ अनुसंधान में भी बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं।

इस संबंध में पर्याप्त शोध हो चुके हैं कि शिक्षण यदि मातृभाषा में हो तो बच्चे ज्यादा जल्दी सीखते हैं। चूंकि हिंदी हमारी संस्कृति के ज्यादा करीब है अतः हिंदी माध्यम में शिक्षण प्रारम्भ होने से उच्च स्तरीय शोध की भारत में संभावनायें बढ़ेंगी।

गांवों एवं कस्बों से आने वाली कई प्रतिभायें जो अंग्रेजी में कमजोर होने के कारण पुष्पित-पल्लवित नहीं हो पाती थी, उन्हें अब पर्याप्त अवसर उपलब्ध होंगे। आज कोई डॉक्टर गांवों में काम करने को तैयार नहीं होता। यदि गांव के बच्चों को हिंदी माध्यम में चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध होगी तो वो निःसंदेह गांवों में अपनी सेवायें देने में हिचकेंगे नहीं। इससे सुदूर गांवों में चिकित्सा सुविधा की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

यदि डॉक्टर मरीज से उसकी अपनी भाषा में बात करेगा एवं दवाओं एवं परीक्षण का विवरण हिंदी में लिखेगा तो रोग का भी उचित निराकरण होगा एवं मरीज का भी विश्वास बढ़ेगा। चिकित्सा क्षेत्र में मरीज का विश्वास अर्जित करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

यहां यह उल्लेखनीय है कि हिंदी माध्यम से इंजीनियरिंग की शिक्षा प्रारम्भ करने वाला भी मध्यप्रदेश पहला राज्य था किन्तु यह प्रयोग असफल हो गया। कारण यह था कि जो पुस्तकें प्रकाशित की गई थी उनमें शब्दानुवाद पर जोर था। सामान्य प्रचलित शब्दों को क्लिष्ट हिंदी में अनुवादित कर भाषा को बोझिल बना दिया गया था। इस बात का मेडिकल शिक्षा संबंधित पुस्तकों के अनुवाद में पूर्ण ध्यान रखा गया है। वर्तमान में प्रथम वर्ष की प्रकाशित पुस्तकों में एनाटॉमी, बायो केमिस्ट्री, ब्लड बैंक, कम्युनिटी मेडिसिन जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जो सामान्य रूप से प्रचलित हैं।

यहां यह जानना महत्वपूर्ण है कि अंग्रेजी भाषा में उनके शब्दों की संख्या कुछ हजार तक सीमित है। शेष शब्द उन्होंने दूसरी भाषाओं से ग्रहण किये हैं। इन शब्दों को अंग्रेजी में इतना ज्यादा प्रयोग हुआ कि अंग्रेजी के प्रतीत होने लगे। यही कार्य हिंदी में किये जाने की जरूरत है। हिंदी में दूसरी भाषा के शब्दों को स्वीकार करने की प्रबल सामर्थ्य है। भाषा वही विकसित होती है, जिनमें दूसरी भाषा के शब्दों को अपना बना लेने का गुण होता है। यह चिकित्सकीय शब्दावली भविष्य में हिंदी में प्रयोग होने लगेगी तो ये हिंदी के शब्द ही प्रतीत होंगे। रेल, ट्रेन, स्टेशन, यूनिवर्सिटी, शॉपिंग इत्यादि शब्द क्या हिंदी के हैं, किन्तु हम सब सामान्य बोलचाल में प्रयोग करते हैं।

एमबीबीएस पाठ्यक्रम की प्रथम वर्ष की पुस्तकों के हिंदी अनुवाद के लिये सैकड़ों विद्वान डॉक्टरों की टीम ने महीनों कार्य किया है। यह परिश्रम व्यर्थ नहीं होगा एवं अब हिंदी माध्यम वालों के लिये भी उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा के पर्याप्त अवसर उपलब्ध होंगे।

Author Profile

Arun Mishra
Arun Mishraअरुण मिश्रा (अतिथि लेखक)
मैं अरुण कुमार मिश्रा मूलतः भिलाई छत्तीसगढ़ से है। वर्तमान में एनटीपीसी खरगोन में बतौर हिंदी अधिकारी कार्यरत है। गोंडवाना एक्सप्रेस मीडिया के विशेष अतिथि लेखक है.