दिनांक : 14-Jul-2024 07:52 PM
Follow us : Youtube | Facebook | Twitter
Shadow

रायपुर : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कोरोना से बचाव के लिए टीका की दूसरी डोज लगवायी

28/05/2021 posted by Priyanka (Media Desk) Chhattisgarh    

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज सवेरे रायपुर के पंडित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय पहुंचकर कोविड-19 से बचाव के टीके की दूसरी खुराक ली। उन्होने टीका लगवाने के बाद डॉक्टरों से टीकाकरण के बाद रखी जाने वाली सावधानियों की जानकारी ली।

प्रदेशवासियों से टीका लगवाने और कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर का पालन करने की अपील की

मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे कोरोना से बचाव के लिए अपनी बारी आने पर टीका अवश्य लगवाएं। जिन लोगों ने टीके की पहली डोज लगवा ली है, वे निर्धारित समय में दूसरी डोज लगवाएं, क्योंकि टीका ही कोरोना से बचाव का एक कारगर उपाय है। टीका लगवाने के बाद भी सभी लोग कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर का पालन करें । मास्क लगाएं, समय-समय पर हाथ की सफाई करें और फिजिकल डिस्टेंस बनाए रखें। भीड़-भाड़ में जाने से बचें । मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी के सहयोग व परिश्रम से छत्तीसगढ़ में कोरोना की दूसरी लहर को नियंत्रित करने में काफी हद तक सफलता मिली है। संक्रमण की दर वर्तमान में 5 प्रतिशत के नीचे आ गई है। जनता की सहूलियत के लिए लॉक डाउन में कुछ छूट दी गई है। सभी लोग सावधानी को अपनाएं जिससे कोरोना के खिलाफ लड़ाई जीती जा सके।

मुख्यमंत्री श्री बघेल को श्रीमती दिपेश्वरी चंद्राकर ने टीका लगाया । इस अवसर पर गृह निर्माण मण्डल के अध्यक्ष श्री कुलदीप जुनेजा और संसदीय सचिव श्री विकास उपाध्याय, चिकित्सा शिक्षा विभाग के संचालक डॉ. आर. के. सिंह, कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री अजय यादव, रायपुर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विष्णु दत्त, डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विनीत जैन और मुख्य चिकित्सा एवँ स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मीरा बघेल, स्टॉफ नर्स सुश्री कविता निराला उपस्थित थी।

Author Profile

Priyanka (Media Desk)
Priyanka (Media Desk)प्रियंका (Media Desk)
"जय जोहार" आशा करती हूँ हमारा प्रयास "गोंडवाना एक्सप्रेस" आदिवासी समाज के विकास और विश्व प्रचार-प्रसार में क्रांति लाएगा, इंटरनेट के माध्यम से अमेरिका, यूरोप आदि देशो के लोग और हमारे भारत की नवनीतम खबरे, हमारे खान-पान, लोक नृत्य-गीत, कला और संस्कृति आदि के बारे में जानेगे और भारत की विभन्न जगहों के साथ साथ आदिवासी अंचलो का भी प्रवास करने अवश्य आएंगे।