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Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के पालकों ने दिया होम स्कूलिंग का सुझाव, बस, लायब्रेरी, फूड जैसे शुल्क में छूट देने की भी मांग

रायपुर | स्कूलों का कोरोना संक्रमण के इस दौर में खुलना और फीस हर पालक के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में स्कूल शिक्षा विभाग को सुझाव दिया गया है कि वह होम स्कूलिंग की अनुमति दे। इसके अलावा लॉकडाउन अवधि में गैर जरूरी फीस ना वसूली जाए यह मांग भी पालक कर रहे हैं। पालकों की तरफ से कहा गया है कि नर्सरी, प्राइमरी व मिडिल स्कूल के बच्चों को घरों में ही पढ़ाया जाए। इसके बाद उन्हें केवल परीक्षा देने ही बुलाया जाए।

1970 में आया था कॉन्सेप्ट

स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम को छत्तीसगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन ने इस बारे में खत लिखकर सुझाव दिया है। यदि स्कूल खोलने की परिस्थिति बनती है तो होम स्कूलिंग से बचा कोर्स स्कूलों में पूरा कराया जाए।  यूएसए, आस्टे्लिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, जर्मनी, यूके समेत कई देश 1970 में होम स्कूलिंग के कॉन्सेप्ट पर काम कर रहे हैं। तब विश्व में एजुकेशन रि-फार्म को लेकर अभियान चल रहा था। आज इन देशों में होम स्कूलिंग का प्रतिशत भी बढ़ रहा है। राज्य सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

जब स्कूल बंद थे तो बस की फीस क्यों

वायएमएस यूथ फाउंडेशन के महेंद्र सिंह होरा ने बताया कि पिछले कई दिनों से पालकों को प्राइवेट स्कूल फीस देने कह रहे हैं। फीस देने में कोई समस्या नहीं  है, लेकिन बस, स्पोर्ट्स, फूड और अन्य ऐसी चीजें जो लॉकडाउन अवधि में बंद रहीं उनकी पूरी फीस मांगी जा रही है। हम जानते हैं कि स्कूल को भी व्यवस्था चलानी है, वेतन आदि देना है, तो ऐसे में कुछ छूट देनी चाहिए क्योंकि पालकों की भी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं। छूट देने से स्कूल की जरुरतें पूरी होंगी और पालकों पर भार कम पड़ेगा।

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