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प्रदेश में खेल विकास प्राधिकरण का गठन, मुख्यमंत्री अध्यक्ष और खेल मंत्री होंगे उपाध्यक्ष

प्रदेश में खेल विकास प्राधिकरण का गठन, मुख्यमंत्री अध्यक्ष और खेल मंत्री होंगे उपाध्यक्ष

politics, sports, छत्तीसगढ़
रायपुर | खेल एवं युवा कल्याण विभाग की ओर से बुधवार को छत्तीसगढ़ खेल विकास प्राधिकरण का गठन कर दिया गया। विभाग ने इसका पंजीकरण सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के तहत कराया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस प्राधिकरण के अध्यक्ष और खेल एवं युवा कल्याण मंत्री उमेश कुमार पटेल उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। खास बात यह है कि राज्य सरकार के सभी मंत्रियों को इसका पदेन सदस्य बनाया गया है। वहीं प्रमुख सचिव को प्राधिकरण के संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में खेलों के विस्तार के लिए प्राधिकरण बनाने की घोषणा की थी दरअसल, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में खेल सुविधाओं के विस्तार के साथ ही खिलाड़ियों को बेहतर खेल अधोसंरचना मुहैया कराने के लिए खेल विकास प्राधिकरण के गठन की घोषणा की थी। प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य खेल क्षेत्र में नितिगत निर्णय, खेल से जुड़े विभागों से समन्वय और राष्ट्रीय व
राज्य सरकार की उपलब्धि: रोजगार देने में छत्तीसगढ़ का देश में चौथा स्थान

राज्य सरकार की उपलब्धि: रोजगार देने में छत्तीसगढ़ का देश में चौथा स्थान

politics, छत्तीसगढ़
रायपुर (एजेंसी) | छत्तीसगढ़ ने मनरेगा के क्रियान्वयन में फिर उत्कृष्टता हासिल की है। 2019-20 में मनरेगा जॉब कार्डधारी परिवारों को 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराने में छत्तीसगढ़ देश में चौथे स्थान पर है। अप्रैल 2019 से 21 दिसम्बर 2019 तक पिछले नौ महीनों में प्रदेश के 83 हजार 436 परिवारों को 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया गया है। राजस्थान, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के बाद छत्तीसगढ़ इस मामले में पूरे देश में चौथे स्थान पर है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने अधिकारियों-कर्मचारियों की तारीफ करते हुए कहा है कि वे आगे भी इस योजना का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से जारी रखें ताकि वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर हम इसमें देश के प्रथम तीन राज्यों में अपनी जगह पक्की कर सकें।मनरेगा की जिला एवं जनपद टीम द्वारा ऐसे परिवार जिन्हें 25, 50 और 75 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है।, उन पर फो
भूपेश सरकार के पुरे हुए 1 साल: गांव और किसानों को जोड़ा, हरेली-तीज का नया उत्साह, 450 करोड़ की बिजली भी बांटी

भूपेश सरकार के पुरे हुए 1 साल: गांव और किसानों को जोड़ा, हरेली-तीज का नया उत्साह, 450 करोड़ की बिजली भी बांटी

politics, छत्तीसगढ़
रायपुर (एजेंसी) | पिछले साल 17 दिसंबर को शपथ लेने वाली भूपेश बघेल सरकार ने सालभर में धान खरीदी पर 21 हजार करोड़ रुपए खर्च किए हैं। किसानों के साथ-साथ शहरियों को भी बिजली बिल हाफ के जरिए 450 करोड़ रुपए से ज्यादा की बिजली बांट दी गई है। सालभर में भूपेश सरकार ने अफसरों पर लगाम कसने के लिए ताबड़तोड़ तबादले किए। सभी विभागों के प्रमुख बदल दिए गए। नरवा गरवा घुरुवा बारी के लिए 4000 करोड़ रुपए का फंड देकर प्रदेश के लगभग 80 फीसदी किसानों और ग्रामीणों से सीधे जुड़ने का रास्ता तलाश लिया है। जनभागीदारी, जनविश्वास एवं जनआशीर्वाद से आज आपकी जनहितकारी सरकार नवा छत्तीसगढ़ गढ़ने हेतु प्रारंभ किये गए यज्ञ का प्रथम वर्ष पूर्ण कर रही है।तमाम अवरोध एवं प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद भी इस यज्ञ की अग्नि को हमने कम नहीं होने दिया है।आप सभी प्रदेशवासियों को ढेर सारी बधाई। pic.twitter.com/6iMNHZEErB— Bhup
छत्तीसगढ़: ओबीसी का कोटा 27% करने के बाद गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण

छत्तीसगढ़: ओबीसी का कोटा 27% करने के बाद गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण

