Chhattisgarh

चैत्र नवरात्र 2020: 1400 साल में पहली बार महामाया माता मंदिर में नहीं जलेंगी मनोकामना जोत

रायपुर | नवरात्रि 25 मार्च से शुरू हो रही है। हर साल शहर में सबसे ज्यादा 11 हजार मनोकामना जोत पुरानी बस्ती स्थित महामाया मंदिर में जलाए जाते हैं। इसके लिए अब तक 6 हजार भक्त पंजीयन भी करवा चुके हैं, लेकिन सोमवार को मंदिर ट्रस्ट ने यह निर्णय लिया है कि जोत नहीं जलाए जाएंगे। मंदिर के 14 सौ साल के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है। जिन भक्तों ने पंजीयन करवा लिया है, उन्हें अब अगली नवरात्रि तक इंतजार करना होगा।

दरअसल, कोरोना के संक्रमण के खतरे को देखते हुए जोत नहीं जलाने का फैसला लिया गया है। भक्तों की एंट्री भी नहीं होगी। हालांकि माता की राज जोत इस बार भी जलेगी, ताकि सदियों से चली आ रही परंपरा खंडित न हो। रोज की पूजा-आरती में भी कोई बड़ा फेरबदल नहीं किया गया है।

मंदिर ट्रस्ट के सचिव ललित तिवारी ने बताया, 11 हजार जोत की देखरेख के लिए 400 कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है। इतने सारे लोग एक जगह पर रहेंगे तो कोरोना के संक्रमण का खतरा भी रहेगा। मंदिर ट्रस्ट की बैठक में अध्यक्ष आनंद शर्मा, कृष्णा रेड्डी, दुर्गा प्रसाद पाठक, बंशीलाल शर्मा, पुजारी पं. मनोज शुक्ला मौजूद रहे।

बंजारी मंदिर… अब तक जितने भक्त पंजीयन करा चुके उन्हें पैसे लौटाएंगे

रविशंकर शुक्ल युनिवर्सिटी परिसर स्थित मां बंजारी शक्तिपीठ में हर साल यहां 21 सौ मनोकामना जोत जलाए जाते हैं। इस बार भी बड़ी संख्या में भक्तों ने पंजीयन करवा लिया था, लेकिन सोमवार को शक्तिपीठ ने घोषणा कर दी है कि जिन्होंने पंजीयन करवाया है वे मंदिर आकर पैसे वापस ले जाएं क्योंकि इस बार यहां जोत नहीं जलाए जाएंगे।

व्यवस्थापक भगवान तिवारी ने बताया कि पंजीयन बंद कर दिए गए हैं। मंदिर में सिर्फ 21 जोत जलाए जाएंगे जो गर्भगृह के अंदर जलते हैं। जिन भक्तों ने पंजीयन करवा लिया है वे रसीद दिखाकर अपनी राशि वापस ले जा सकते हैं। कोरोना को लेकर सरकार द्वारा जो एडवाइजरी जारी की गई है उसके तहत ही यह निर्णय लिया गया है। भक्तों को हुई असुविधा के लिए हमें खेद है।

काली मंदिर… जोत जलेंगी पर संख्या पिछले साल से आधी

आकाशवाणी चौक स्थित काली मंदिर में हर साल साढ़े 4 हजार के करीब जोत जलाए जाते हैं। लोग यहां महीने-2 महीने पहले ही पंजीयन करवाने लगते हैं। भक्तों की आस्था को देखते हुए मंदिर समिति ने जिन 21 सौ लोगों ने पंंजीयन करवा लिया है, उनके नाम से ही जोत जलेंगे। और पंजीयन नहीं लिए जाएंगे। यानी जोत की संख्या पिछले साल से आधी ही रहेगी।

कर्मचारी जहां डेढ़ सौ लगते थे, उन्हें भी कम करके 30-40 तक सीमित रखा जाएगा। मंदिर समिति के सचिव डीके दुबे ने बताया, जितने भक्त पंजीयन के लिए आ रहे हैं उनके हाथ धुलवाए जा रहे हैं। नवरात्र के दौरान जोत की देखरेख करने वाले कर्मचारी एक-दूसरे से दूर रहें, इसके लिए भी व्यवस्था की जा रही है। नवरात्र में देवी से जुड़ा कोई अनुष्ठान प्रभावित नहीं होगा। केवल भक्तों को प्रवेश नहीं मिल सकेगा।

इन मंदिरों में भी नहीं जलेंगे जोत

इधर, टिकरापारा स्थित हरदेवलाल मंदिर में भी इस बार मनोकामना जोत नहीं जलाने का निर्णय लिया गया है। मंदिर समिति ने तय किया है कि जितने भक्तों ने जोत की राशि जमा करवा दी है, उन्हें पैसे वापस कर दिए जाएंगे। नंदी चौक स्थित काली मंदिर में भी इस बार जोत नहीं जलाने का निर्णय लिया गया है।

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