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Chhattisgarh

इस सरकारी स्कूल में बस्ते के बोझ के बिना पढ़ने जाते है बच्चे, अब जिले के 60 स्कूलों को बैगलेस करने की तैयारी

बैगलेस फॉर्मूले की सफलता को देखकर अब जिला शिक्षा अधिकारी इस साल जिले के 60 स्कूलों को बैगलेस करने की तैयारी में हैं।

सूरजपुर | छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले मे बच्चों के भारी-भरकम बैग का बोझ देख यहां के एक शिक्षक ने खेल के फार्मूले से स्कूल चलाने की नई पहल शुरू की है। स्कूली बच्चों को बैग के बोझ से निजात दिलाने के लिए सूरजपुर के एक सरकारी स्कुल के शिक्षक ने अपने स्कूल को ही बैगलेस कर दिया है। जिसकी वजह से अब बच्चों को स्कूल जाने के लिए भारी बैग की जरूरत नहीं होगी, वह बिना बैग के भी स्कूल जाकर शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं।

वहीं शिक्षक की इस पहल को काफी सराहा जा रहा है। प्रदेश के पहले बैगलेस स्कूल की तर्ज पर ही अब शिक्षा विभाग के अधिकारी कई जिलों में स्कूलों को बैगलेस बनाने की तैयारी कर रहे हैं।

रुनियाडीह में बैगलेस हुआ स्कूल

सूरजपुर से लगभग 20 किमी दूर स्थित रुनियाडीह गांव का है, यहां के सरकारी स्कूल के शिक्षक ने बच्चों को पढ़ाने के लिए नया तरीका अपनाते हुए इन बच्चों को स्कूल में बैग लाने के बोझ से मुक्त कर दिया है। अपने इस निर्णय की वजह से गांव का यह सरकारी स्कूल और स्कूल के शिक्षक दोनों ही सुर्खियों में हैं। सिस्टम से हटकर कुछ नया करने की चाह में स्कूल के शिक्षक ने इस स्कूल को जिले का पहला बैगलेस स्कूल बना दिया है।

स्कूल के प्रिंसिपल ने लिया स्कूल को बैगलेस बनाने का निर्णय

स्कूल के प्रिंसिपल सिमांचल त्रिपाठी ने यह निर्णय लेते हुए बच्चों को बैग से छुट्टी दिला दी है। प्रिंसिपल सिमांचल त्रिपाठी के मुताबिक उन्होंने कहीं पढ़ा था कि अमेरिका में किताबें काफी लंबे समय तक चलाई जाती हैं। वहाँ किताबों को फेंकने की बजाय किसी दूसरे को दे दी जाती है। ताकि अगला व्यक्ति पुस्तक का लाभ उठा सके। इस लेख को पढ़ने के बाद ही प्रिंसिपल त्रिपाठी ने स्कूल को बैगलेस करने का निर्णय लिया और उसे स्कूल पर लागू भी किया।

प्रिंसिपल के निर्णय की जिला शिक्षा विभाग भी कर रहा तारीफ

स्कूल प्रिंसिपल द्वारा लिए इस निर्णय से छात्र भी काफी खुश हैं क्योंकि उन्हें भी भारी-भरकम किताबों से छुट्टी मिल गई है। वहीं उनकी किताबें भी अब जल्दी खराब नहीं होंगी और उन बच्चों के अलावा अब दूसरे बच्चे भी इन किताबों का इस्तेमाल कर सकेंगे। स्कूल प्रिंसिपल के इस निर्णय से जिले के शिक्षा विभाग के अधिकारी भी इस पहल की तारीफ कर रहे हैं। बैगलेस की सफलता को देखकर अब जिला शिक्षा अधिकारी इस साल जिले के 60 स्कूलों को बैगलेस करने की तैयारी में हैं।

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