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छत्तीसगढ़: सीआरपीएफ जवान की चेतावनी- जमीन नहीं लौटाई तो ‘पान सिंह तोमर’ बन जाऊंगा

छत्तीसगढ़: सीआरपीएफ जवान की चेतावनी- जमीन नहीं लौटाई तो ‘पान सिंह तोमर’ बन जाऊंगा

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सुकमा (एजेंसी) | छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सल मोर्चे पर तैनात एक सीआरपीएफ जवान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें जवान ने चेतावनी दी है कि अगर उसकी जमीन नहीं लौटाई गई, तो वह डाकू पान सिंह तोमर बन जाएगा। उत्तरप्रदेश के रहने वाले जवान का आरोप है कि रिश्तेदारों ने उसकी जमीन पर कब्जा कर लिया है और परिजनों काे जान से मारने की धमकी देते हैं। इस संबंध में उसने पुलिस और प्रशासन से शिकायत भी की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। चाचा राजनीति में और दबंग, इसलिए पुलिस कार्रवाई से बच रही वीडियो में नजर आने वाला व्यक्ति खुद को सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन में तैनात आरक्षक प्रमोद कुमार बता रहा है। वीडियो के मुताबिक, प्रमोद इन दिनों सुकमा के पोलमपल्ली स्थित सीआरपीएफ कैंप में तैनात है। उत्तरप्रदेश के हाथरस निवासी प्रमोद का आरोप है कि वहां उसके तीन चाचा, परिवार को परेशान कर रहे हैं। वह मार
छत्तीसगढ़: प्रदेश के सबसे ऊंचे 101 फीट के रावण दहन को देखने उमड़ी भीड़, जमकर हुई आतिशबाजी

छत्तीसगढ़: प्रदेश के सबसे ऊंचे 101 फीट के रावण दहन को देखने उमड़ी भीड़, जमकर हुई आतिशबाजी

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रायपुर (एजेंसी) | छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दशहरा महोत्सव सम्पन्न हुआ। यह कार्यक्रम हर बार डब्ल्यूआरएस कॉलोनी मैदान में आयोजित किया जाता है। राज्यपाल अनुसूइया उइके, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विधायक कुलदीप जुनेजा, विकास उपाध्याय और महापौर प्रमोद दुबे समेत शहर के हजारों लोग मैदान में मौजूद थे। यहां अतिथियों के संबोधन के बाद रावण दहन का कार्यक्रम हुआ। 101 फीट ऊंची रावण मूर्ति जोरदार धमाके के साथ जली। नीचे खड़े लोग जय श्री राम के नारे लगा रहे थे। मेघनाथ और कुंभकर्ण के विशाल काय पुतले भी जलाए गए। बुराई पर अच्छाई का यह पर्व शहर में इसी अंदाज में पिछले 50 सालों से जारी है। प्रदेशभर के सभी शहरों में मंगलवार की शाम इसी तरह धूम-धाम से रावण दहन किया गया। https://youtu.be/skFiauJdYhU 5 हजार मीटर कपड़े और 1 टन कागज से बने थे पुतले यहां 101 फीट का रावण और 85-85 फीट के कुंभकर्ण और मेघनाद के
विजयादशमी विशेष: 600 वर्ष पुराना बस्तर दशहरा विश्व का सबसे लम्बा चलने वाला पर्व है, 75 दिनों तक मनाया जाता है

विजयादशमी विशेष: 600 वर्ष पुराना बस्तर दशहरा विश्व का सबसे लम्बा चलने वाला पर्व है, 75 दिनों तक मनाया जाता है

