आईपीएस जीतेंद्र शुक्ला ने अपने तबादले को अवांछित और अप्रत्याशित बताते हुए सोशल मीडिया में कहा, गुड बाय सुकमा कहने का समय आ गया है।" - गोंडवाना एक्सप्रेस
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आईपीएस जीतेंद्र शुक्ला ने अपने तबादले को अवांछित और अप्रत्याशित बताते हुए सोशल मीडिया में कहा, गुड बाय सुकमा कहने का समय आ गया है।”

रायपुर (एजेंसी) | आईपीएस अफसर जितेंद्र शुक्ला ने खुद को एसपी सुकमा के पद से हटाए जाने को लेकर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली है। शुक्ला ने पोस्ट में अपने ट्रांसफर की ओर इशारा करते हुए भूपेश सरकार के फैसले को अप्रत्याशित और अवांछित बताते हुए लिखा है कि अलविदा सुकमा।

रविवार को किए गए इस पोस्ट में शुक्ला ने बस्तर पोस्टिंग और वहां मिली चुनौतियों का जिक्र किया है। सूत्रों के अमुसार प्रभारी मंत्री कवासी लखमा के कहने पर तत्कालीन सुकमा एसपी जितेंद्र शुक्ला ने एक टीआई का ट्रांसफर नहीं किया था। इसकी परिणति में शुक्ला का ट्रांसफर हो गया। प्रदेश में नई सरकार आने के बाद हुए तबादलों में यह पहला मौका है जिसमें किसी आईपीएस अफसर ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार के फैसले का विरोध किया है।

शुक्ला ने ये लिखा अपनी पोस्ट में

अवांछित और अप्रत्याशित… लेकिन अब ये कहने का समय आ गया है… अलविदा बस्तर और गुड बाय सुकमा…किसी भी पुलिस अधिकारी खास कर छत्तीसगढ़ कैडर के लिए नक्सलवाद और बस्तर महत्वपूर्ण जगह रखता है। यहां रहकर काम करना अपने आप मे गौरवांवित महसूस करने जैसा होता है। जबसे कैडर अलॉट हुआ उस दिन से बस्तर और खास कर सुकमा में काम करने को लेकर दिल और दिमाग में हमेशा एक अलग रोमांच रहा और 28 मई 2016 से जब ये मौका मिला।

उस दिन से लेकर 8 मार्च 2019 तक, जितने दिन यहां रहे पूरे दिल के साथ काम किया। अपने हर उस रोमांच, साहस, डर, भय, सबको न सिर्फ जिया बल्कि बस्तर से जुड़े हर उस प्रचलित और सुने सुनाए मिथ को तोड़ा जिसे लेकर बस्तर बदनाम है। जब तक रहे पूरे दमदारी दिलेरी जुनून पागलपन के साथ रहे…नक्सलवाद, नक्सली और उनके समर्थकों की नाक में दम करके रहे। नक्सलवाद के भय और डर को चुनौती दे के रहे। ये बात समझ में आई कि नक्सलवाद जैसा कायर और डरपोक कोई संगठन नहीं है… जो अपने आप को जिंदा रखने के लिए बस्तर को वहां के भोले भाले और डरे हुए आदिवासियों के रक्त से सींच रहा है।

यहां काम करना और उसका अनुभव जितना ही संतोषप्रद रहा उतना ही यहां के लोगों का प्यार भरोसा और विस्वास अविस्मरणीय रहेगा। अपनी पूरी कोशिश रही 100% देने की, इस क्षेत्र के विकास के लिए और यहां के लोगों का भरोसा और विस्वास जीतने के लिए। उम्मीद करता हूं उसमें खरा उतर पाया होऊंगा। मेरे काम में जिन्होंने सहयोग दिया, जिन्होंने मुझे यहां इतना कुछ सिखाया, जिन्होंने मुझे यह कभी घर के बाहर होने जैसा फील नहीं होने दिया, जिन्होंने यहां मेरा मेरे घर वालों से ज्यादा ख्याल रखा उन सभी का दिल से शुक्रगुजार हूं और वो सभी मेरे लिए मेरे दिल मे विशेष स्थान रखते हैं।

आप सभी का प्यार भरोसा और विश्वास ही मेरी उपलब्धि और कमाई है और मैं निरंतर कोशिश करता रहूंगा आपके भरोसे पर खरा उतरने के लिए। आप सबका प्यार और भरोसा साथ रहेगा तो मैं पूरे विश्वास के साथ बोलता हूं कि कही भी पोस्टिंग रहेगी तो मैं अपनी जगह लोगों के दिलों में बना लूंगा और अपना काफिला इसी तरह बढ़ता जाएगा। बस्तर पुलिस का पार्ट होना मेरे लिए गर्व की अनुभूति है और हमेशा रहेगी।

वजह:  मंत्री कवासी लखमा ने पत्र लिखा- टीआई को हटा दो, एसपी शुक्ला ने पत्र लिख जवाब दिया- नहीं हटाऊंगा

नाराज सीएम भूपेश बघेल बोले- मंत्री को पत्र लिखने का एसपी को अिधकार नहीं, इसलिए ट्रांसफर किया प्रभारी मंत्री कवासी लखमा ने एक कार्यकर्ता के हाथ एसपी सुकमा जितेंद्र शुक्ला को एक टीआई के तबादले के लिए पत्र भेजा। जवाब में एसपी ने उन्हें लिखा- टीआई का ट्रांसफर मेरा विशेषाधिकार है, टीआई का ट्रांसफर नहीं करना चाहता। मंत्री ने इसकी शिकायत सीएम और गृहमंत्री से कर दी। इसके बाद पिछले हफ्ते ही जितेंद्र शुक्ला को सुकमा एसपी से हटाकर पीएचक्यू पोस्ट किया गया।

उनकी जगह कांकेर जंगल वारफेयर कालेज से डीएस मरावी को सुकमा भेजा गया। प्रदेश सरकार उनके आचरण को सेवा शर्तों का उल्लंघन माना और प्रशासन में संदेश देने के लिए उनको हटा दिया गया। इसलिए सोशल मीडिया पर शुक्ला का पोस्ट आने के बाद सीएम ने कहा कि मंत्री को पत्र लिखने का एसपी को अिधकार नहीं है, इसलिए शुक्ला का ट्रांसफर किया गया।

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