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8 हजार करोड़ की लागत से बनी नई राजधानी सूनी, अधिकारी-कर्मचारी सरकारी खर्च पर जाते हैं रायपुर से इसलिए मुख्य सचिव नवा रायपुर शिफ्ट

रायपुर | मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गैरजरूरी सरकारी खर्च में कटौती और मितव्ययिता बरतने के निर्देश दिए हैं, लेकिन सरकार के आला अफसरों ने ही इस पर अमल नहीं किया है। मौजूदा शहर में रहकर सरकारी अफसर-कर्मचारी नवा रायपुर आने-जाने में ही हर साल करीब साढ़े 8 करोड़ रुपए फूंक रहे हैं, लेकिन अब इसे बचाने की पहल मुख्य सचिव आरपी मंडल ने की है। वे प्रदेश के पहले अफसर हैं, जो मकर संक्रांति पर बुधवार को नवा रायपुर के अपने बंगले में शिफ्ट हो गए।

मंडल न सिर्फ वहां रहने गए हैं, बल्कि जाते ही उन्होंने घोषणा कर दी है कि अब वे अपनी सरकारी कार के लिए 240 के बजाय केवल 80 लीटर ईंधन ही लेंगे। माना जा रहा है कि सीएस मंडल की इस पहल के बाद अफसरों के वहां रहने के लिए जाने का सिलसिला शुरू हो सकता है। अभी सरकार के तमाम अफसरों के सिविल लाइंस, शंकरनगर व देवेंद्रनगर तथा आसपास की कालोनियों में बंगले हैं।  वे रोजाना यहां से लगभग 30 किमी दूर मंत्रालय आना-जाना कर रहे हैं।

6 साल पहले बढ़ाया था ईंधन कोटा

नवा रायपुर में मंत्रालय पिछली सरकार के कार्यकाल में शिफ्ट हुआ था। उस समय अफसरों के लिए मकानों का निर्माण शुरू हो चुका था और सरकार की मंशा थी कि अफसर वहां जाएं। लेकिन कोई भी नवा रायपुर जाने के लिए तैयार नहीं हुआ, बल्कि तत्कालीन सरकार ने गाड़ियों के लिए 80 लिटर का कोटा बढ़ाकर 240 लिटर प्रति माह कर दिया, ताकि अफसर रायपुर से ही आना-जाना कर लें। इसमें सरकार की बड़ी रकम खर्च हो रही है। टिफिन मंगवाने की प्रवृत्ति ने यह खर्च और बढ़ा दिया है। जानकारों का अनुमान है कि ईंधन का कोटा 80 लिटर होने से सरकार के सालाना 5 करोड़ रुपए तक बच सकते हैं।

सीएम भूपेश की मंशा, 8.5 हजार करोड़ के नए शहर का हो उपयोग

कांग्रेस सरकार बनने के बाद सीएम भूपेश बघेल ने सबसे पहले कहा था कि नवा रायपुर को बनाने में साढ़े 8 हजार करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं, इसलिए इसका उपयोग होना चाहिए। इसके बाद सरकार ने नवा रायपुर में राजभवन और सीएम हाउस बनाने की प्रक्रिया शुरू की और 535 करोड़ रुपए से काम शुरू भी कर दिया। इस दौरान एकाध अफसर रहने के लिए नवा रायपुर गए, लेकिन बाकी ने यहीं रहना उचित समझा।

सीएस मंडल के नवा रायपुर में शिफ्ट होने से कुछ अफसरों के इस तर्क को भी झटका लगा कि वहां जब तक सुविधाएं नहीं होंगी, तब तक जाना नहीं चाहिए। जबकि सरकार की सोच है कि मंत्री-अफसर शिफ्ट होंगे तो सुविधाएं अपने आप स्थापित होने लगेंगी। यह भी माना जा रहा है कि सीएस मंडल के नवा रायपुर शिफ्ट होने से राजभवन और सीएम हाउस के निर्माण में तेजी आएगी, क्योंकि नजदीक रहने की वजह से मंडल इस काम पर सीधे निगरानी रखेंगे और उनके बार-बार निरीक्षण के कारण निर्माण एजेंसी को काम तेजी से करना ही पड़ेगा।

120 बंगले खाली और अफसर रायपुर में

आला अफसर नवा रायपुर में बसें, इसलिए एनअारडीए प्रशासन ने सेक्टर-17 में आईएएस, आईपीएस और आईपीएस में भी सेक्रेटरी रैंक के अफसरों के लिए डी-टाइप बंगले बनवाए हैं। इनमें से 120 बंगले वीरान पड़े हैं, क्योंकि अफसर रायपुर में ही रह रहे हैं। सीएस मंडल इसी सेक्टर में शिफ्ट हुए हैं। यह सेक्टर मंत्रालय से महज 2-3 किमी ही दूर है। इसीलिए वहां जाते ही सीएस ने अपनी कार के लिए महीने में 80 लीटर ईंधन लेने का फैसला कर लिया है।

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