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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का ऐलान- ‘अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ूंगी’, खराब सेहत का दिया हवाला

इंदौर (एजेंसी) | विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (66) ने अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है। सुषमा ने मंगलवार को इंदौर में यह घोषणा की।  उन्होंने इंदौर में पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि वह अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी। उन्होंने इसके पीछे अपने स्वास्थ्य का हवाला दिया है। सुषमा ने कहा कि इस तरह के फैसले पार्टी करती है, लेकिन मैंने अगला चुनाव नहीं लड़ने का मन बना लिया है। सुषमा मध्यप्रदेश के विदिशा से लोकसभा सदस्य हैं। वे देश की सबसे युवा विधायक और किसी राज्य की सबसे युवा कैबिनेट मंत्री रह चुकी हैं।

सुषमा स्वराज मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रचार करने पहुंची थीं। सुषमा स्वराज इस वक्त 66 साल की हैं और वह फिलहाल मध्य प्रदेश के विदिशा से सांसद हैं। मूलरूप से हरियाणा के अंबाला कैंट की रहने वाली सुषमा स्वराज वकालत के पेशे से राजनीति में आई हैं। उनके पिता आरएसएस के प्रमुख सदस्य थे. सुषमा अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सूचना प्रसारण मंत्री रह चुकी हैं।

कुशल वक्ता के रूप में पहचान रखने वाली सुषमा दिल्ली की मुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं। वह कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के खिलाफ वेल्लारी से चुनाव लड़ चुकी हैं, हालांकि यहां उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। संसद में दिए इनके भाषणों की हमेशा चर्चा होती है। सुषमा सभ्य शब्दों में विरोधियों पर तीखे हमले करती हैं। मौजूदा मोदी सरकार में भी सुषमा विदेश मंत्रालय जैसा अहम पद संभाल रही हैं।

सुषमा 2009 और 2014 में विदिशा से लोकसभा चुनाव जीतीं। 2014 में उन्होंने कांग्रेस के लक्ष्मण सिंह को चार लाख से ज्यादा वोट से हराया था। सुषमा ने सबसे पहला चुनाव 1977 में लड़ा। तब वे 25 साल की थीं। वे हरियाणा की अंबाला सीट से चुनाव जीतकर देश की सबसे युवा विधायक बनीं। उन्हें हरियाणा की देवीलाल सरकार में मंत्री भी बनाया गया। इस तरह वे किसी राज्य की सबसे युवा मंत्री रहीं।

1998 में दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं

नब्बे के दशक में सुषमा राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हो गईं। अटलजी की सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया। 1998 में उन्होंने अटलजी की कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। हालांकि, इसके बाद हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा हार गई। पार्टी की हार के बाद सुषमा ने विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी और राष्ट्रीय राजनीति में लौट आईं।

1999 में बेल्लारी लोकसभा सीट पर सोनिया से हारीं

1996 में हुए लोकसभा चुनाव में सुषमा दक्षिण दिल्ली से सांसद बनी थीं। इसके बाद 13 दिन की अटलजी की सरकार में उन्हें केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनाया गया। मार्च 1998 में दूसरी बार अटलजी की सरकार बनने पर वे एक फिर से आईबी मिनिस्टर बनीं। 1999 में उन्होंने बेल्लारी लोकसभा सीट पर सोनिया के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन वे यहां हार गईं।

कांग्रेस के सामने दुविधा, राहुल को कैसे पेश करें- सुषमा

इंदौर में सुषमा ने पत्रकारों के सामने कांग्रेस के घोषणा पत्र पर जमकर बोला हमला। सुषमा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा- कांग्रेस पार्टी के सामने सबसे बड़ी दुविधा यह है कि वह राहुल गांधी को जनता के सामने किस रूप में पेश करे। राहुल कभी मंदिर जाते हैं, तो कभी मानसरोवर चले जाते हैं। वे खुद को जनेऊधारी ब्राह्मण कहते हैं। उन्होंने कहा कि शिवराज सरकार ने मप्र में विकास के कई कार्य किए हैं। उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की कोई विरोधी लहर नहीं है। सत्ता विरोधी लहर तब होती, जब सामने कोई बड़ा नेतृत्व होता है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने घोषणा पत्र में किसान कर्ज माफी, स्वंय सहायता समूह संदस्यों की कर्जमाफी भ्रामक वादे हैं। जनता इसमें नहीं फसेंगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता के सामने कांग्रेस की भ्रामक राजनीति नहीं टिकने वाली है।

उन्होंने कहा, ‘हमने देखा जनआर्शीवाद यात्रा में जनता शिवराज के लिए घंटों खड़ी रही। सुषमा ने शिवराज सरकार के संबल योजना, लाडली लक्ष्मी योजना की तारीफ की। मुख्यमन्त्री सड़क योजना हमने जनता से किये वादे पूरे किए हैं. जनता ऐसी पार्टी को क्यों चुने, जिनके कार्यकाल में जनता बुनियादी सुविधा के मोहताज रही। हमने प्रवासी भारतीयों को सुरक्षा देने का काम किया। हमने परेशानी में फसे 2 लाख लोगों को देश लाने का काम किया है।

लालकृष्ण आडवाणी के सक्रिय राजनीति में नहीं होने के सवाल पर सुषमा ने कहा कि अधिक उम्र की वजह से वह चुनाव प्रचारों से दूर हैं। सुषमा ने कहा कि टिकट वितरण में उनसे भी सलाह मशविरा लिया जाता है।

वही पाकिस्तान से भारत लाई गई युवती गीता के सवाल पर सुषमा स्वराज ने कहा कि उसके मां-पिता की तलाश की जा रही है। उन्होंने कहा कि वह गीता की शादी की कोशिश में भी जुटी हैं। उन्होंने कहा कि गीता अब कभी भी पाकिस्तान नहीं भेजी जाएगी। उसके मां-पिता की तलाश में बिहार समेत कई राज्यों में पोस्टर लगाए गए हैं। आठ परिवारों के डीएनए की जांच किए गए, लेकिन इनमें से किसी का भी गीता से मैच नहीं नहीं हो पा रहा है।

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