पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दामाद व डीकेएस के पूर्व अधीक्षक डॉ. पुनीत गुप्ता की मुश्किलें बढ़ी; 50 करोड़ के फर्जीवाड़े का आरोप, केस दर्ज - गोंडवाना एक्सप्रेस
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पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दामाद व डीकेएस के पूर्व अधीक्षक डॉ. पुनीत गुप्ता की मुश्किलें बढ़ी; 50 करोड़ के फर्जीवाड़े का आरोप, केस दर्ज

रायपुर (एजेंसी) | पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमना सिंह के दामाद व डीकेएस सुपर स्पेश्यिलिटी अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. पुनीत गुप्ता के खिलाफ 50 करोड़ के फर्जीवाड़े पर एफआईआर दर्ज हुई है। यह एफआईआर डीके के अधीक्षक डॉ. केके सहारे की शिकायत पर गोल बाजार थाने में हुई है। पूर्व सीएम रमन सिंह के दामाद गुप्ता के खिलाफ कई धाराओं के तहत लोकसेवक होते हुए आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, चारसौ बीसी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज से हेराफेरी करने के आरोप लगे हैं। अंतागढ़ टेप कांड में भी पंडरी थाने में डॉ. गुप्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज है।

डीकेएस में मशीन खरीदी और भर्ती में भारी अनियमितता की शिकायत

डीकेएस में मशीन खरीदी और भर्ती में भारी अनियमितता की शिकायत के बाद तीन सदस्यीय कमेटी ने मामले की जांच की थी। इसमें डॉ. गुप्ता के खिलाफ 50 करोड़ की अनियमितता की बात सामने आई है। शिकायत के अनुसार डॉ. गुप्ता ने 14 दिसंबर 2015 से 2 अक्टूबर 2018 के बीच अस्पताल में गड़बड़ी की।

उन्होंने नियम विरुद्ध डॉक्टरों व अन्य स्टाफ की भर्ती की। वहीं अपात्र लोगों से पैसे लेकर नौकरी दी। शिकायत में कहा गया है कि पूर्व अधीक्षक ने अपने पद और पहुंच का गलत फायदा उठाते हुए सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया। इससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ है। कई ऐसी मशीनें खरीदी गई हैं, जिससे मरीजों से सीधा कोई वास्ता नहीं है।

चार बार रिमाइंडर भेजा, फिर भी जांच कमेटी के समाने पेश नहीं हुए

जांच कमेटी को मशीन खरीदी की पूरी फाइल नहीं मिली है। यही नहीं कुछ फाइल ओरिजनल के बजाय जीराक्स काॅपी में मिली। चार बार रिमाइंडर भेजने के बावजूद डा. पुनीत कमेटी के समक्ष बयान देने के लिए उपस्थित नहीं हुए। बेरोजगारों से विभिन्न पदों के लिए आवेदन मंगाए गए थे। 50 लाख के डिमांड ड्राफ्ट आलमारी में रखे-रखे लैप्स हो गया। आवेदकों को भी नहीं लौटाया गया। जबकि कई बेरोजगार डीडी के लिए रोज चक्कर लगा रहे हैं।

80 लाख में स्प्रिचुअल बॉडी खरीदी, जिसका अब तक इस्तेमाल नहीं

अस्पताल में एक स्प्रिचुअल बॉडी 80 लाख रुपए से ज्यादा में खरीदी गई है। जानकारों के अनुसार सुपर स्पेश्यिलिटी अस्पताल में इस बॉडी का उपयोग ही नहीं है। यह बॉडी जीवित मनुष्य की तरह है। इंजेक्शन लगाने पर दर्द का अनुभव होता है और खून भी निकलता है। इस बॉडी का अभी कोई उपयोग नहीं हो रहा है। अस्पताल परिसर में किराए में दी गई दुकान में भी अनियमितता हुई है। एक दुकान का किराया महज 5 हजार रुपए महीना है। यहीं नहीं लांड्री व मेडिकल स्टोर के लिए ऐसी शर्तें रखी गई थीं, जिससे स्थानीय लोग बाहर हो गए।

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