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ताड़मेटला कांड: ग्रामीणों ने समन लेकर पहुंचे राजस्व अमले को बैरंग लौटाया और कहा- घर हमारा जला, हम ही पेशी व जेल जाएं अब कोई नहीं देगा गवाही

ताड़मेटला कांड: ग्रामीणों ने समन लेकर पहुंचे राजस्व अमले को बैरंग लौटाया और कहा- घर हमारा जला, हम ही पेशी व जेल जाएं अब कोई नहीं देगा गवाही

politics, छत्तीसगढ़
जगदलपुर | 2012 में सुकमा जिले के ताड़मेटला, मोरपल्ली,  तिम्मापुरम में आगजनी और दोरनापाल में सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश पर हमले की न्यायिक जांच कर रहे एक सदस्यीय आयोग के सामने शुक्रवार को बयान दर्ज कराने से ग्रामीणों ने इंकार कर दिया है। जस्टिस टीपी शर्मा की अध्यक्षता वाले आयोग ने गवाही के लिए ताड़मेटला के 105 ग्रामीणों को समन्स भेजा था। इन ग्रामीणों के न आने पर आयोग ने समन्स की तामिली के लिए गए राजस्व अमले के सदस्यों से पूछताछ की और उनके बयान दर्ज किए। नोटिस तामिली के लिए गई टीम के सदस्यों ने अपने एक जैसे बयान में कहा कि ग्रामीणों ने नोटिस ले लिया और गवाही देने आयोग के सामने जाना है या नहीं ये बैठक कर बताया जाएगा। लेकिन जब टीम के सदस्य उन्हें लेने पहुंचे तो ग्रामीणों ने साफ इंकार कर दिया। उनका कहना था कि चिंतलनार में सीबीआई की टीम ने वर्ष 2015-16 में हमारा बयान दर्ज कर लिया
‘आमचो संकल्प मलेरिया मुक्त बस्तर‘ का ग्राम चारगांव से हुआ आगाज, 15 जनवरी से 14 फरवरी चलेगा मलेरिया मुक्ति अभियान

‘आमचो संकल्प मलेरिया मुक्त बस्तर‘ का ग्राम चारगांव से हुआ आगाज, 15 जनवरी से 14 फरवरी चलेगा मलेरिया मुक्ति अभियान

politics, special, छत्तीसगढ़
बस्तर | विकासखण्ड कोण्डागांव के ग्राम चारगांव में आज कलेक्टर नीलकंठ टीकाम द्वारा मलेरिया मुक्ति के लिए चलाये जा रहे संभाग स्तरीय अभियान का जिले में शुभारंभ किया। ‘आमचो संकल्प मलेरिया मुक्त बस्तर‘ अभियान के शुरुवात पर कलेक्टर ने कहा कि कुछ वर्ष पूर्व तक पोलियो, चेचक जैसे रोगो को समाप्त करना एक परिकल्पना प्रतीत होता था। परन्तु निरंतर प्रयासों से आज इन रोगो से हमारा देश मुक्त हो चुका है इसी प्रकार संकल्प के द्वारा हमें मलेरिया को जड़ से उखाड़ फेकना है। सुपोषण का लक्ष्य भी तभी सफल हो पायेगा जब हम बच्चों को मलेरिया जैसे रोगो से बचा पायेंगे, क्योंकि ये रोग बच्चों में खून की कमी एवं कमजोरी लाते है जो इन्हें भविष्य में समर्थवान बनने से रोकता है। इस दौरान कलेक्टर ने मच्छरदानी लगाने अपने आस-पड़ोस में पानी जमा न होने देने एवं घरो के आस-पास साफ-सफाई रखने की अपील की साथ ही बीमार पड़ने पर तुरंत चिकित
अम्बिकापुर : मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना से पारा मोहल्ला में मिल रही स्वास्थ्य सुविधा, जिले के 28 हजार मरीजों को मिला निःशुल्क स्वास्थ्य जांच एवं उपचार

