कौन है स्मिता तांडी जिन्हे नवरात्री पर सीएम ने ट्वीट कर कहा, “महतारी तोला प्रणाम”

नवरात्री के पवित्र नौ दिन चल रहे है। पुरे देश में नारी शक्ति रूपी दुर्गा माँ की आराधना की जा रही है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने #महतारी_तोला_प्रमाण का ट्वीट किया। नारी शक्ति के प्रतीक स्वरुप राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित स्मिता तांडी का फोटो शेयर करते हुए कहा, “यदि निस्वार्थ सेवा का भाव हो तो हर राह स्वयं ही सहज हो जाती है। इस बात का साक्षात उदाहरण है प्रदेश की रोल-मॉडल बन चुकी महिला कांस्टेबल स्मिता तांडी। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर मैं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित स्मिता तांडी की नेक भावना को प्रणाम करता हूँ। #महतारी_तोला_प्रणाम”

कौन है स्मिता तांडी?

स्मिता ने 2011 में छत्तीसगढ़ पुलिस ज्वाइन किया था। अभी वह महज़ 24 साल की हैं। पुलिस की नौकरी कर लोगों की मदद करने वाली आरक्षक व रक्षा टीम की स्मिता तांडी ने छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया है। इस कार्य के लिए उन्हें 8 मार्च को महिला दिवस पर नारी शक्ति पुरस्कार से नई दिल्ली में राष्ट्रपति ने सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें समाज कल्याण विभाग की ओर से राष्ट्रपति भवन में दिया गया।




स्मिता तांडी के पिता भी पुलिस में थे लेकिन बीमार पड़ने के बाद गरीबी के कारण सही समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उनकी मौत हो गई थी। अपने पिता की मौत से सबक लेते हुए स्मिता तांडी ने गरीब और अभाव ग्रस्त लोगों की मदद करने की ठानी और इस मिशन में जुट गई।

स्मिता किसी सेलेब्रिटी से काम नहीं है

वह जब कभी फील्ड पर जाती हैं तो लोग उन्हें घेर लेते हैं और उनके साथ सेलिब्रिटी की तरह फोटो खिचवाने लगते हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस की महिला सिपाही स्मिता तांडी इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। वह छत्तीसगढ़ की सेलिब्रिटी बन चुकी हैं। फेसबुक अकाउंट SmitaTandiCG पर उनके 835,515 लाख फॉलोअर्स हैं और संख्या लगातार बढ़ रही है।

खबरों के अनुसार पूरे छत्तीसगढ़ में सिर्फ सीएम डॉ रमन सिंह ही वे शख्स हैं जिनकी फॉलोइंग इस कॉन्स्टेबल से ज्यादा है। स्मिता तांडी को पिछले साल 8 मार्च 2017 को महिला दिवस के अवसर पर उनके समाज के लिए किए गए उत्कृष्ट कार्यो के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाज़ा गया।

23 महीने में बन गई सेलिब्रिटी

कॉन्स्टेबल स्मिता तांडी प्रदेश के उन चुनिंदा लोगों में से है जो इस सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर इतने लोकप्रिय हैं। ये पब्लिसिटी स्मिता ने फेसबुक पर अकाउंट बनाने के महज 23 महीने के अंदर हासिल की है। स्मिता ने 2011 में छत्तीसगढ़ पुलिस ज्वाइन किया था। अभी वह 24 साल की हैं।

मदद की अपील से पाया मुकाम

इस तरह की पब्लिसिटी के लिए पैसे खर्च करने पड़ते हैं, लेकिन स्मिता का कहना है कि उनके फॉलोअर्स पेड नहीं हैं। उनका मानना है कि उनकी पोस्ट के कंटेंट की वजह से लोग उनसे जुड़ते हैं। स्मिता अपनी पोस्ट्स के जरिए जरूरतमंद लोगों की कहानी सामने लाती हैं और लोगों से मदद की अपील करती हैं।

मदद के लिए ही बनाया था अकाउंट

स्मिता बताती हैं एक दुखद घटना के बाद दूसरों की मदद के मकसद से उन्होंने पिछले साल मार्च में फेसबुक अकाउंट बनाया था। 2013 में जब स्मिता पुलिस ट्रेनिंग ले रही थीं, तब घर पर उनके पिता की तबीयत खराब हो गई। स्मिता के पास इलाज के लिए पैसे नहीं थे, इसके चलते उनके पिता की मौत हो गई। पिता की मौत से स्मिता ने महसूस किया कि देश में हजारों लोग पैसों के अभाव में जान गंवा देते हैं।

2014 में बनाया ग्रुप

स्मिता ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर 2014 में गरीबों की मदद के लिए एक ग्रुप बनाया। इस ग्रुप के जरिए उन्होंने पैसा जमा करना शुरू किया। स्मिता और उनके दोस्त उन लोगों की मदद करते थे जिन्हें जानकारी के अभाव में सरकारी मदद नहीं मिल पाती। इसके बाद उन्होंने फेसबुक का सहारा लिया। शुरुआत में लोग उनकी पोस्ट पर उतना ध्यान नहीं देते थे। उन्होंने धैर्य रखा। करीब एक महीने बाद रिस्पॉन्स मिलना शुरू हो गया। स्मिता का कहना है कि शायद शुरू में लोग उसे फर्जी मानते थे।

सीनियर्स मानते हैं लोहा

स्मिता की फेसबुक प्रोफाइल पर अनेक कहानियां पढ़ी जा सकती हैं जिन्हें मदद पहुंची या पहुंचाने की कोशिश हुई। उनकी पब्लिसिटी को देखते हुए अफसरों ने उन्हें उन्हें भिलाई में महिला हेल्पलाइन के सोशल मीडिया सेल में रखा है।



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