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बस्तर का दशहरा अपनी अभूतपूर्व परंपरा व संस्कृति की वजह से विश्व प्रसिद्ध है। यह कोई आम पर्व नहीं है यह विश्व का सबसे लंबी अवधि तक चलने वाला पर्व है। छत्तीसगढ़ के बस्तर में मनाया जाने वाला दशहरा 75 दिन तक मनाया जाता है। बस्तरवासी वगभग 600 साल से यह पर्व मनाते आ रहे हैं। बस्तर ही एकमात्र जगह है जहां दशहरे पर रावण का पुतला दहन नहीं किया जाता। यह पर्व बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की आराधना से जुड़ा हुआ है। बस्तर के आदिवासियों की अभूतपूर्व भागीदारी का ही प्रतिफल है कि बस्तर दशहरा की राष्ट्रीय पहचान स्थापित हुई। प्रतिवर्ष दशहरा पर्व के लिए परगनिया माझी अपने अपने परगनों से सामग्री जुटाने का प्रयत्न करते थे। सामग्री जुटाने का काम दो तीन महीने पहले से होने लगता था। इसके लिए प्रत्येक तहसील का तहसीलदार सर्वप्रथम बिसाहा पैसा बाँट देता था, जिससे गाँव-गाँव से बकरे सुअर भैंसे चावल दाल तेल नम
नवरात्रि विशेष: जानिए गंगरेल बांध के समीप स्थित माता अंगारमोती के बारे में

नवरात्रि विशेष: जानिए गंगरेल बांध के समीप स्थित माता अंगारमोती के बारे में

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गंगरेल बांध जिसे आर. एल. बांध ( रविशंकर सागर बांध ) भी कहते है। सागर बांध भारत के छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित है। यह महानदी नदी के पार बनाया गया है छत्तीसगढ़ में यह सबसे लम्बा बांध है। यह बांध वर्षभर के सिचाई प्रदान करता है जिससे किसान प्रतिवर्ष दो फसलों का उत्पादन कर सकते है और भिलाई स्टील प्लांट और नई राजधानी रायपुर को भी पानी प्रदान करता है। प्लांट में 10 मेगावाट की हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर क्षमता है। यह रायपुर राजधानी से 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सन् 1978 में जब गंगरेल बांध बनकर तैयार हुआ उस समय अनेक गाँव के साथ अनेक देवी-देवतओं के मंदिर भी जल में समां गए थे, जिनमें से एक माँ अंगारमोती का मंदिर भी था। इसके पश्चात विधि-विधान के साथ देवी की मूर्ति को पूर्व स्थान से हटाकर गंगरेल बांध के समीप स्थापित किया गया है। यहाँ विशाल वृक्ष के नीचे खुले चबूतरे पर उनकी प्राण-प्रति
नवरात्रि विशेष: जानिए राजनांदगांव स्थित बर्फानी धाम और माँ पाताल भैरवी का विशाल मंदिर

नवरात्रि विशेष: जानिए राजनांदगांव स्थित बर्फानी धाम और माँ पाताल भैरवी का विशाल मंदिर

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बर्फानी धाम छत्तीसगढ़ में राजनांदगांव शहर में एक विशाल हिन्दू मंदिर है। यह दुर्ग से 40 किलोमीटर (25 मिनट) दूर है। एक बड़ा शिवलिंग मंदिर के शीर्ष पर देखा जा सकता है, जबकि एक बड़ी नंदी की प्रतिमा सामने खड़ी है। मंदिर का निर्माण तीन स्तरों में किया गया है। सबसे नीचे माँ पाताल भैरवी का मंदिर है। दूसरा मंजिल में नवदुर्गा या त्रिपुरा सुंदरी माता का मंदिर है और सबसे ऊपर शिव जी का मंदिर है। वीडियो देखे https://youtu.be/56bBWe_72YI बर्फानी धाम राजनांदगाव कैसे पहुंचे सड़क मार्ग से: पाताल भैरवी देवी मंदिर राजनंदगांव में आशा नगर के पास स्थित है। यह राजनांदगांव बस स्टेशन से सिर्फ 5 किमी दूर स्थित है। यह लोकप्रिय रूप से बरफ़ानी धाम या पाताल भैरवी मंदिर के नाम से जाना जाता है। ट्रेन से: सीधे लोकल या पैसेंजर ट्रेने रायपुर से उपलब्ध हैं। राजनांदगांव रायपुर से 89 किमी (1:30 घंटे) दूर
नवरात्रि विशेष: जानिए बिलासपुर स्थित प्राचीन महामाया मंदिर, रतनपुर का इतिहास

