Chhattisgarh

उम्मीदों की नई रोशनी लेकर आया ‘रोजगार रूट’, रोजगार के अवसरों की उपलब्धता बनी अंधेरी राहों सें रौशन सवेरा के रास्ते

सूरजपुर | गांव में रहने वाली महिलाएं जो समाजिक आर्थिक रूप से पीछड़ेपन का दंश झेलते हुए, अपने परिवार के साथ मासूम बच्चों के पढाई सहित अन्य जरूरतों की पूर्ति करना एक बड़ी चुनौती थी। ऐसी सैकड़ों महिलाओं के लिए सशक्त सहारा कहें या अवसर जिलें के कलेक्टर दीपक सोनी ने सुराजी सूरजपुर पहल के अंतर्गत रोजगार रूट संचालन के लिए विविध उत्पादों का निर्माण व विक्रय के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए महिला ग्राम संगठन के रूप में कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध करवाया।

जिसके उपरांत अवसरों को उपलब्ध कराने सें आज के समय मे एक सफल व्यवसायी उपक्रम को संचालित करनें वाले सदस्य के रूप में अपनी पहचान के साथ आर्थिक विकास के राहो पर सफलता की इबारत दर्ज करा रही है। यह रोजगार रूट वर्तमान में जिलें के 17 ग्राम पंचायतों  में मषरूम उत्पादन, अचार, पापड़ निर्माण, हस्तनिर्मित साबुन, हर्बल निमाईल, गोबर के गमले, दिया एवं मूर्ती निर्माण, चेन लिंक फेंसिग, आर.सी.सी. पोल निर्माण, पेवर ब्लाक निर्माण, वर्मीकम्पोस्ट, मूंगफली की चिक्की निर्माण, अगरबत्ती, सिलाई-कढ़ाई, मोरिंगा पावउर एवं बेकरी उत्पाद, बोट परिचालन, ई-रिक्षा परिचालन, मुर्गीपालन, डेयरी उत्पाद एवं प्रिटिंग प्रेस जैसी गतिविधियों को संचालित करने के लिए अलग अलग 18 ग्राम संगठनों के 3030 महिलाएं लाभांन्वित हो रही हैं। इसमें सबसे अहम  525 ऐसी महिलाएं है । इन्हीं में शामिल जिला मुख्यालय से कुछ दूरी पर स्थित ग्राम तिलसीवा में प्रगति महिला ग्राम संगठन द्वारा मशरूम उत्पादन कर रही है।इस संगठन की शुरुआत विगत 06 अक्टूबर सें 08 अक्टुबर तक तीन दिवसीय प्रशिक्षण देकर शुरुआत किया गया।

इस ग्राम संगठन 17 ऐसी महिलाएं है, जो विधवा, परित्यक्ता एवं बेहद गरीब परिवार की सदस्य हैं, इन्हें महिला संगठन में सदस्य के रूप में जोड़कर रोजगार प्रदान किया गया है ।इस संगठन के सदस्यों में शामिल महिलाएं मशरूम उत्पादन के साथ  नरवा, गरूवा, घुरूआ और बाड़ी योजना के अंतर्गत बाड़ी विकास के तहत अपनें खेतों में वर्तमान समय में आलु, प्याज, मटर के साथ अन्य सब्जियों का भी उत्पादन कर अतरिक्त आय अर्जित कर रही हैं।

इस संगठन की सदस्य 26 वर्षीय अजयकुमारी पति राजेंद्र सिंह जो तिलसीवा के गोंडपारा बस्ती की रहने वाली है, उन्होंने बताया कि उनके पति राजेंद्र सिंह द्वारा महिने में कभी कभार मजदूरी का अवसर मिलने पर किसी तरह से परिवार का जीवन यापन करने में अभाव के बीच गुजर रही थी। इसी दरम्यान गांव में एनआरएलएम के माध्यम से महिला ग्राम संगठन गठन की जानकारी मिलने पर सदस्य के रूप में जुड़ी और प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अपने घर पर ही मशरूम उत्पादन प्रारंभ किया जो बीते पांच माह के अंतराल में करीब 85 किलो मशरूम उत्पादन हुआ और इसकी बिक्री करीब 200 रूपये प्रति किलोग्राम अनुसार करनें सें हासिल हुई आमदनी नें जीवन में बदलाव के लिए सशक्त माध्यम और आशा मिली है।

