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विशेष लेख : छत्तीसगढ़ में एयर कनेक्टिविटी की उम्मीदों को मिली नई उड़ान

09/06/2022 posted by Priyanka (Media Desk) Chhattisgarh, India    

तरक्की और विकास का रिश्ता अच्छी कनेक्टिविटी से जुड़ा है। कनेक्टिविटी की सुविधा जितनी ज्यादा होगी वहां विकास उतना ही तेजी से होता है। यह सुविधा लोगों को एक दूसरे से जोड़ती है वही क्षेत्रीय असंतुलन को भी दूर करने में मदद करती है। अच्छी सड़क और हवाई कनेक्टिविटी जीवन स्तर को जांचने का भी पैमाना भी है। हाल के साढे तीन वर्षों में मुख्यमंत्री श्री भूपेश बधेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में हवाई कनेक्टिीविटी की उम्मीदों को नई उड़ान है।

छत्तीसगढ़ में हाल के साढ़े तीन साल की बात करें तो यहां रायपुर के अलावा बिलासपुर और जगदलपुर से भी नियमित विमान सेवाएं संचालित होना प्रारंभ हुई हैं। वहीं एयरपोर्टों के विकास और अधोसंरचना विकास के कार्यों को गति मिली है। इससे प्रदेश के उत्तरी और दक्षिण क्षेत्रों में हवाई सेवाओं के विस्तार से विकास का नया मार्ग प्रशस्त होगा। बिलासपुर और जगदलपुर एयरपोर्ट में नाइट लैडिंग सुविधा के लिए पीबीएन प्रणाली भी स्थापित की जा रही है।  इसके साथ साथ कोरबा में व्यावसायिक एयरपोर्ट के साथ कोरिया में नई हवाई पट्टी के विकास की योजना पर काम हो रहा है। अम्बिकापुर में 43 करोड़ रूपए की लागत से एयरपोर्ट रनवे भी बनाया जा रहा है। जगदलपुर, बिलासपुर और अम्बिकापुर एयरपोर्ट में ऑटोमेटेड एटीसी उपकरण स्थापित किए गए हैं।

मॉ दन्तेश्वरी एयरपोर्ट-राज्य शासन के प्रयासों से डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) द्वारा 2 सी व्हीएफआर श्रेणी के जगदलपुर एयरपोर्ट से 72 सीटर विमान द्वारा हवाई सेवा की स्वीकृति दी गयी एवं 21 सितम्बर 2020 से बस्तर अंचल के विकास का एक नया अध्याय प्रारंभ हुआ, जब जगदलपुर से रायपुर- हैदराबाद-बैंगलोर सेक्टर में नियमित घरेलू विमान सेवा का संचालन प्रारंभ हुआ। जगदलपुर एयरपोर्ट से प्रतिमाह लगभग तीन हजार यात्रियों द्वारा विमान सेवा का लाभ लिया जा रहा है। इंण्डिगो विमानन कम्पनी द्वारा सप्ताह में बुधवार, शनिवार एवं रविवार को दिल्ली-रायपुर-जगदलपुर-रायपुर-दिल्ली सेक्टर के लिये पैरामिलीटरी फोर्स हेतु विमानन सेवा शुरू की गयी है। उम्मीद है कि शीघ्र ही इस वायुमार्ग पर सामान्य सिविल उड़ान सेवा भी प्रारम्भ हो जायेगी।

बिलासा देवी केंवट एयरपोर्ट-राज्य शासन द्वारा 41.00 करोड रुपए की लागत से बिलासपुर एयरपोर्ट का विकास, 3 सी व्हीएफआर श्रेणी में किया गया है, साथ ही डीजीसीए से लायसेंस प्राप्त किया गया है। यहां 01 मार्च 2021 से छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर हवाई सेवा से जुड़ गई। इस दिन 72 सीटर विमान द्वारा यहॉ से दिल्ली-जबलपुर-बिलासपुर-प्रयागराज वायु मार्ग में नियमित घरेलू विमान सेवा का संचालन प्रारंभ हुआ। इस एयरपोर्ट से प्रतिमाह लगभग तीन हजार यात्रियों द्वारा विमान सेवा का लाभ लिया जा रहा है। यहां से 5 जून 2022 से बिलासपुर-भोपाल के लिये नियमित घरेलू विमान सेवा भी प्रारम्भ हो चुकी है। इस एयरपोर्ट का विकास 4 सी व्हीएफआर श्रेणी में करने की योजना पर काम किया जा रहा है।

माँ महामाया एयरपोर्ट-प्रदेश के उत्तरी क्षेत्र को विमान सेवाओं से जोड़ने के लिए संभागीय मुख्यालय अम्बिकापुर के दरिमा एयरपोर्ट का विकास 3 सी व्हीएफआर श्रेणी में किया जा रहा है। इसके पूरा होने पर यहां 72 सीटर विमान से हवाई सेवा संचालन हो सकेगा। इसके साथ ही यहां रवने विस्तार व विकास कार्य के लिए 43.00 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति की गई है।

आटोमेटेड एटीसी सुविधा –जगदलपुर, बिलासपुर, अम्बिकापुर एयरपोर्ट में नियमित एटीसी सुविधा के विकास हेतु 8.00 करोड़ रूप्ए की लागत से ऑटोमेटेड एटीसी उपकरण स्थापित किए गए हैं।  इससे अब इन एयरपोर्ट में विमानन गतिविधियों के बढ़ने पर किसी भी समय हेलीकॉप्टर और विमान की उड़ान व लैण्डिंग हेतु आवश्यक जानकारी प्राप्ति की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

कोरबा में व्यावसायिक एयरपोर्ट-कोरबा में व्यवसायिक एयरपोर्ट के विकास हेतु सर्वे पूरा हो गया है। यहां रूमगरा स्थित हवाई पट्टी के सर्वे में इसे व्यावसायिक एयरपोर्ट विकास के लिए उपयुक्त पाया गया है। हवाई पट्टी के रनवे विस्तार हेतु यहां भूमि भी उपलब्ध है।

कोरिया में नवीन हवाई पट्टी-कोरिया में  नवीन हवाई पट्टी के विकास की योजना पर कार्य किया जा रहा है। हवाई पट्टी के विकास हेतु भूमि का चिन्हांकन कर तकनीकी सर्वे कार्य कराया जा चुका है।

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Priyanka (Media Desk)
Priyanka (Media Desk)प्रियंका (Media Desk)
"जय जोहार" आशा करती हूँ हमारा प्रयास "गोंडवाना एक्सप्रेस" आदिवासी समाज के विकास और विश्व प्रचार-प्रसार में क्रांति लाएगा, इंटरनेट के माध्यम से अमेरिका, यूरोप आदि देशो के लोग और हमारे भारत की नवनीतम खबरे, हमारे खान-पान, लोक नृत्य-गीत, कला और संस्कृति आदि के बारे में जानेगे और भारत की विभन्न जगहों के साथ साथ आदिवासी अंचलो का भी प्रवास करने अवश्य आएंगे।