नवरात्रि विशेष: जानिए बिलासपुर स्थित प्राचीन महामाया मंदिर, रतनपुर का इतिहास

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भारत के दक्षिण पूर्व में स्थित करोड़ों लोगों की श्रद्धा एवं आस्था के प्रतीक, वास्तुकला की मिसाल तथा हमारी संस्कृति की पहचान "श्री महामाया मंदिर, रतनपुर" आपका स्वागत करता है। कई दशकों से इस मंदिर ने अनेक इतिहासकारों तथा पुरातत्त्वविदों को अपनी ओर आकर्षित किया है। चारों ओर से हरी हरी पहाड़ियों से घिरी, लगभग 150 तालों को अपनी गोद में समेटे रतनपुर नगरी में वर्ष में 2 बार भक्तों का तांता लगता है। भक्तगण लाखों की संख्या में नवरात्र के पर्व पर अपनी आराध्य देवी महामाया की प्रतिमा-द्वय के दर्शनों के लिए उमड़ पड़ते हैं। बिलासपुर-अंबिकापुर राजमार्ग (छत्तीसगढ़) में बिलासपुर से 25 किलोमीटर पर ऐतिहासिक रत्नपुर (अब रतनपुर) की नगरी में स्थित दर्जनों छोटे मंदिर, स्तूप, किले तथा अन्य निर्माणों के पुरावशेष मानों अपनी कहानी बताने के लिये तत्पर हैं। महामाया मंदिर का इतिहास रतनपुर का इतिहास लगभग एक सहस्
डोंगरगढ़ : बीमार बुजुर्ग महिला को गोद में उठाकर 100 सीढ़ियां चढ़ कर मंदिर तक ले गयी महिला सिपाही पूजा देवांगन

डोंगरगढ़ : बीमार बुजुर्ग महिला को गोद में उठाकर 100 सीढ़ियां चढ़ कर मंदिर तक ले गयी महिला सिपाही पूजा देवांगन

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राजनांदगांव. छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ मंदिर में हुई एक घटना ने पुलिस का सकारात्मक चेहरा पेश किया है। राजनांदगांव जिले के इस मंदिर में बेसुध पड़ी एक महिला को उसका पति ऊपर चढ़ाने की कोशिश कर रहा था। बीमार महिला बेहद कमजोर होने की वजह से सीढ़ियां नहीं चढ़ पा रही थी। पास के ही सहायता केंद्र में तैनात महिला पुलिसकर्मी पूजा देवांगन ने कंधों से सहारा देकर महिला को ऊपर मंदिर तक ले जाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद पूजा ने उसे गोद में उठाया और तकरीबन 100 सीढ़ियां चढ़कर महिला को मां बम्लेश्वरी के दर्शन करवाए। बिलासपुर के रहने वाले लेखक द्वारिका प्रसाद अग्रवाल इस दौरान खुद वहां मौजूद थे। सिपाही पूजा के जज्बे को उन्होंने अपने कैमरे में कैद कर लिया। द्वारिका ने बताया कि पूजा से उनका परिचय सोशल मीडिया के जरिए हुआ था। वह यहां पहुंचकर पूजा से मुलाकात कर ही रहे थे कि, तब ही उनके साथ मंदिर आई पत्नी
नवरात्रि विशेष: कौशल्या माता मंदिर चंदखुरी, सात तालाबों से घिरा है श्री राम की माता कौशल्या का यह मंदिर

नवरात्रि विशेष: कौशल्या माता मंदिर चंदखुरी, सात तालाबों से घिरा है श्री राम की माता कौशल्या का यह मंदिर

