किसानों को एमएसपी दिलाने के लिए नई खरीद नीति ‘अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा)’ को कैबिनेट की मंजूरी

नई दिल्ली (एजेंसी) | केंद्र सरकार ने बुधवार को नई फसल खरीद नीति को मंजूरी दे दी। इसके तहत यदि तिलहन किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम पर फसल बेचने की नौबत आई तो सरकार कीमत में अंतर का भुगतान करेगी। इसे अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (आशा) नाम दिया गया है। कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने बताया कि दो साल के लिए 15,053 करोड़ मंजूर किए गए हैं। इस साल 6,250 करोड़ रु. खर्च होंगे। इस नीति का मकसद तिलहन उत्पादन बढ़ाना और खाद्य तेल का आयात कम करना है। देश हर साल 1.4 से 1.5 करोड़ टन खाद्य तेल आयात करता है। यह घरेलू जरूरत का 70% है। कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि धान-गेहूं जैसी फसलों के लिए पहले से जारी खरीद योजनाएं जारी रहेंगी।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रमोदी ने ट्वीट कर कहा, “देश का हर नागरिक हमारे मेहनतकश किसानों का आभारी है। हम 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के सपने को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन सुनिश्चित करने के लिए हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।”






जरूरत का 70% खाद्य तेल आयात होता है, इसे घटाना मकसद

किसी राज्य में अधिकतम 25% फसल के लिए ही मदद मिलेगी।  योजना में केंद्र की तीन स्कीम होंगी, राज्य इनमें से कोई एक स्कीम चुन सकते हैं। साथ ही पेट्रोल में मिलाने के लिए गन्ने के रस से बनने वाले इथेनॉल की कीमत 25% बढ़ाई गई। इसे 47.13 से बढ़ाकर 59.13 रु. लीटर किया गया है। इससे चीनी के भारी स्टॉक की समस्या से निपटने और क्रूड आयात घटाने में मदद मिलेगी। मिलों के पास गन्ने के भुगतान के लिए अधिक कैश उपलब्ध होगा।

ये है केंद्र सरकार की तीन स्कीम

1. प्राइस डेफिसिएंसी पेमेंट स्कीम

यह नई स्कीम है। इसकी रूपरेखा मध्य प्रदेश की भावांतर भुगतान योजना की तरह होगी। लेकिन लाभ सिर्फ तिलहन किसानों को मिलेगा। किसी राज्य में अधिकतम 25% फसल के लिए ही मदद मिलेगी। इसके लिए किसानों को पहले रजिस्ट्रेशन कराना होगा। सरकार फसल नहीं खरीदेगी, बल्कि कीमत में अंतर का भुगतान करेगी।

2.पायलट ऑफ प्राइवेट – प्रोक्योरमेंट स्टॉकिस्ट स्कीम

राज्य पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 8 जिलों में तिलहन खरीदने के लिए निजी कंपनियों का चुनाव कर सकते हैं।

3.प्राइस सपोर्ट स्कीम

यह स्कीम पहले से लागू है। इसके तहत दाम एमएसपी से नीचे जाने पर केंद्रीय एजेंसियां किसानों से फसल खरीदती हैं।

तेल एवं गैस उत्पादन बढ़ाने के लिए रॉयल्टी में छूट देने का फैसला

ओएनजीसी व वेदांता के कुछ ब्लॉक से तेल उत्पादन पर सरकार 4,500 रु. प्रति टन रॉयल्टी लेती है। इसे आधा किया जाएगा। गैस पर रॉयल्टी में 75% छूट दी जाएगी। पेट्रोलिमय मंत्री ने कहा कि इससे जो नया निवेश होगा, उससे 20 साल में 50 लाख करोड़ रु. के पेट्रोलियम पदार्थों के उत्पादन का अनुमान है।



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