अम्बिकापुर : मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना से पारा मोहल्ला में मिल रही स्वास्थ्य सुविधा, जिले के 28 हजार मरीजों को मिला निःशुल्क स्वास्थ्य जांच एवं उपचार

special, छत्तीसगढ़
अम्बिकापुर | मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना से आदिवासी एवं दुरस्थ अंचलों के ग्रामीणों के लिए घर पहुँच स्वास्थ्य सुविधा मिलने से इसका भरपूर फायदा उठा रहे हैं। ग्रामीण साप्ताहिक हाट बाजार में सब्जी-भाजी खरीदते हुए बीमारी का भी ईलाज करा लेते हैं। कलेक्टर डाॅ0 सारांश मित्तर के मार्गदर्शन में जिले के सातों विकासखण्ड के 24 साप्ताहितक हाट बाजारों में 2 अक्टूबर गांधी जयंती से योजना का शुभारंभ किया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. पीएस सिसोदिया ने बताया है कि जिले में 12 जनवरी 2020 तक 28 हजार मरीजों का स्वास्थ्य जांच कर उपचार किया गया है। डाॅ. सिसोदिया ने बताया कि मैनपाट विकासखण्ड में कुल 4 हाट बाजार में 107 स्वास्थ्य शिविरों से 5 हजार 353 मरीज, बतौली विकासखण्ड में कुल 3 हाट बाजार में 75 शिविर से 3 हजार 600 मरीज, धौरपुर विकासखण्ड में कुल 4 हाट बाजार में 107 शिविर से
पहल: अब बस्तर में होगी ‘मोती की खेती’, मुफ्त प्रशिक्षण भी देंगे

पहल: अब बस्तर में होगी ‘मोती की खेती’, मुफ्त प्रशिक्षण भी देंगे

special, छत्तीसगढ़
जगदलपुर | बस्तर की आबोहवा अब सीपों से मोती निकालने के लिए उपयुक्त मानी जाने लगी है। सीपों को पालने के लिए एक संस्था आगे आई है, जो बस्तर के आदिवासियों को सीपों पालने का प्रशिक्षण देने के साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम में जुट गई है। बीते करीब 20 महीनों की मेहनत के बाद हाल में सीपों से मोतियों की पहली खेप संस्था ने निकाली है। बताया जाता है कि शहर में आदिवासियों के लिए काम करने वाली संस्था सॉफ्टवेयर (सोसाइटी ऑफ ट्राइबल वेलफेयर एंड रूरल एजुकेशन) ने करीब 20 महीने पहले सीपों को पालना शुरू किया। इसके बाद उन्हें मोतियों की पहली खेप मिली है। संस्था के संचालक मंडल ने आदिवासियों को अब इसका मुफ्त प्रशिक्षण देने की बात कही है। 20 हजार से शुरुआत, 20 महीनों बाद हर माह 15 हजार आय: बस्तर में सीपों का पालन कर मोतियां बनाने करने वाली मोनिका ने बताया कि कम निवेश में व्यक्ति आत्मनिर्भ
नगरीय निकाय चुनाव 2019 परिणाम: कवर्धा व बीजापुर नगर पालिकाओं में कांग्रेस का कब्जा, काेंडागांव में भाजपा का अध्यक्ष

नगरीय निकाय चुनाव 2019 परिणाम: कवर्धा व बीजापुर नगर पालिकाओं में कांग्रेस का कब्जा, काेंडागांव में भाजपा का अध्यक्ष

politics, छत्तीसगढ़
बस्तर | कवर्धा और बीजापुर नगर पालिका में भी कांग्रेस का कब्जा हो गया है। जबकि काेंडागांव में भाजपा का अध्यक्ष चुना गया। कवर्धा में कांग्रेस के ऋषि शर्मा अध्यक्ष चुने गए। उन्हें मतदान के दौरान 21 वोट मिले। जबकि भाजपा प्रत्याशी उमंग पांडे को 6 पार्षदों का समर्थन मिला। दरअसल, कवर्धा में 27 वार्ड हैं। इनमें से 19 में कांग्रेस और 6 में भाजपा उम्मीदवार जीते थे। जबकि 2 पर अन्य ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस प्रत्याशी को अन्य दोनों का भी साथ मिल गया। यहां 15 साल बाद नगर पालिका में कांग्रेस का अध्यक्ष बना है। बीजापुर नगर पालिका में 15 साल बाद कांग्रेस का कब्जा वहीं बीजापुर नगरपालिका में भी भाजपा ने चुनाव में हिस्सा नहीं लिया। भाजपा के बायकॉट के बाद कांग्रेस के कांग्रेस के बेनहूर रावतिया को अध्यक्ष और पुरुषोत्तम सल्लुर को उपाध्यक्ष चुन लिया गया। यहां भी दोनों का निर्वाचन निर्विरोध रूप से हुआ।
नक्सलगढ़ गांव पाहुरनार में लगा दंतेवाड़ा का सबसे बड़ा हेल्थ कैंप, पेड़ के नीचे ओटी बनाकर किया ऑपरेशन

