दिनांक : 20-May-2024 06:28 PM
Follow us : Youtube | Facebook | Twitter
Shadow

शहीद महेंद्र कर्मा तेंदूपत्ता सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना से मिले दो लाख रुपए, बेटी की नहीं रुकेगी पढ़ाई

26/05/2022 posted by Priyanka (Media Desk) Chhattisgarh, India    

कैंसर से लड़ रही एक मां ने अंतिम दिनों में पति से कहा था कुंती को पढ़ाना, उसका ख्याल रखना। अपनी बेटी को पढ़ाने की मां की अंतिम इच्छा पूरी हो रही है और पिता अपनी बेटी को पढ़ा रहे है। पिता की इस कोशिश में शासन का भी पूरा साथ मिला है। शहीद महेंद्र कर्मा तेंदूपत्ता सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत परिवार को दो लाख रुपये मिले और इस पैसे ने कठिन समय में परिवार को सहारा दिया। योजना से मिले कुछ पैसे कुंती के पिता नोहरु ने उसकी पढ़ाई के लिए बचा के रखे है और कुछ पैसों से उधार चुकाया है।

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आज बकावंड में भेंट-मुलाकात के दौरान नोहरु पटेल ने तेंदूपत्ता संग्रहको के लिए चलाई जा रही इस योजना के लिए धन्यवाद दिया। दरअसल राजनगर के रहने वाले नोहरू पटेल की पत्नी की एक साल पहले स्तन कैंसर से मृत्यु हुई थी। नोहरु की पत्नी  ने मरने से पहले उससे कहा था कि वह अपनी बेटी कुंती का ख्याल रखे और उसे पढ़ाए।

खेती-बाड़ी और वनोपज संग्रहण कर जीवनयापन करने वाले नोहरु के लिए पत्नी का असमय जाना बड़ा संकट था। इस मुश्किल समय में नोहरु को सहारा मिला तेंदूपत्ता संग्रहको के लिए चलाई जा रही शहीद महेंद्र कर्मा तेंदूपत्ता सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना का। योजना से नोहरु को दो लाख मिले और इससे वह अपने दिवंगत पत्नी की अंतिम इच्छा पूरी कर पा रहे है।

वनांचल में रहने वाले नोहरू जैसे लाखों लोग आजीविका के लिए तेंदू पत्ता संग्रहण का काम करते है।  इसी हरे सोने के संग्राहकों के लिए शासन कई योजनाएं संचलित कर रही है। ऐसी ही एक योजना है शहीद महेंद्र कर्मा तेंदूपत्ता सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना, जिसके अंतर्गत तेंदूपत्ता मुखिया की सामान्य मृत्यु में 2 लाख और दुर्घटना के कारण मृत्यु से 4 लाख रूपये प्रदाय किया जाता है।

Author Profile

Priyanka (Media Desk)
Priyanka (Media Desk)प्रियंका (Media Desk)
"जय जोहार" आशा करती हूँ हमारा प्रयास "गोंडवाना एक्सप्रेस" आदिवासी समाज के विकास और विश्व प्रचार-प्रसार में क्रांति लाएगा, इंटरनेट के माध्यम से अमेरिका, यूरोप आदि देशो के लोग और हमारे भारत की नवनीतम खबरे, हमारे खान-पान, लोक नृत्य-गीत, कला और संस्कृति आदि के बारे में जानेगे और भारत की विभन्न जगहों के साथ साथ आदिवासी अंचलो का भी प्रवास करने अवश्य आएंगे।