छत्तीसगढ़
रायपुर (एजेंसी) | राज्य के ओबीसी वर्ग को नौकरियों में 27 फीसदी आरक्षण देने के फैसले के बाद सरकार ने गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने का ऐतिहासिक फैसला किया है। इसके अंतर्गत आने वाले लोगों का क्राइटेरिया तय कर दिया गया है। इस फैसले के बाद राज्य में अब आरक्षण का प्रतिशत बढ़कर 82 हो जाएगा। इसे लागू करने के लिए सरकार अध्यादेश लाएगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक के बाद कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा 10% आरक्षण के लिए जो नार्म्स तय किए गए हैं, उनका पालन किया जाएगा। साथ ही आरक्षण की नई व्यवस्था लागू करने के लिए आवश्यकता होने पर कमीशन का भी गठन किया जाएगा। बता दें कि 15 अगस्त को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण देने की घोषणा की थी। साथ ही एससी का आरक्षण एक फीसदी बढ़ाकर 13 फीसदी करने का ऐलान किया था। इसके बाद साम
छत्तीसगढ़: 492 करोड़ के ब्याज के बदले छत्तीसगढ़ को मिला 1000 करोड़ का क़र्ज़

छत्तीसगढ़: 492 करोड़ के ब्याज के बदले छत्तीसगढ़ को मिला 1000 करोड़ का क़र्ज़

छत्तीसगढ़
रायपुर(एजेंसी) | छत्तीसगढ़ सरकार ने मंगलवार को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआइ) से एक हजार करोड़ का कर्ज फिर लिया है। 7.03 फीसद की ब्याज के साथ सरकार ने इस रकम को सात वर्ष में लौटाने का वादा किया है। चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में सरकार ने कर्ज नहीं लिया था, लेकिन दूसरी तिमाही शुरू होने के साथ ही सरकार फिर कर्ज की कतार में खड़ी हो गई है। सरकार ने यह क़र्ज़ खजाने को मजबूत बनाये रखने के इरादे से लिया है। आने वाले दिनों में सरकार को धान खरीदना है। यह कर्ज इस वित्तीय वर्ष की पहली किश्त है। छत्तीसगढ़ सरकार इस साल 11,000 करोड़ तक का क़र्ज़ ले सकती है। आरबीआई ने 14 अन्य राज्यों के लिए भी नीलामी की थी। लेकिन छत्तीसगढ़ को सबसे कम ब्याज पर क़र्ज़ दिया गया है। मंगलवार को छत्तीसगढ़ समेत 14 राज्यों ने कुल 14 हजार 953 करोड़ का कर्ज लिया है। इसमें बंगाल ने सर्वाधिक 25 सौ करोड़ 15 वर्ष के लिए उधार लिया है।
छत्तीसगढ़: धान खरीदने के लिए एक हजार करोड़ का फिर कर्ज ले रही सरकार, आज मिल जाएगी राशि

छत्तीसगढ़: धान खरीदने के लिए एक हजार करोड़ का फिर कर्ज ले रही सरकार, आज मिल जाएगी राशि

छत्तीसगढ़
रायपुर (एजेंसी) | प्रदेश में सरकार की वित्तीय स्थिति खराब नहीं तो अच्छी भी नहीं है। यही वजह है कि सरकार ने आरबीआई के आगे फिर से झोली फैलाई है। अब एक हजार करोड़ रुपए कर्ज की जरूरत है। इसके लिए सरकार अपने सरकारी बांड को बेचने जा रही है। सरकार सात साल में यह कर्ज चुकाएगी। आरबीआई से यह राशि कल हासिल हो जाएगी। खबरों के मुताबिक सरकार यह कर्ज धान खरीदी के लिए ले रही है। अफसरों का कहना है कि निगम चुनावों से पहले राज्य कर्मियों को सातवें वेतनमान के एरियर्स की पहली किश्त देने के भी संकेत हैं। वित्त विभाग के अफसरों का दावा है कि राज्य की वित्तीय स्थिति अच्छी है। बड़े भुगतान लंबित नहीं हैं। केवल राज्य के खजाने को मजबूती देने के लिए सरकार यह कर्ज लेना चाह रही है। बीते 5 महीने में यह पहली किश्त होगी। राज्य सरकार को आरबीआई ने 11 हजार करोड़ से अधिक की क्रेडिट लिमिट दी है। इसके अलावा भी सरकार 1650 क
लोकसभा चुनाव से पहले आईएएस अफसरों के प्रभार में बदलाव, भीम सिंह बने मनरेगा के आयुक्त

लोकसभा चुनाव से पहले आईएएस अफसरों के प्रभार में बदलाव, भीम सिंह बने मनरेगा के आयुक्त

politics
रायपुर (एजेंसी) | भूपेश बघेल की राज्य सरकार ने चार आईएएस अफसरों के देर शाम प्रभार बदल दिये हैं। जिन आईएएस अधिकारियों के प्रभार बदल दिए गये हैं। उनमें 2003 बैच के निरंजन दास अब सिर्फ प्रबंध संचालक राज्य नागरिक आपूर्ति निगम बने रहेंगे। उन्हें नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन और प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कारपोरेशन के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। 2006 बैच के आईएएस भुवनेश यादव को प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस काॅरपोरेशन का एडिशनल चार्ज दिया गया है। भुवनेश के पास अभी स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव और आयुक्त का प्रभार था। 2008 बैच के आईएएस भीम सिंह को मनरेगा का आयुक्त बनाया गया है। साथ ही उन्हें संचालक कृषि विभाग एवं गन्ना आयुक्त का एडिशनल चार्ज दिया गया है। वहीं रीता शांडिल्य को महात्मा गांधी नरेगा के आयुक्त पद से मुक्त कर दिया गया है। 2008 बैच के आईएए
डीजीपी का फरमान: अफसरों ने अगर सरकार की आलोचना की तो होगी कार्रवाई