नक्सलगढ़ गांव पाहुरनार में लगा दंतेवाड़ा का सबसे बड़ा हेल्थ कैंप, पेड़ के नीचे ओटी बनाकर किया ऑपरेशन

video, छत्तीसगढ़
दंतेवाड़ा (एजेंसी) | छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले का नक्सगढ़ कहा जाने वाला गांव पाहुरनार। इस गांव में डेढ़ साल पहले नक्सलियों ने सरपंच पोसेराम की हत्या कर दी थी। अब इसी गांव में मंगलवार को जिले का सबसे बड़ा हेल्थ कैंप लगाया गया। इंद्रावती नदी पार कर पहली बार 300 जवानों के सुरक्षा घेरे में 20 से ज्यादा डॉक्टरों की टीम, 80 स्वास्थ्य कर्मचारी और ऑफिसर इस गांव में पहुंचे। जहां एक दिन का जिला अस्पताल खुला। खास बात यह रही कि पेड़ के नीचे ही ऑपरेशन थियेटर बनाकर दो ग्रामीणों की सर्जरी भी की गई। 2000 से ज़्यादा ग्रामीण यहां पहुंचे। इस दौरान 1734 ग्रामीणों ने अपना इलाज कराया। यहां ओपीडी खुली, फिजियोथेरेपी हुई, आंखों की जांच, ब्लड टेस्ट, हर तरह की बीमारियों की जांच कर दवाइयां दी गईं। नारायणपुर, बीजापुर ज़िले के 2000 से ज्यादा ग्रामीण पहुंचे https://www.youtube.com/watch?v=cAISR1Y5bcg पाहुरनार में प
नक्सली नेता रमन्ना की शवयात्रा, बंदूक टांगी महिला नक्सलियों ने दिया कंधा, लंबी बीमारी के कारण हो गई थी मौत

नक्सली नेता रमन्ना की शवयात्रा, बंदूक टांगी महिला नक्सलियों ने दिया कंधा, लंबी बीमारी के कारण हो गई थी मौत

छत्तीसगढ़
जगदलपुर (एजेंसी) | छत्तीसगढ़ समेत छह राज्यों में वांछित नक्सली रमन्ना की मौत की पुष्टि के बाद उसके अंतिम संस्कार की पहली फोटो सामने आई है। बताया जा रहा कि करीब 1.50 करोड़ के इनामी नक्सली की लंबी बीमारी के बाद 7 दिसंबर को मौत हो गई थी। छह राज्यों की पुलिस को नक्सली रमन्ना की तलाश थी। जेल से भागने के बाद पुलिस के पास उसकी फोटो तक नहीं थी कई दिन के संशय के बाद माओवादियों की ओर से ही 12 दिसंबर को उसकी मौत की पुष्टि की गई। 25 जून 1989 को जगदलपुर जेल से फरार होने के बाद पुलिस व खुफिया विभाग रमन्ना की तस्वीर तक नहीं ढूंढ़ सका था। सोमवार को मिली रमन्ना की अंत्येष्टि की तस्वीर में उसकी अर्थी को हथियारबंद महिला नक्सली कंधा देते दिख रही हैं। बताया जा रहा कि नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी के सदस्य रमन्ना की मौत टाइफाइड से 7 दिसंबर को पालागुड़ा में हुई। दो दिनों बाद उसकी पत्नी सावित्री व बेटा रमेश बोटेलं
लापरवाही: सामुदायिक अस्पताल में 35 बैगा-आदिवासी महिलाओं की नसबंदी करने के बाद महिलाओं को जमीन पर ही लेटा दिया

लापरवाही: सामुदायिक अस्पताल में 35 बैगा-आदिवासी महिलाओं की नसबंदी करने के बाद महिलाओं को जमीन पर ही लेटा दिया

