Flipkart-Walmart Deal: ट्रेडर्स ने ट्रिब्यूनल से किया आग्रह वालमार्ट-फ्लिपकार्ट डील रद्द करें

नई दिल्ली (एजेंसी)| अमेरिकी रिटेल कंपनी वालमार्ट द्वारा फ्लिपकार्ट को खरीदने का मामला नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) में पहुंच गया है। ट्रेडर्स के संगठन कैट ने मंगलवार को इसके खिलाफ याचिका दायर की। इसमें डील को प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) से मिली मंजूरी को चुनौती दी गई है। कैट ने अपीलेट ट्रिब्यूनल से सौदे को रद्द करने का आग्रह किया है। प्रतिस्पर्धा आयोग ने 8 अगस्त को सौदे को मंजूरी दी थी।

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने बयान में कहा कि सौदे के खिलाफ आयोग में आपत्तियों का विस्तृत दस्तावेज जमा किया गया था। संगठन के अनुसार आयोग ने यह तो माना कि ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म पर डिस्काउंट और लागत से कम दाम पर माल बेचा जाता है, लेकिन उसने यह कहकर सौदे को मंजूरी दे दी कि यह उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है




वालमार्ट-फ्लिपकार्ट का गठजोड़ ईकॉमर्स के जरिए रिटेल बाजार में कीमतों को प्रभावित करेगा। छोटे व्यापारी मुकाबला नहीं कर पाएंगे। इससे असमान प्रतिस्पर्धा का वातावरण बनेगा। कैट के अनुसार ईकॉमर्स कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म पर ज्यादा बिक्री करने वाले चुनिंदा विक्रेताओं को डिस्काउंट दिया। वालमार्ट के आने के बाद यह भेदभाव और बढ़ने की आशंका है। इससे छोटे विक्रेता बाजार से बाहर हो जाएंगे। यह प्रतिस्पर्धा के खिलाफ तो है ही, एफडीआई नियमों की भी अवहेलना है। एफडीआई नियमों में समान मौके देने की बात है। एसोचैम के अनुसार 2017 में भारत का रिटेल मार्केट 47 लाख करोड़ रु. का था। यह 2020 में 65% बढ़कर 77 लाख करोड़ का हो जाएगा।

कैट ने इस डील को एफडीआई नियमों के भी खिलाफ बताया था। वालमार्ट दुनिया भर से माल लाकर अपने ब्रांड से बेचेगी। प्रतिस्पर्धा खत्म करने के लिए लागत से भी कम मूल्य पर बेचने और डिस्कॉउंटिंग का रास्ता अपनाया जा सकता है। ऑनलाइन विक्रेताओं की एसोसिएशन ने भी इस डील पर आपत्ति जताई थी।



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