Chhattisgarh

कार्रवाई :पापुनि में 6 करोड़ का ग्रीन बोर्ड घोटाला, फर्जी दस्तावेजों से टेंडर, जीएम समेत पांच पर केस

रायपुर | पाठ्य पुस्तक निगम में ग्रीन और रेट्रो साइन बोर्ड लगाने में 6 करोड़ के घपले का खुलासा होने के बाद सरकार ने निगम के छह अफसरों के खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज करने की मंजूरी दे दी है। निगम के अफसरों ने फरवरी 2018 टेंडर प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा कर अपात्र कंपनी को 6 करोड़ का ठेका दिया।

अपात्र कंपनी को ठेका देने के लिए तीन ऐसी कंपनियों के दस्तावेज जमा किए जिन्होंने टेंडर में हिस्सा नहीं लिया। फर्जीवाड़े की जांच के बाद जांच समिति ने रिपोर्ट सरकार को भेजी। उसी रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का केस दर्ज करने की मंजूरी दी है। जांच समिति की रिपोर्ट में निगम के जीएम अशोक चतुर्वेदी जीएम, दीप्ति अग्रवाल वरिष्ठ प्रबंधक, सच्चिदानंद शास्त्री वरिष्ठ प्रबंधक वितरण, जे शंकर वरिष्ठ प्रबंधक वितरण एससीआरटी और संजय पिल्ले उप प्रबंधक की फर्जीवाड़े में सीधी भूमिका है।

शासन से मंजूरी के बाद अब इन अफसरों के खिलाफ पुलिस में केस दर्ज करवाया जाएगा। हालांकि राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ईओडब्लू इसी फर्जीवाड़े की पहले से जांच कर रहा है। अफसरों ने मिलीभगत कर होप इंटरप्राइजेस सुंदरनगर को ग्रीन और रेट्रो साइन बोर्ड का ठेका दिलाने की साजिश रची।

अफसरों ने न्यू क्रिएटिव फाइबर ग्लास, मैसर्स मिनी सिगनासे रायपुर और एसआर इंटरप्राइजेस के नाम से फर्जी दस्तावेज जमा किए। तीनों कंपनियों के सील और जिम्मेदार अफसरों के फर्जी हस्ताक्षर का उपयोग किया गया। इस तरह कूटरचित जाली दस्तावेजों के आधार पर होप इंटर प्राइजेस को ठेका दिलवा दिया गया।

एमडी के फर्जी हस्ताक्षर कर दिए

टेंडर की प्रक्रिया में निगम के अफसरों ने तत्कालीन एमडी को न सिर्फ अंधेरे में रखा बल्कि उनके फर्जी हस्ताक्षर तक कर दिए। इसकी जानकारी होने पर तत्कालीन एमडी ने शासन को इसकी जानकारी दी। उन्होंने शासन को अवगत कराया था कि टेंडर की कार्रवाई विवरण और उपस्थिति पत्रक के प्रथम पृष्ठ पर अंकित प्रबंध संचालक के हस्ताक्षर उनके द्वारा नहीं किए गए हैं। एमडी ने शासन को फर्जी हस्ताक्षर की जांच कर कार्रवाई के लिए लिखा है।

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