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रायपुर : राजधानी में दो दिवसीय खेल मड़ई का हुआ समापन

08/08/2022 posted by Priyanka (Media Desk) Chhattisgarh, India    

राजधानी रायपुर में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर दो दिवसीय पारंपरिक खेल मड़ई का रंगारंग समापन आज स्वामी विवेकानंद स्टेडियम, कोटा रायपुर में हुआ। इस खेल मड़ई में राज्य के 17 जिलों के लगभग 700 प्रतिभागी ने हिस्सा लिया। खेल मड़ई में विशेष रूप से संरक्षित जनजातियों द्वारा पारंपरिक खेलों का प्रदर्शन किया गया।

राजधानी के विवेकानंद स्टेडियम कोटा में आयोजित किए गए खेल मड़ई में फुगड़ी, गेड़ी, रस्साकसी, मटका दौड़ सहित अन्य पारंपरिक खेलों में विभिन्न जिलों से आए प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। इस मड़ई में तीरंदाजी विशेष आकर्षण का केन्द्र रही। जनजातीय महोत्सव में स्कूली बच्चों के साथ युवाओं ने भी हिस्सा लिया। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में राज्य गठन के बाद यह पहला अवसर है, जब विशेष रूप से संरक्षित जनजातियों के पारंपरिक खेल मड़ई का इतने व्यापक आयोजन राज्य स्तर पर आयोजन किया गया।

आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा आयोजित इस खेल प्रतियोगिता में विभिन्न जनजातीय समुदायों द्वारा पारंपरिक रूप से खेले जाने वाले खेल जैसे तीरंदाजी, गुलेल, मटका दौड़, गिल्ली डंडा, गेड़ी दौड़, भौरा, फुगडी, बिल्ला रस्साखींच, सत्तुल, भारा दौड, बोरा दौड, सुई धागा दौड, मुदी लुकावन, तीन टंगड़ी दौड़ तथा नौकायन आदि का आयोजन किया गया। बालक एवं बालिकाओं हेतु दो वर्ग 14 वर्ष से 18 वर्ष आयु वर्ग तथा खुली प्रतियोगिता अंतर्गत 18 वर्ष से अधिक (महिला एवं पुरुष) हेतु पारंपरिक रूप से खेले जाने वाली खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की गई।  उल्लेखनीय है कि जिला स्तर पर जनजातीय अभिकरण क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी विकासखण्डों से खेलवार विशेष संरक्षित जनजातीय समुदायों से एंट्री आमंत्रित कर बीते 22 से 28 जुलाई तक खेल प्रतियोगिता जिलों में आयोजित की गई थी।

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Priyanka (Media Desk)
Priyanka (Media Desk)प्रियंका (Media Desk)
"जय जोहार" आशा करती हूँ हमारा प्रयास "गोंडवाना एक्सप्रेस" आदिवासी समाज के विकास और विश्व प्रचार-प्रसार में क्रांति लाएगा, इंटरनेट के माध्यम से अमेरिका, यूरोप आदि देशो के लोग और हमारे भारत की नवनीतम खबरे, हमारे खान-पान, लोक नृत्य-गीत, कला और संस्कृति आदि के बारे में जानेगे और भारत की विभन्न जगहों के साथ साथ आदिवासी अंचलो का भी प्रवास करने अवश्य आएंगे।