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कांकेर : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने गढ़िया महोत्सव का शुभारंभ किया, रंगोली और सेल्फी जोन बना लोगों के आकर्षण का केन्द्र

कांकेर : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने गढ़िया महोत्सव का शुभारंभ किया, रंगोली और सेल्फी जोन बना लोगों के आकर्षण का केन्द्र

छत्तीसगढ़
रायपुर, 30 सितम्बर 2019 मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज कांकेर में गढ़िया महोत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने यहां 14 करोड़ 47 लाख रूपये के विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। इनमें 13 करोड़ 26 लाख रूपये के 83 कार्यों का भूमिपूजन तथा एक करोड़ 21 लाख रूपये का एक लोकार्पण कार्य शामिल हैं। कांकेर गढ़िया महोत्सव के शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा कि देशभर में मंदी का दौर चल रहा है, पर छत्तीसगढ़ में मंदी का कोई प्रभाव नहीं है। इसका प्रमुख कारण राज्य शासन द्वारा किसानों का कर्ज माफ, 25 सौ रूपये प्रति क्ंिवटल में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी, तेंदूपत्ता का पारिश्रमिक दर बढ़ाना, सिंचाई कर माफ करना तथा बिजली बिल में छूट मिलनेे से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं से लोगों का खेती किसानी के प्रति रूझ
पालकी ऊपर से गुजरे तो दूर होंगी तकलीफें इसलिए तपती धूप में लेट गए लोग

पालकी ऊपर से गुजरे तो दूर होंगी तकलीफें इसलिए तपती धूप में लेट गए लोग

छत्तीसगढ़
नकुलनार (एजेंसी) | ये तस्वीर कुआकोंडा के पुजारीपारा मेले की है। यहां आने वालों का विश्वास है कि लच्छनदेई की पालकी अगर उनके ऊपर से गुजर जाए तो सारी बीमारियां दूर हो जाती हैं। पालकी के रास्ते पर तपती धूप में सैकड़ों लोग ऐसे लेट जाते हैं। पुजारी लक्ष्मीनाथ ने बताया कि माता की पालकी साल में एक बार मेले के दिन ही निकलती है। मेले में 84 गांव के देव विग्रह आते हैं। मेले में नहीं आने पर गांव को जुर्माना भी देना पड़ता है।
महाशिवरात्रि 2019: जानिए क्यों मनाया जाता है यह महापर्व, पढ़िए व्रत कथा एवं व्रत की पूरी विधि

महाशिवरात्रि 2019: जानिए क्यों मनाया जाता है यह महापर्व, पढ़िए व्रत कथा एवं व्रत की पूरी विधि

special
महाशिवरात्रि का त्यौहार फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस बार यह पर्व आज यानि 4 मार्च को है। यह साल की आने वाली 12 शिवरात्रियों में से सबसे खास होती है। मान्यता है कि फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी के दिन आने वाली शिवरात्रि सबसे बड़ी शिवरात्रि होती है। इसी वजह से इसे महाशिवरात्रि कहा गया है। दरअसल, हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी वाले दिन शिवरात्रि होती है. लेकिन महाशिवरात्रि के दिन ही मंदिरों में शिव भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। व्रत रखते हैं, बेलपत्र चढ़ाते हैं और भगवान शिव की विधिवत पूजा करते हैं। हिंदू पुराणों में इस महाशिवरात्रि से जुड़ी एक नहीं बल्कि कई वजहें बताई गई हैं: पहली बार प्रकट हुए थे शिवजी पौराणिक कथाओं के मुताबिक महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। इसी दिन पहली बार शिवलिंग की भगवान विष्णु और ब्रह्माजी ने
काछिनगादी परंपरा से होगी बस्तर दशहरे की शुरूआत, सबसे लम्बा 75 दिनों तक चलेगा यह त्यौहार

काछिनगादी परंपरा से होगी बस्तर दशहरे की शुरूआत, सबसे लम्बा 75 दिनों तक चलेगा यह त्यौहार

