स्थानीय व्यापारियों का धान खरीदने से इंकार, खरीदार नहीं मिले तो देवभोग और धमतरी में 100 से ज्यादा किसानों ने धान व मक्का फेंका - गोंडवाना एक्सप्रेस
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स्थानीय व्यापारियों का धान खरीदने से इंकार, खरीदार नहीं मिले तो देवभोग और धमतरी में 100 से ज्यादा किसानों ने धान व मक्का फेंका

रायपुर (एजेंसी)| प्रशासन द्वारा चिल्हर धान खरीदी में नियम पालन का फरमान जारी करने के बाद इलाके के लाइसेंसी गल्ला व्यापारियों ने 15 फरवरी तक धान नहीं खरीदने की तख्ती बुधवार से टांग दी थी, इसका असर झाखरपारा के साप्ताहिक बाजार में देखने को मिला। चिल्लर व्यापारी प्रशासन की कार्रवाई से डरकर खरीदी नहीं कर रहे हैं। सप्ताहिक बाजार में खरीददार नहीं मिलने पर देवभोग और धमतरी के गुस्साए किसानों ने धान और मक्का सड़क पर फेंक दिया।

जानकारी के मुताबिक दोवभोग में कपड़ा खरीदी, छोटी जरूरत के अलावा बीमार बेटी के इलाज के लिए चिल्हर में धान बेचने शनिवार को झाखरपारा साप्ताहिक बाजार आए किसानों से व्यापारियों ने धान लेने से मना किया तो सड़क पर धान उड़ेलकर 2 घंटे तक चक्काजाम किया। 100 से अधिक किसानों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

आनन फानन में एसडीएम ने बैठक कर चिल्हर खरीदी के लिए व्यापारियों से आग्रह किया पर नियम कायदों में फंस रहे पेंच को लेकर समर्थन मूल्य खरीदी तक धान खरीदी करने से इंकार कर दिया। 40 से 50 छोटे किसान शनिवार को सुबह 8 बजे से सभी दुकानों तक अपनी उपज लादकर बेचने का प्रयास किया। दो घंटे की मशक्कत के बाद भी चिल्हर खरीदी किसी ने नहीं कि तो किसान उपज लेकर सड़क पर बैठ गए। देखते ही देखते एक घंटे में 100 से ज्यादा किसान बाजार में एकत्र होकर पहले तो रास्ता जाम किया। स्थानीय जनप्रतिनिधि व पुलिस समझाने पहुंचे तो और उग्र हो गए।

ज्यादातर किसान छोटे-छोटे खर्चों को पूरा करने के लिए आए थे धान बेचने

पिता बोले- कैसे कराऊंगा बेटी का इलाज

एक क्विंटल धान साइकिल में लादकर ख़्वासपारा से झाखरपारा पहुंचे रूपसिंह सोनवानी ने बताया कि 3 साल की बेटी मीना सप्ताहभर से बीमार है। स्थानीय स्तर पर इलाज कराया फिर भी तबियत ठीक नहीं हो रही है। उसे ओडिशा ले जाना है। घर में फूटी कौड़ी नहीं है, ऐसे में धान बेचकर ढाई से तीन हजार रुपए लेने की मंशा से आया था।

अब नमक के साथ खाना पड़ेगा चावल

बाजार में धान बेचने पहुंचे साहसखोल निवासी राजेंद्र यादव ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि जमा पूंजी किसानी काम में फंस गया है। किराना समान के लिए पैसे नहीं है इसलिए वह 40-50 किलो धान बेचने आया था।

नहीं खरीद पाऊंगा बच्चों के गर्म कपड़े

झाखरपारा के दशरथ अपने 3 बच्चे व पत्नी के साथ 60 से 70 किलो धान लेकर बेचने आया था। उन्होंने बताया ठंड बढ़ रहा है तो बच्चे के लिए स्वेटर, पत्नी के लिए साड़ी व खुद के लिए धोती लेनी थी। लेकिन अब नहीं खरीद पाएंगे।

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