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से करीब 27 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चंदखुरी ग्राम में माता कौशल्या का प्राचीन मंदिर विराजमान है। यह मंदिर दुर्लभतम है, जैसे पुष्कर में ब्रह्मा जी का एकमात्र प्राचीन मंदिर है, वैसे ही रायपुर के पास कौशल्या जी का एकमात्र मंदिर स्थित है। प्राकृतिक सुषमा के अनेक अनुपम दृश्य इस स्थल पर दृष्टिगोचर होते हैं। इस मंदिर के गर्भगृह में मां कौशल्या की गोद में बालरुप में भगवान श्रीरामजी की वात्सल्यम प्रतिमा श्रद्धालुओं एवं भक्तों का मन मोह लेती है। दक्षिण कौशल यानी छत्तीसगढ़ राज्य मां कौशल्या के नाम से जाना जाता है। इसे भगवान राम का ननिहाल कहा जाता है। सोमवंशी नरेश ने माता कौशल्या और भगवान राम को 7 तालाबों के बीच स्थापित कर आस्था का दीप जलाया था। इस भक्ति भाव की किरणें आज पूरे देश में फैल रही हैं। छत्तीसगढ़ की पावन भूमि में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की जननी माता कौ
नवरात्रि विशेष: जानिए दंतेवाड़ा की माँ दंतेश्वरी के बारे में, जहाँ गिरे थे माता सती के दाँत

नवरात्रि विशेष: जानिए दंतेवाड़ा की माँ दंतेश्वरी के बारे में, जहाँ गिरे थे माता सती के दाँत

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दन्तेश्वरी मंदिर जगदलपुर शहर से लगभग 84 किमी (52 मील) स्थित है। माता दंतेश्वरी का यह मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध एवं पवित्र मंदिर है, यह माँ शक्ति का अवतार है। माना जाता है कि इस मंदिर में कई दिव्य शक्तियां हैं। दशहरा के दौरान हर साल देवी की आराधना करने के लिए आसपास के गांवों और जंगलों से हजारों आदिवासी आते हैं। यह मंदिर जगदलपुर के दक्षिण-पश्चिम में दंतेवाड़ा में स्थित है और यह पवित्र नदियां शंकिणी और डंकिनी के संगम पर स्थित है, यह छह सौ वर्ष पुराना मंदिर भारत की प्राचीन विरासत स्थलों में से एक है और यह मंदिर बस्तर क्षेत्र का सांस्कृतिक-धार्मिक-सामाजिक का प्रतिनिधित्व है। आज का विशाल मंदिर परिसर इतिहास और परंपरा की सदियों से वास्तव में खड़ा स्मारक है। इसके समृद्ध वास्तुशिल्प और मूर्तिकला और इसके जीवंत उत्सव परंपराओं का प्रमाण है। दंतेश्वरी माई मंदिर इस क्षेत्र के लोगों के लिए सबसे महत्वप
नवरात्रि विशेष: जानिए चंद्रपुर की चंद्रहासिनी माता के बारे में जिनका मुख है चंद्र की तरह

नवरात्रि विशेष: जानिए चंद्रपुर की चंद्रहासिनी माता के बारे में जिनका मुख है चंद्र की तरह

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माता सती के अंग जहां-जहां धरती पर गिरे थे, वहां आज वर्तमान में शक्ति माता श्री दुर्गा के शक्तिपीठ स्थापित हैं।छत्तीसगढ़ में भी अनेक स्थानों माता के शक्तिपीठ स्थापित है। जिनमे से एक माता चंद्रहासिनी का मंदिर है। जांजगीर-चाम्पा जिले के डभरा तहसील में मांड नदी,लात नदी और महानदी के संगम पर स्थित है एक गांव चन्द्रपुर, जहाँ शक्ति माँ चंद्रहासिनी देवी का मंदिर है। यहाँ सिद्ध मां दुर्गा के 52 शक्तिपीठों में से एक स्वरूप मां चंद्रहासिनी के रूप में विराजित है। चंद्रमा की आकृति जैसा मुख होने के कारण इसकी प्रसिद्धि चंद्रहासिनी और चंद्रसेनी या चंद्रासैनी मां के नाम से जानी जाती है। चंद्रपुर जिला मुख्यालय जांजगीर-चाम्पा से 120 किलोमीटर तथा रायगढ़ से 32 किलोमीटर और सारंगढ़ से 22 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। यहां माता चंद्रसेनी का वास है। वहाँ कुछ ही दुर (लगभग 1.5कि.मी.) पर माता नाथलदाई का मंदिर है ज