सुप्रीम कोर्ट ने 11.8 लाख आदिवासियों को दी राहत, जंगल से वनवासियों की बेदखली पर रोक - गोंडवाना एक्सप्रेस
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सुप्रीम कोर्ट ने 11.8 लाख आदिवासियों को दी राहत, जंगल से वनवासियों की बेदखली पर रोक

जगदलपुर (एजेंसी) | सुप्रीम कोर्ट ने आदिवासियों और वनवासियों को भारी राहत देते हुए उन्हें फिलहाल बेदखल नहीं करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दिया है। उन्होंने मामले का उल्लेख करते हुए 11.8 लाख आदिवासियों को जंगलों से हटाने के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी। जस्टिस अरुण मिश्रा ने गुरूवार को मामले की सुनवाई करते हुुए सभी 16 राज्यों को फटकार लगाई।

उन्होंने कहा कि सभी राज्य हलफनामा दायर कर बताएं कि उन्होंने जंगल में रह रहे लोगों के दावों का इतनी जल्दी निपटारा किस आधार पर किया है? वह अब तक सोते क्यों रहे? सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी को 16 राज्यों के करीब 11.8 लाख आदिवासियों व वनवासियों के जमीन पर कब्जे के दावों को खारिज करते हुए राज्य सरकारों को आदेश दिया था कि वे अपने कानूनों के मुताबिक जमीनें खाली कराएं। कोर्ट ने यह भी आदेश जारी किया था कि सभी राज्यों के मुख्य सचिव 24 जुलाई से पहले हलफनामा दायर कर यह बताएं कि उन्होंने तय समय में जमीनें क्यों नहीं खाली कराई।

क्या है मामला

सुप्रीम कोर्ट में राज्यों द्वारा दायर हलफनामों के अनुसार, वन अधिकार अधिनियम के तहत अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वनवासियों द्वारा किए गए लगभग 11,72,931 (1.17 मिलियन) भूमि स्वामित्व के दावों को विभिन्न आधारों पर खारिज कर दिया गया है। इनमें वो लोग शामिल हैं जो ये सबूत नहीं दे पाए कि  कम से कम तीन पीढ़ियों से भूमि उनके कब्जे में थी।

ये कानून 31 दिसंबर 2005 से पहले कम से कम तीन पीढ़ियों तक वन भूमि पर रहने वालों को भूमि अधिकार देने का प्रावधान करता है। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार द्वारा भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत वनवासियों के साथ किए गए ऐतिहासिक अन्याय को रद्द करने के लिए कानून बनाया गया था, जो पीढियों से रह रहे लोगों को भूमि पर “अतिक्रमण” करार देता था।

शीर्ष अदालत ने विशेष रूप से 16 राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश जारी किए हैं कि उन  सभी मामलों में जहां भूमि स्वामित्व के दावे खारिज कर दिए गए हैं  उन्हें12 जुलाई, 2019 तक बेदखल किया जाए। ऐसे मामलों में जहां सत्यापन/ पुन: सत्यापन/ पुनर्विचार लंबित है, राज्य को चार महीने के भीतर प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए और एक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी चाहिए।

2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में अनुमानित 104 मिलियन आदिवासी हैं। लेकिन सिविल सोसाइटी समूहों का अनुमान है कि वन क्षेत्रों में 1,70,000 गांवों में रहने वाले अनुसूचित जनजातियों और अन्य वनवासियों मिलाकर लगभग 200 मिलियन लोग हैं, जो भारत के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 22% हिस्सा कवर करते हैं।

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