छत्तीसगढ़
बस्तर (एजेंसी) | छत्तीसगढ़ में संरक्षित बैगा-आदिवासी जनजाति की महिलाओं की नसबंदी पर प्रतिबंध है। इसके चलते क्षेत्र में बड़ी संख्या में महिलाएं नसबंदी कराने छग सीमा से लगे मध्यप्रदेश के सामुदायिक अस्पताल समनापुर (डिंडौरी) जाती है। गुरुवार को भी करीब 200 की संख्या में महिलाएं खुद के खर्च से गाड़ी किराया गए वहां गई थी। लापरवाही देखिए कि उस अस्पताल में पर्याप्त बेड (बिस्तर) नहीं था। इसके बावजूद एक के बाद एक 35 महिलाओं की नसबंदी कर दी गई। बेड न होने पर ऑपरेशन के बाद महिलाओं को जमीन पर लेटा दिया गया। फर्श पर लेटी महिलाएं ऐसी लग रही थी कि जैसे वे मरीज न होकर लाशें हैं। गुरुवार रात को जब अस्पताल में माहौल बिगड़ा, तो स्टाफ ने आनन-फानन में महिलाओं को वापस भेज दिया। ये सभी महिलाएं पंडरिया ब्लॉक के गांवों की रहने वाली है। दरअसल, अस्पतालों को महिला नसबंदी के लिए टारगेट दिया जाता है। सीमावर्ती इस
बस्तर: पुलिस कैंप का विरोध फिर हुआ शुरू, दिल जीतने घायल किसान का जवानों ने इलाज किया

बस्तर: पुलिस कैंप का विरोध फिर हुआ शुरू, दिल जीतने घायल किसान का जवानों ने इलाज किया

छत्तीसगढ़
दंतेवाड़ा (एजेंसी) | छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जिले दंतेवाड़ा के गांव पोटाली में एक बार फिर से सुरक्षा बल के कैंप का विरोध किया जा रहा है। शनिवार को सैकड़ो की संख्या में पोटाली बाजार स्थल में ग्रामीण जमा हुए और नारेबाजी की । ग्रामीणों ने दावा किया कि पोटाली की जिस जमीन पर कैम्प खोला गया है उस जमीन पर ग्रामीणों का अधिकार है। ग्रामीणों ने कहा कि जब तक कैंप नहीं हटेगा विरोध जारी रहेगा। सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी भी इस विरोध में शामिल होने पहुंची। इस विरोध को लेकर पुलिस का मत है कि क्षेत्र में नजूल भूमि पर कैंप बनाया गया है, यह विरोध नक्सलियों के इशारे पर हो रहा है। इसके अलावा दवाओं और जरूरी सामानों को ग्रामीणों में बांटकर फोर्स ग्रामीणों का दिल जीतने की कोशिश कर रही है। कोर्ट जाने की तैयारी कैंप का विरोध कर रहे ग्रामीणों के बीच पहुंची सोनी सोरी ने कहा यह विरोध जारी रहेगा। कैंप, ब
छत्तीसगढ़: जेल में बंद निर्दोष आदिवासियों के रिहाई के लिए आज किया गया आंदोलन, हजारो आदिवासी जुटे

छत्तीसगढ़: जेल में बंद निर्दोष आदिवासियों के रिहाई के लिए आज किया गया आंदोलन, हजारो आदिवासी जुटे

video, छत्तीसगढ़
बस्तर (एजेंसी) | बस्तर की जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों की रिहाई के लिए आज एक दिवसीय आंदोलन किया गया। सामजिक कार्यकर्ता और आप नेत्री सोनी सोरी ने इलाके के एक दर्जन सरपंचों के साथ दंतेवाड़ा पहुंचकर एसडीएम से आंदोलन किया। एसडीएम ने 9 अक्टूबर को कुआकोंडा में पांच से 6 हजार लोगों की भीड़ के साथ सिर्फ एक दिन आंदोलन करने की अनुमति दे दी थी। इससे पहले सभी अनिश्चितकालीन आंदोलन करने की मांग कर रहे थे। अब एक दिन की अनुमति के बाद भी आंदोलन जारी रखने की बात कही जा रही है। https://youtu.be/LD3Q2labmxw मिली जानकारी के अनुसार 5 अक्टूबर से दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर के आदिवासी बस्तर की अलग-अलग जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों की रिहाई की मांग को लेकर पालनार में डटे हुए हैं। आदिवासियों को कुआकोंडा से अनिश्चितकालीन आंदोलन की शुरुआत करनी थी लेकिन आंदोलन के लिए वैधानिक अनुमति नहीं मिलने के कारण