Chhattisgarh

छत्तीसगढ़: धान खरीदने के लिए एक हजार करोड़ का फिर कर्ज ले रही सरकार, आज मिल जाएगी राशि

रायपुर (एजेंसी) | प्रदेश में सरकार की वित्तीय स्थिति खराब नहीं तो अच्छी भी नहीं है। यही वजह है कि सरकार ने आरबीआई के आगे फिर से झोली फैलाई है। अब एक हजार करोड़ रुपए कर्ज की जरूरत है। इसके लिए सरकार अपने सरकारी बांड को बेचने जा रही है। सरकार सात साल में यह कर्ज चुकाएगी। आरबीआई से यह राशि कल हासिल हो जाएगी।

खबरों के मुताबिक सरकार यह कर्ज धान खरीदी के लिए ले रही है। अफसरों का कहना है कि निगम चुनावों से पहले राज्य कर्मियों को सातवें वेतनमान के एरियर्स की पहली किश्त देने के भी संकेत हैं। वित्त विभाग के अफसरों का दावा है कि राज्य की वित्तीय स्थिति अच्छी है। बड़े भुगतान लंबित नहीं हैं। केवल राज्य के खजाने को मजबूती देने के लिए सरकार यह कर्ज लेना चाह रही है। बीते 5 महीने में यह पहली किश्त होगी।

राज्य सरकार को आरबीआई ने 11 हजार करोड़ से अधिक की क्रेडिट लिमिट दी है। इसके अलावा भी सरकार 1650 करोड़ अतिरिक्त कर्ज ले सकती है।

वित्त अफसरों का दावा-राज्य की आर्थिक स्थिति अच्छी, खजाने को मजबूती देने ले रहे हैं कर्ज

दोनों सरकारों के कर्ज मिलाकर अब हम 51 हजार करोड़ के कर्जदार : सरकार 2014-15 से जनवरी 2018 तक रिजर्व बैंक से 18350 करोड़ का कर्ज ले चुकी है। 2014 में 4 किस्तों में 2200, 2015 में 6 किस्तों में 5000, 2016 में 3 किस्तों में 1850 करोड़, 2017 में 5 किस्तों में 7200 करोड़ लिए थे। 2018 में करीब 2200 करोड़ से अधिक का कर्ज लिया गया है। दिसबर-18 से मार्च-19 तक दोनों ही सरकारें कुल 11 हजार करोड़ का कर्ज ले चुकी हैं। इसे मिलाकर राज्य पर कुल 51 हजार करोड़ का कर्ज भार आ गया है। मौजूदा सरकार ने जुलाई में विधानसभा में 44 सौ करोड़ का पहला अनुपूरक बजट लिया है। इसे मिलाकर राज्य का बजट आकार बढ़कर 1 लाख 241 करोड़ का हो गया है। इसमें से राजस्व आय 16 हजार 346 करोड़ है तो कुल कर्ज बढ़कर 17.4 फीसदी और उसे चुकाने के लिए कुल बजट की 1.1 फीसदी राशि ब्याज पर खर्च हो रही है।

677 करोड़ राजस्व बढ़ा, लेकिन घाटा 18767 कराेड़ का

इस वित्तीय वर्ष के बजट में 677 करोड़ राजस्व आधिक्य और वित्तीय घाटा 18767 करोड़ का अनुमान है। जानकारों के अनुसार वित्तीय घाटे से पता चलता है कि किसी वित्त वर्ष के दौरान सरकार की कुल आमदनी (उधार को छोड़कर) और कुल खर्च का अंतर कितना है। वित्तीय घाटा बढ़ने से सरकार की उधारी बढ़ेगी। सरकार के बांड बेचने और बार-बार कर्ज लेने से विकास कार्यों पर असर पड़ सकता है। सरकार बांड बेचकर जो लोन ले रही है, उसे ब्याज सहित चुकाना पड़ेगा। इसके लिए सरकार को स्वयं पूंजी की व्यवस्था करनी पड़ेगी। इससे राज्य का विकास प्रभावित हो सकता है, क्योंकि इस कर्ज के मूलधन के साथ ब्याज भी देना पड़ेगा।

आज शाम कैबिनेट की बैठक

इधर, मुख्यमंत्री बघेल ने मंगलवार को राज्य कैबिनेट की बैठक बुलाई है। बैठक शाम को सीएम हाऊस में होगी। इसमें निकाय चुनावों को लेकर एक्ट में संशोधन पर अध्यादेश लाने पर चर्चा के संकेत हैं। साथ ही धान उत्पादन और खरीदी की व्यवस्था की तैयारियों पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा दंतेवाड़ा उपचुनाव को लेकर भी सीएम अपने मंत्रियों के साथ प्लान बनाएंगे। कवासी लखमा को पहले ही चुनाव प्रभारी बनाया जा चुका है।

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