डीजीपी का फरमान: अफसरों ने अगर सरकार की आलोचना की तो होगी कार्रवाई

छत्तीसगढ़
रायपुर (एजेंसी) | सुकमा जिला के पूर्व एसपी जितेंद्र शुक्ला के ट्रांसफर विवाद के बाद डीजीपी ने आईपीएस अफसरों को सरकार की नीतियों की आलोचना न करने का कड़े निर्देश जारी किए है। साथ ही इसका उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। पिछले छह दिनों से हो रहे अफसरों की तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए डीजीपी ने यह फरमान सुनाया है। सुकमा के एसपी जितेंद्र शुक्ला को ट्रांसफर करने के बाद से सरकार और अफसरों के बीच तनातनी इस मामले में सरकार पहले ही कड़ा रुख अपना चुकी है। ट्रांसफर को मंत्री कवासी लखमा के साथ जवाबी पत्राचार करने वाले सुकमा के एसपी जितेंद्र शुक्ला का ट्रांसफर कर दिया गया था। इसके बाद शुक्ला ने सोशल मीडिया में अपने ट्रांसफर को लेकर हैरानी जताई थी। इस मामले को भी राज्य सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दो टूक कहा था कि मंत्री को पत्र लिखने का अधिका
पिछली सरकार ने जिन्हें जबरदस्ती नौकरी से निकाला, उन केस का रिव्यू करेगी सरकार

पिछली सरकार ने जिन्हें जबरदस्ती नौकरी से निकाला, उन केस का रिव्यू करेगी सरकार

छत्तीसगढ़
रायपुर (एजेंसी) | पिछली सरकार ने जिन लोगों को जबरदस्ती नौकरी से निकाल दिया था, उन मामलों का सरकार रिव्यू करेगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्य सचिव को इन मामलों का रिव्यू करने के निर्देश दिए हैं। कांग्रेस विधायकों ने अनिवार्य सेवानिवृत किए गए अफसरों और कर्मचारियों की बहाली के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। वरिष्ठ विधायक सत्यनारायण शर्मा और अमरजीत भगत ने मुख्यमंत्री से अनिवार्य सेवानिवृत्त किए गए अफसर-कर्मचारियों को बहाल करने की मांग की थी। अब सरकार सभी मामलों का रिव्यू करने जा रही है। बता दें कि भाजपा सरकार के समय में 50 साल की आयु या फिर 20 साल की सेवा पूरी करने वाले करीब 100 अफसरों व कर्मचारियों को सरकार ने जबरदस्ती नौकरी से निकाल दिया था। इसमें से एक मामले में तो चतुर्थ श्रेणी में अनुकंपा नियुक्ति पर पदस्थ महिला को भी रिटायर कर दिया गया था। इस सदमे के कारण भृत्य के पद पर पद
11 आईएएस और 6 आईपीएस अफसरों का तबादला, वीके सिंह और आईजी के बीच तालमेल नहीं बैठ रहा

11 आईएएस और 6 आईपीएस अफसरों का तबादला, वीके सिंह और आईजी के बीच तालमेल नहीं बैठ रहा

छत्तीसगढ़
रायपुर (एजेंसी) | छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक विभाग में एक बार फिर 11 आईएएस और 6 आईपीएस अफसरों का तबादला किया गया है। आईपीएस अफसर ओपी पाल लगभग साढ़े 3 साल तक अपर परिवहन आयुक्त थे। उन्हें पुलिस मुख्यालय लाया गया है। जीपी सिंह अब तक पुलिस मुख्यालय में बिना विभाग के आईजी थे। ईओडब्ल्यू में कल्लूरी की नियुक्ति भी चर्चा में थी और वहां से ट्रांसपोर्ट में जाने पर भी पुलिस मुख्यालय के गलियारों में हैरानी है। जीपी सिंह की ईओडब्लू-एसीबी में पोस्टिंग के साथ उनका कद बढ़ाया गया है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद उन्हें दुर्ग आईजी के पद से हटाकर मुख्यालय अटैच कर दिया गया था। हालांकि कुछ ही दिनों बाद उन्हें अंतागढ़ टेपकांड की जांच कर रही एसआईटी की मॉनीटरिंग का जिम्मा सौंपकर मुख्यधारा में लाने के संकेत दे दिए गए थे। अब उन्हें ईओडब्लू और एसीबी में पोस्टिंग दी गई, जहां नान और ई-टेंडरिंग जैसे सरकार से