जयसिंह अग्रवाल के लिए उइके का पार्टी छोड़ना शुभ रहा - गोंडवाना एक्सप्रेस
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जयसिंह अग्रवाल के लिए उइके का पार्टी छोड़ना शुभ रहा

रायपुर (एजेंसी) | ऐन चुनाव के पहले रामदयाल उइके का भाजपा में जाना न केवल उनके लिए राजनीतिक रूप से आत्मघाती बना वरन उनकी पाली-तानाखार से हुई हार ने जयसिंह अग्रवाल का मंत्री बनने का सफर भी आसान कर दिया। उइके एक बार मरवाही व 2003 से तीन बार पाली-तानाखार से विधायक चुने गए। यदि वे कांग्रेस में होते तो माना जा रहा था कि चौथी बार भी चुनाव जीतते। तब उनका आदिवासी नेता होना जयसिंह के लिए बड़ी बाधा बन सकता था।

1998 में मरवाही सीट से थे भाजपा विधायक






उइके 1998 में अविभाजित मध्यप्रदेश में मरवाही सीट से भाजपा के विधायक रहे। उन्होंने छत्तीसगढ़ गठन के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के उप चुनाव लड़ने के लिए अपनी सीट छोड़ दी थी और कांग्रेस में शामिल हो गए थे। जोगी के करीबी रहे उइके के जनता कांग्रेस गठन के समय उससे जुड़ने के कयास लगे थे। इसी साल जनवरी में उन्हे प्रदेश कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। भाजपा की सदस्यता लेने के बाद उइके ने कहा कि जहां आदिवासी नेता को मान सम्मान नहीं मिलेगा तो ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं।

कांग्रेस में अपनी उपेक्षा से नाराज़ थे

पिछले दिनों राहुल गांधी छत्तीसगढ़ दौरे पर आए थे तो विधायक होने के बाद भी उइके को मंच पर जगह नहीं मिली थी। हाल ही में छत्तीसगढ़ चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस की ओर से बनाई गई सात सदस्यीय स्क्रीनिंग कमेटी में उइके का नाम नहीं था। वे इस उपेक्षा से नाराज थे। रामदयाल उइके पाली-तानाखार से मौजूदा विधायक हैं और इस इलाके में उनका अच्छा-खासा वर्चस्व माना जाता है। वे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते थे।



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