इससे होने वाली आमदनी सें अपनी बड़ी पुत्री जो पांच वर्ष की होने वाली है, उसकी अच्छी परवरिश के साथ शिक्षित करने के लिए अब किसी तरह से परेशानी उनके सामने नहीं है। इसी संगठन सें जुड़ी मुनिया, गणेशी, मतिबाई और करमेन जो पति की आकस्मिक निधन होने के बाद अपने परिवार का मुखिया होनें के साथ साथ सदस्यों का भरण पोषण के लिए कभी गांव में मनरेगा तो कभी निर्माण कार्य में मजदूरी करने के अलावा शासन से प्राप्त होने वाले पेशन राशि के माध्यम से अभावों के बीच जीवन यापन करने को विवश थी।

जब उन्हें इस संगठन के सदस्य के रूप में जुड़ने का अवसर मिला तो प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद इन्हें अपने परिवार के सदस्यों और बच्चों को अच्छी परवरिश के साथ शिक्षित करने के लिए मशरूम का उत्पादन करनें की शुरुआत खुद के घर पर शुरुआत करनें के बाद से अर्जित आमदनी नें उनके जीवन में एक नई  खुशहाली के साथ बदलाव का अवसर प्राप्त होना सपने को हकीकत में तब्दील होना बताया है।

संगठन की सदस्य श्रीमती सुशीला सिंह ने बताया कि उनके परिवार के पास खेती के लिए ना तो जमीन थी ना ही गांव में मजदूरी करने का अवसर प्राप्त होता था, जिससे अपने 10 वर्षिय बेटे की पढाई और परवरिश की चिंता सबसे बड़ी परेशानी थी,जबसें महिला संगठन के सदस्य बतौर जुड़नें के बाद मशरूम उत्पादन करनें सें वर्तमान समय में उनका 10 वर्षीय बेटे को गांव में संचालित मुख्यमंत्री डीएवी पब्लिक स्कूल में दाखिला कराने के साथ पढाई सें जुड़ी जरूरत के साथ परिवार का जीवन यापन करने में सबसे बड़ी सौगात महिला संगठन के साथ जुड़ने के बाद मिला है, जिससे उनके परिवार की परेशानियों को दूर हो रही है।इनके अलावा संगठन की सभी 32 महिला सदस्यों ने जीवन में एक नया सवेरा और कलेक्टर श्री सोनी के द्वारा उनके बीच पहुचकर संगठन सें जुड़ने के बाद उत्पादन करनें का आत्मविश्वास की अलख जगाई है।जो इन महिलाओं के जीवन में बदलाव का माध्यम बनने के साथ सदस्यों ने जिलें के कलेक्टर श्री दीपक सोनी को अवसर उपलब्ध कराने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया है।

वन धन महिला सशक्तिकरण केंद्र बना एक और सौगात-ग्राम तिलसीवा में प्रगति महिला संगठन की सदस्यों के उत्साह के साथ मशरूम उत्पादन करनें के क्रम में मौसम के साथ अन्य परेशानियों से उत्पादन क्षमता बढाने के लिए कलेक्टर श्री दीपक सोनी द्वारा गांव में ही आधुनिक तकनीक के साथ उत्पादन के लिए शुरू कराया गया केंद्र इन महिलाओं के लिए एक बड़ी सौगात खुद ही बता रही है।महिला संगठन की सदस्य श्रीमती इंद्रावती जायसवाल ने बताया कि घर पर कम स्थान होने के अलावा अन्य परेशानियों से कलेक्टर श्री सोनी को अवगत कराने पर त्वरित रूप से इस केंद्र की स्थापना सें एक साथ सभी सदस्य करीब 600 बैग मशरूम उत्पादन यहां सें करेंगी और  एक माह में शुरुआती  दौर में प्रति बैग एक किलोग्राम से लेकर डेढ किलोग्राम तक मशरूम उत्पादन होगा।जिसकी बिक्री से महिने में करीब एक लाख बीस हजार रुपए अतरिक्त आय अर्जित होगी।इससे सभी सदस्यों को लाभ मिलने के साथ साथ नवीन पद्धति से उत्पादन के साथ और मशरूम सें जुड़े उत्पाद बनाने सें बाजार में बड़ी मात्रा में खपत की मांग को पूर्ण कर सकते है।

Leave a Reply