छत्तीसगढ़
बस्तर (एजेंसी) | 75 दिनों तक चलने वाले बस्तर दशहरे के सबसे महत्त्वपूर्ण विधान काछनगादी के पारंपरिक रस्म के लिए जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। इस वर्ष काछनगादी विधान में खास यह होगा कि तीसरी बार बड़े मारेंगा की 9 वर्षीय अनुराधा दास काछनदेवी बनेगी। विगत दो वर्षों से अनुराधा ही काछनदेवी के रूप में बस्तर दशहरा निर्विघ्न कराने की अनुमति दे रही है। 9 अक्टूबर यानि आश्विन मास की अमावस्या को काछनदेवी का शृंगार कर उसे कांटों के झूले में लिटाया जाएगा। मान्यता है कि काछनगादी विधान के दिन नन्ही बालिका अनुराधा पर काछनदेवी सवार होंगी। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); बस्तर का दशहरा अपने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं रस्मों के कारण देश विदेश में प्रसिद्ध है। बस्तर दशहरा भारत का ऐसा दशहरा है जिसमें रावण दहन ना करके रथ खींचने की परंपरा का निर्वहन किया जाता है। यह दशह
#culture तीजा तिहार: कल करू भात खाकर आज सुहागिनों ने रखा तीजा व्रत, जानिए पूजा विधि और महत्व

#culture तीजा तिहार: कल करू भात खाकर आज सुहागिनों ने रखा तीजा व्रत, जानिए पूजा विधि और महत्व

tourism
भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरितालिका तीजा का पर्व इस बार 12 सितंबर को मनाया जा रहा है। मनभावन पति के लिए कुंवारी कन्याएं और अखंड सौभाग्य के लिए सुहागन महिलाएं बड़े उत्साह से यह व्रत रखती हैं। छत्तीसगढ़ में तीजा का पर्व काफी माना जाता है। तीजा के लिए मायके से भाई या पिता अपनी बेटी के ससुराल जाकर तीजा मनाने का न्योता देकर उसे मायके ले आता है। सुहागन महिलाएं तीजा का व्रत अपने मायके में रहकर करती हैं। बेटी को मायके आने का न्यौता देने के अलावा तीजा के लुगरा, कडु भात खाना, हाथों में मेहंदी लगाना, तीजा के दिन निर्जल व्रत रखना, शाम को फुलेरा सजाना, प्रदोष काल में पूजा करना, रात्रि जागराण करना और ठीक अगले दिन चतर्थी को सुबह विसर्जन करने के बाद तिखूर खाकर व्रत तोड़ने की परंपरा बहुत ही अनोखी है। अन्य राज्यों की अपेक्षा छत्तीसगढ़ में तीजा का महत्व कुछ अधिक है। न्यौता मायके से, लिवान
#culture तीजा के तीज सुहागन महिलाओं का त्यौहार, जानिए पौराणिक कथा और महत्व

#culture तीजा के तीज सुहागन महिलाओं का त्यौहार, जानिए पौराणिक कथा और महत्व

tourism
सुहागिनें जहां अपने पति की लंबी आयु के लिए तीज का व्रत रखती हैं, वहीं अविवाहित लड़कियां अच्छा वर प्राप्त करने के लिए यह व्रत करती हैं। यूं तो हरतालिका तीज देश के कई राज्यों में मनाई जाती है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इस त्योहार का उत्साह दोगुना हो जाता है। मानसून के मौसम का स्वागत करने के लिए छत्तीसगढ़ और उत्तरी भारत में तीज त्योहार ('छत्तीसगढ़ी  में तीजा') मनाया जाता है। पति की लंबी उम्र की कामना और परिवार की खुशहाली के लिए सभी विवाहित महिलाओं में निर्जला उपवास रखती है (वे पूरे दिन पानी नहीं पीते हैं) और शाम को तीज माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा के बाद, वे पानी और भोजन लेती है। तीज के एक दिन पहले सभी महिलाये एक दूसरे के घर जाकर कड़वा भोजन (छत्तीसगढ़ी में 'करू भात') का सेवन करती है। करेले की सब्जी एवं अन्य व्यंजन बनाये जाते है।  यह पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया (भादो की शुक्ल पक
#culture आज माताएं रखेंगी कमरछठ उपवास, जानिए पूजा विधि

