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श्रीराम वनगमन पर्यटन परिपथ राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना, वर्तमान में मौजूद धार्मिक स्थलों को यथावत रखते हुए किया जाएगा निर्माण कार्य

श्रीराम वनगमन पर्यटन परिपथ राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। इसके तहत वर्तमान में मौजूद धार्मिक स्थलों को यथावत रखते हुए निर्माण विकास कार्य किया जाएगा। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न शोधपत्रों, अभिलेखों एवं मान्यता अनुसार भगवान श्री राम ने अपने वनवास काल के 14 वर्षों में से अधिकांश समय छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों पर व्यतीत किए थे।

तीज पर मुख्यमंत्री ने प्रचार रथ को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ की संस्कृति और सुख-समृद्धि के प्रतीक का त्यौहार तीजा-पोरा तिहार के शुभ अवसर पर आज अपने रायपुर निवास परिसर में राम वन गमन पर्यटन परिपथ के प्रचार के लिए सभी पांच संभागों हेतु तैयार किए गए विशेष प्रचार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवारा किया। इस रथ में एलईडी स्क्रीन के माध्यम से छत्तीसगढ़ में भगवान राम के चौदह वर्षों के वनवास के दौरान छत्तीसगढ़ से होकर जाने वाले सभी स्थलों के बारे में जानकारी दी जाएगी।

राम वन गमन पर्यटन परिपथ के प्रचार के लिए तैयार किए गए विशेष रथ सभी पांचों संभागों जिलों, विकासखण्डों और गांवों में जाकर राम वन गमन पर्यटन परिपथ के बारे में एलईडी प्रदर्शनी के माध्यम से लोगों जानकारी दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनभागीदारी के लिए राम वन गमन पर्यटन परिपथ विकास कोष का गठन किया जाएगा। इस कोष में एकत्रित राशि देवालयों-देवगुडी के विकास में भी लगायी जाएगी।

उल्लेखनीय है कि पर्यटन विभाग द्वारा राम वन गमन पर्यटन परिपथ के विकास के लिए 137 करोड़ का कॉन्सेप्ट प्लान बनाया गया है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा, ऐतिहासिकता एवं प्रचीन मान्यताओं से पर्यटकों को परिचित कराने राम वनगमन परिपथ के विकास की योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इस परिपथ के तहत कुल 75 स्थान चिन्हित किए गए हैं।

प्रथम चरण में 9 स्थालों सीतामढ़ी-हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (सरगुजा), शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा-सप्तऋषि आश्रम (धमतरी), जगदलपुर (बस्तर), रामाराम (सुकमा) शामिल है। इस परियोजना की शुरूआत रायपुर के निकट स्थित चंदखुरी से हो गई है। चंदखुरी भगवान राम का ननिहाल है। यहां माता कौशल्या का प्राचीन मंदिर है, जो सातवीं शताब्दी का है। माता कौशल्या मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण तथा विकास के लिए 15 करोड़ 45 लाख रुपये की कार्य योजना पर कार्य किया जा रहा है।

राम वन गमन पर्यटन परिपथ के तहत लगभग 2260 किलोमीटर सड़कों का विकास किया जाएगा। लगभग 1400 किलोमीटर सड़कों के दोनों ओर वृक्षारोपण कार्य किया गया है। राम वन गमन पथ पर पहले चरण में जिन 9 स्थानों का चयन किया गया हैं, उन सभी में आकर्षक लैंडस्केप तैयार किया जाएगा। इन सभी स्थानों पर पर्यटकों के लिए नागरिक सुविधाओं का विकास सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। सभी स्थानों पर भव्य द्वार बनाए जाएंगे, जिनके शीर्ष पर भगवान राम का धनुष और उसकी प्रत्यंचा पर रखा हुआ तीर होगा। द्वार पर जय श्रीराम के घोष के साथ राम-पताका लहरा रही होगी।

राम वनगमन पर्यटन परिपथ के विकास का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों एवं आगन्तुकों को आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। प्रथम चरण में चयनित 9 स्थानों पर कोई भी नया मंदिर निर्माण नहीं किया जा रहा है। अपितु इन स्थानों पर वर्तमान में मौजूद धार्मिक स्थलों, मंदिरों एवं अन्य धार्मिक संरचनाओं को यथावत् रखते हुए परिसर एवं आस-पास के स्थान में पर्यटक सुविधाओं के विकास का कार्य किया जाएगा। इससे पर्यटकों को इन क्षेत्रों में आकर्षित किया जा सकेगा।

पर्यटक स्थानीय मान्यताओं, लोक-कला संस्कृति से परिचित हो सकेंगे इसके साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त हो सकेंगे। पर्यटन मंडल के अधिकारियों ने बताया कि रामाराम जिला सुकमा में पर्यटकों की सुविधा के लिए कैफेटरिया, गार्डन, पेयजल, दुकानें, यात्राी शेल्टर, ट्रेकिंग रूट, पार्किंग आदि अधोसंरचना का विकास प्रस्तावित है।

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