सुप्रीम कोर्ट ने कमल विहार प्रोजेक्ट पर लगाई रोक, केंद्र से नहीं ली थी पर्यावरण अनुमति - गोंडवाना एक्सप्रेस
gondwana express logo

सुप्रीम कोर्ट ने कमल विहार प्रोजेक्ट पर लगाई रोक, केंद्र से नहीं ली थी पर्यावरण अनुमति

रायपुर (एजेंसी) | पूर्व भाजपा सरकार की महत्वाकांक्षी कमल विहार आवासीय प्रोजेक्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस प्रोजेक्ट को देश की सर्वोच्च अदालत ने यह कहते हुए रोक लगा दिया क्योकि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से इंवायरमेंटल क्लियरेंस नहीं ली गई थी। इसे लेकर 2009 में चार लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी।

शुक्रवार को सुप्रीमकोर्ट ने सुनवाई के बाद रोक लगा दी

इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस रोहिंगटन फली नरी मन और जस्टिस विनीत सरन की बेंच ने शुक्रवार को राजेंद्र शंकर शुक्ला वर्सेज यूनियन ऑफ इंडिया मामले की सुनवाई करते हुए योजना पर रोक लगाने का फैसला दिया। बता दें कि इससे पहले भी 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की जमीन को योजना से बाहर रखने का आदेश दिया था। याचिकाकर्ता शुक्ला का कहना है कि आज तक उन्हें न तो जमीन मिली, न ही शासन की तरफ से कोई लैंड डिमार्केशन हुआ है। इसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका भी दायर की है।

1400 लोगों ने खरीदे हैं प्लॉट

रायपुर विकास प्राधिकरण 1600 एकड़ भूमि में कमल विहार के नाम से अत्याधुनिक आवासीय प्रोजेक्ट तैयार कर रहा है। योजना में कुल 8500 प्लॉट बने। इसमें से भू-स्वामियों को 7200 प्लॉट वापस दिए गए। 1300 बड़े प्लॉट को 2000 छोटे साइज के प्लॉट में कन्वर्ट किया गया। इसमें से 1400 पलॉट बिक चुके हैं।

प्रोजेक्ट के लिए सैकड़ों किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई, पर कई भू-स्वामी अधिग्रहण के लिए तैयार नहीं थे। कुल 30 एकड़ भूमि को योजना से अलग रखने और योजना रद्द करने के लिए 4 लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। 2015 में कोर्ट ने आदेश दिया कि पक्षकारों की जमीन कमल विहार योजना से अलग रखी जाए।

पूर्व सरकार ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से क्लियरेंस नहीं लिया गया था

पक्षकारों का तर्क था कि उनकी जमीन कीमती है, लेकिन प्राधिकरण अपनी शर्तों पर अधिग्रहण कर रहा है, जो न्याय संगत नहीं। कोर्ट के फैसले के बाद भी जमीन वापस न मिलने पर शुक्ला ने पर्यावरण क्लियरेंस का मुद्दा उठाते हुए एनजीटी में अपील की। तर्क था- आरडीए ने राज्य सरकार से एंवायरमेंटल क्लियरेंस लिया है, जबकि बड़े प्रोजेक्ट के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से क्लियरेंस जरूरी है।

हालांकि, एनजीटी ने फिलहाल साइट पर निर्माण न होने की बात कहकर अपील खारिज कर दी। इसके खिलाफ पक्षकार सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और केंद्र से पर्यावरण क्लियरेंस न लेने के साथ चल रहे निर्माण कार्य और आवंटन प्रक्रिया की जानकारी देते हुए योजना पर स्टे की मांग की।

Leave a Reply