#culture आज माताएं रखेंगी कमरछठ उपवास, जानिए पूजा विधि

tourism
रायपुर | छत्तीसगढ़ का लोकपर्व हलषष्ठी (कमरछठ) यह पर्व माताओं का संतान के लिए किया जाने वाला, छत्तीसगढ़ राज्य की अनूठी संस्कृति का एक ऐसा पर्व है जिसे हर वर्ग, हर जाति मे बहूत ही सद्भाव से मनाया जाता है। हलषष्ठी को हलछठ, कमरछठ या खमरछठ भी कहा जाता है। यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। संतान प्राप्ति व उनके दीर्घायू सुखमय जीवन की कामना रखकर माताएँ इस व्रत को रखती है। इस दिन माताएँ सूबह से ही महुआ पेड़ की डाली का दातून कर, स्नान कर व्रत धारण करती है।भैस के दुध की चाय पीती है।तथा दोपहर के बाद घर के आँगन मे, मंदिर-देवालय या गाँव के चौपाल आदि मे बनावटी तालाब (सगरी) बनाकर , उसमें जल भरते है।सगरी का जल, जीवन का प्रतीक है। तालाब के पार मे बेर, पलाश,गूलर आदि पेड़ों की टहनियो तथा काशी के फूल को लगाकर सजाते है।सामने एक चौकी या पाटे पर गौरी-गणेश, कलश रखकर हलषष्ठी
#culture पशुधन और कृषि औजारों की पूजा का पर्व हरेली आज

#culture पशुधन और कृषि औजारों की पूजा का पर्व हरेली आज

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किसान इस मौके पर हल की पूजा करते हैं और लोगों की नजरों से घर और पूरे परिवार को बचाए रखने दरवाजे पर नीम की पत्ती भी टांगते हैं। इस त्यौहार में छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति के सारे रंग दिखते हैं। रायपुर। सावन की रिमझिम फुहारों के बीच आज छत्तीसगढ़ का पहला लोक त्योहार हरेली मनाया जा रहा है। पशुधन और कृषि औजारों की पूजा-अर्चना के इस त्यौहार के साथ ही छत्तीसगढ़ में त्यौहारों की धूम शुरू हो जाती है। आज छत्तीसगढ़ के घर-घर में चीला-चौसेला बनेगा और महिलाएं सुबह घर की दीवारों पर गाय के गोबर से सुरक्षा रेखा बनाकर पूजा-पाठ होती है। किसान इस मौके पर हल की पूजा करते हैं और लोगों की नजरों से घर और पूरे परिवार को बचाए रखने दरवाजे पर नीम की पत्ती भी टांगते हैं। इस त्यौहार में छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति के सारे रंग दिखते हैं। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); आज के दिन पूजा-
#culture अच्छे फसल और स्वास्थ्य के लिए मानते है हरेली तिहार

#culture अच्छे फसल और स्वास्थ्य के लिए मानते है हरेली तिहार

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छत्तीसगढ़ में हरेली महोत्सव किसानों का महत्वपूर्ण त्योहार है। हरेली शब्द हिंदी शब्द 'हरियाली' से उत्पन्न हुआ है और इसका मतलब है कि वनस्पति या हरियाली। यह छत्तीसगढ़ के 'गोंड' जनजातीय का मुख्य रूप से महत्वपूर्ण त्योहार है यह त्यौहार हिंदू कैलेंडर के सावन (श्रावणी अमावस्या) महीने के अमावस्या के दिन मनाया जाता है, जो जुलाई और अगस्त के बीच वर्षा ऋतु में होता है। यह त्यौहार 'श्रावण' के महीने के प्रारंभ को दर्शाता है जो कि हिंदुओं का पवित्र महीना है। यह त्योहार पूरे दिन मनाया जाता है और किसी को भी कोई काम करने की अनुमति नहीं है। खेतों से संबंधित उपकरण और गायों की इस शुभ दिन पर किसान पूजा करते हैं ताकि पूरे वर्ष अच्छी फसल सुनिश्चित हो सके। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); घरों के प्रवेश द्वार नीम के पेड़ की शाखाओं से सजाए जाते हैं। छत्तीसगढ़ में दवाओं के पर