Chhattisgarh

दिवालियेपन से बचने के लिए अब आरडीए कर रहा है अपनी प्रापर्टी बेचने की तैयारी

रायपुर (एजेंसी) | कमल विहार बसाने के लिए तकरीबन एक हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेकर दिवालिएपन की कगार पर पहुंचे रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने अब शहर में अपनी दूसरी बड़ी प्रापर्टी बेचने की तैयारी कर ली है। आरडीए पर अभी 570 करोड़ रुपए का कर्ज बचा है। कमल विहार में जितनी संपत्ति है, अगर पूरी भी बेची जाए तो आरडीए को उससे 180 करोड़ रुपए ही मिलेंगे, अर्थात कर्ज के 290 करोड़ रुपए तब भी बचे रहेंगे।

लेकिन सभी प्लाट एकाएक बिकना संभव नहीं है। इसलिए आरडीए ने शहर के अपने सभी प्रोजेक्ट में ऐसी जमीन और प्रापर्टी की लिस्टिंग शुरू कर दी है, जो बेची जा सकती हैं। इनमें से कुछ प्रापर्टी तो आवासीय या कामर्शियल यूज की हैं, लेकिन कुछ गार्डन तथा दूसरे उपयोग की भी हैं। इनका लैंडयूज बदलने के उपाय तलाशे जा रहे हैं।

इन्हें बेचकर आरडीए को 300 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है, ताकि कर्जे से बाहर निकला जा सके। रायपुर विकास प्राधिकरण की माली हालात खराब है। आरडीए कमल विहार के लिए लिए गए लोन की किश्त नहीं जमा कर पा रहा है। आमदनी इतनी ज्यादा नहीं है कि किश्त भी चुकाई जा सके। कमल विहार से आरडीए को आमदनी भी नहीं के बराबर है। जबकि कमल विहार के लिए सेंट्रल बैंक से अलग-अलग तारीखों में आरडीए करीब एक हजार करोड़ लोन ले चुका है।

इस कालोनी के प्लाट्स की बिक्री 2015 में शुरू हुई थी। तभी इसके प्लाट में लोगों ने रुचि दिखाई, लेकिन उत्साह तेजी से ठंडा भी हुआ। कुछ अरसे बाद योजना विवाद में आई और मामला मामला सुप्रीम कोर्ट गया। इस वजह से इन्वेस्टर्स की दिलचस्पी खत्म हो गई। इस वजह से कमल विहार से कमाई तो दूर, आरडीए के पास लिए हुए कर्ज का ब्याज पटाने की दिक्कत आ गई। सूत्रों के अनुसार अब भी आरडीए पर 570 करोड़ रुपए का कर्ज बाकी है। आरडीए ने कमल विहार के जितने प्लाट्स बेचे हैं, उनकी किश्त के रूप में करीब 180 करोड़ रुपए ही मिलेंगे, जिससे कर्ज चुकाना संभव नहीं है। इसलिए अब एेसी कोशिश चल रही है कि दूसरे प्रोजेक्ट्स की प्रापर्टी बेचकर कमल विहार के कर्ज चुकाया जाए।

आरडीए को इसकी मंजूरी शासन से लेनी होगी। अफसरों का कहना है कि कमल विहार में अभी प्रापर्टी की कीमत ज्यादा नहीं है। इस वजह से यहां प्लाट्स बिकने के बाद भी कर्ज चुकाने लायक पैसे नहीं मिल पाएंगे। इसकी अपेक्षा देवेंद्र नगर समेत आरडीए के राजधानी में स्थापित हो चुके बाकी प्रोजेक्ट में बची हुई आवासीय और कामर्शियल प्रापर्टी बेचने से आरडीए को कम से कम 300 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है।

तंगहाली के कारण कोई नई योजना नहीं

कमल विहार के कारण खराब हुई माली हालत के कारण रायपुर विकास प्राधिकरण कोई नई योजना पर काम ही नहीं कर रहा है। फिलहाल जितने भी प्रोजेक्ट्स हैं वह काफी पुराने हैं। नए प्रोजेक्ट्स में सिर्फ कमल विहार ही है। इंदप्रस्थ भी अब तक पूरा डेवलप नहीं हो पाया है। बोरियाखुर्द योजना भी अब तक धरातल पर नहीं आ पाई है।

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