#temple मनमोहक है बालोद का सिया देवी मंदिर और वॉटरफॉल

छत्तीसगढ़ अंचल में दुर्ग संभाग के बालोद जिले, गुरुर तहसील से धमतरी मार्ग में ग्राम सांकरा (बालोद से 25 कि. मी. दूर ) से दक्षिण की ओर 7 कि. मी. कि दूरी पर देव स्थल ग्राम नारागांव स्थित हैं। शक्ति और सौन्दर्य का अनोखा संगम अपने अप्रतिम प्राक्रतिक सौन्दर्य से पर्यटकों का मन मोह लेती हैं। सिया देवी झरना दंडकारण्य पर्वत से प्रारंभ होकर झलमला से होते हुए वन मार्ग में 17 कि.मी. की दुरी तय करती हैं। प्राक्रतिक जल प्रपात एवं गुफ़ाओ से आच्छादित नारागांव स्थित सियादेवी, आध्यात्मिक एवं पर्यटक स्थल के रूप में प्रसिद्ध हैं।

वनाच्छादित यह पहाड़ी स्थल प्राक्रतिक जल स्त्रोतो के कारण और भी मनोहारी दिखाई पड़ता हैं। इस पहाड़ी पर दो स्थानों से जल स्त्रोतों का उद्गम हुआ हैं। पूर्व दक्षिण से आने वाला झोलबाहरा और दक्षिण पश्चिम से आने वाला तुमनाला का संगम देखते ही बनता हैं।






इसी स्थल पर देवादिदेव महादेव का पवित्र देव स्थल शोभायमान हैं। संगम स्थल से कल-कल करती जालधारा मात्र 100 मी. की दूरी पर एक प्राक्रतिक झरने के रूप में परिवर्तित हो जाती हैं। इस झरने कि उचाई 50 फीट हैं। इतनी ऊँचाई से पानी का चट्टानों पर गिरकर कोहरे के रूप में परिवर्तित हो जाना इसके प्राक्रतिक सौंदर्य को परिलक्षित होती हैं। पास ही स्थित वाल्मीकि आश्रम से वाल्मीकि जी इस द्रश्य को निहारते हुए प्रतीत होते है।

बालोद से 25 किमी. दूर पहाड़ी पर स्थित सियादेवी मंदिर प्राकृतिक सुंदरता से शोभायमान है जो धार्मिक पर्यटन स्थल कहा जाता है। यहां पहुंचने पर झरना, जंगल व पहाडो से प्रकृति की खूबसूरती का अहसास होता है। इसके अलावा रामसीता लक्ष्मण, शिव पार्वती, हनुमान, राधा कृष्ण, सियादेवी, भगवान बुद्ध, बुढादेव की प्रतिमाएं है। यह स्थल पूर्णत: रामायण की कथा से जुडा हुआ है।

माता पार्वती ने यहाँ सीता बनकर भगवान राम की परीक्षा ली थी   

जनश्रुति के अनुसार, प्राचीन समय में यह स्थान दंडकारण्य क्षेत्र में आता था। यह माना जाता है कि भगवान राम और लक्ष्मण अपने वनवास काल में देवी सीता को ढूंढने के लिए यहां आये थे जिन्हें दानव राजा रावण ने अपहरण कर लिया था। पत्नी के प्रति निष्ठा का परीक्षण करने के लिए माता पार्वती ने माता सीता के रूप में भगवान राम की परीक्षा ली। लेकिन भगवान राम ने उन्हें पहचान लिया और माँ के रूप में सम्बोधन किया। माता पार्वती को इस घटना से अपराध बोध हुआ उन्होंने इसके बारे में भगवान शिव को बताया और क्षमा मांगी  तब शिव जी ने माँ पार्वती को देवी सीता के अवतार में इसी स्थान में विराजमान होने के लिए कहा तभी से यह स्थान देवी सिया मैया के नाम से प्रसिद्ध है। यहाँ सीता माता के चरण के निशान भी चिन्हित हैं। एक और विश्वास है कि देवी का वाहन बाघ रात में माता की रक्षा करने के लिए रात में आता था। यह स्थान महर्षि वाल्मीकि की ध्यान भूमि के रूप में भी प्रसिद्ध है।



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सिया देवी मंदिर जाने का सर्वोत्तम समय

बारिश में यह जगह खूबसूरत झरने की वजह से अत्यंत मनोरम हो जाती है। परिवार के साथ जाने के लिए यह बहुत बेहतरीन पिकनिक स्पाट है। यहाँ जाने का सबसे अच्छा समय जुलाई से फरवरी तक है।

यहाँ कैसे पहुंचे 

सड़क मार्ग से: यह स्थान बालोद जिले में स्थित है जो मुख्य शहर कार द्वारा 20 किलोमीटर की दुरी पर है। यहाँ पहुंचने के लिए कई बसे और टैक्सियां उपलब्ध हैं।

ट्रेन द्वारा: निकटतम रेलवे स्टेशन बालोद रेलवे स्टेशन है, जो दुर्ग रेलवे स्टेशन से दुर्ग-दल्ली राजहारा रेल लाइन के माध्यम से जुड़ा हुआ है।

उड़ान से: निकटतम हवाई अड्डा स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा रायपुर है जो कि कार द्वारा लगभग 290 किमी दूर है।


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