पहल: देश में पहली बार किन्नरों का हो रहा सामूहिक विवाह, आज लेंगे सात फेरे, समारोह में मुख्यमंत्री बघेल भी होंगे शामिल - गोंडवाना एक्सप्रेस
gondwana express logo

पहल: देश में पहली बार किन्नरों का हो रहा सामूहिक विवाह, आज लेंगे सात फेरे, समारोह में मुख्यमंत्री बघेल भी होंगे शामिल

रायपुर (एजेंसी) | राजधानी रायपुर में आज एक अनोखे कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है। देश में पहली बार किन्नरों की सामूहिक शादी का आयोजन रायपुर में हो रहा है। इसमें दूल्हे वे हैं जिन्हें ट्रांसजेंडर से प्यार हो गया या वे उन्हें पसंद कर बैठे। इस शादी समारोह में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मुख्य अतिथि होंगे। इस शादी के जरिए गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की भी तैयारी हो रही है।

ऐसा ही एक जोड़ा बिलासपुर से आया है जो पिछले कई सालों से लिव-इन में रह रहा था। अब ये जोड़ा भी दाम्पत्य के बंधन में बंधने जा रहा है। शुक्रवार को आयोजित हल्दी और मेहंदी की रस्म में जोड़ों को हल्दी-मेहंदी लगाई गई। इस मौके पर किन्नरों जमकर डांस किया। इसमें छत्तीसगढ़ से 7 जोड़ों के अलावा महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात, बिहार और मध्य प्रदेश से आए जोड़ों की शादी हो रही है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शादी में होंगे शामिल

शनिवार को होने वाली इस शादी में मुख्य अतिथि प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और विशिष्ट अतिथि गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव, कृषि मंत्री रविंद्र चौबे, नगरीय प्रशासन मंत्री शिव डहरिया, महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेड़िया, रायपुर दक्षिण से भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल, बिलासपुर से विधायक शैलेष पांडेय, रायपुर के महापौर प्रमोद दूबे और पूर्व विधायक अमित जोगी कार्यक्रम में शामिल होंगे। ये शादी चित्रग्राही फिल्म हंसा एक संयोग की ओर से आयोजित हो रही है।

6 राज्यों की किन्नर दुल्हन दूल्हों के साथ बंधेंगे बंधन में

धारा 377 खत्म होने के बाद देश में पहली बार किन्नरों का सामूहिक विवाह हो रहा है। खास बात ये है कि ये किन्नर दुल्हन पुरूष दूल्हों के साथ विवाह करने जा रही हैं। इस शादी के जरिए गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की भी तैयारी हो रही है। इसमें छत्तीसगढ़ से 7 जोड़ों के अलावा महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात, बिहार और मध्य प्रदेश से आए जोड़ों की शादी हो रही है।

प्रयाग कुंभ में पहली बार किन्नर अखाड़े की भी हुई थी एंट्री

प्रयाग कुंभ में हर बार केवल 13 अखाड़े ही शामिल होते थे क्योंकि 13 अखाड़ों को ही मान्यता मिली थी। पहली बार 14 अखाड़े कुंभ में शामिल हुए। 14वें अखाड़े के रूप में किन्नर अखाड़े को मान्यता मिली जिसके महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी हैं।

Leave a Reply