Chhattisgarh

लापरवाही का जिम्मेदार कौन?: 3 महीने से बिना वेतन के काम कर रहा था लैब टेक्नीशियन; जिस अस्पताल में काम करता था संक्रमित होने पर वहीं नहीं मिला बेड, स्ट्रेचर पर पड़े-पड़े मौत

मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल रायपुर (मेकाहारा) इसे अंबेडकर अस्पताल के तौर पर भी लोग जानते हैं। यहां हर दिन कोरोना संक्रमण से लड़ते हुए कई जिंदगियां हार रही हैं। इस अस्पताल में लैब टेक्नीशियन का काम करने वाले ओम प्रकाश चौहान को यहां ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण ने जकड़ लिया। इस अस्पताल में बेड नहीं मिला, तो प्राइवेट अस्पताल गए। हालत बिगड़ रही थी, ओम प्रकाश के भाई विवेक ने अंबेडकर अस्पताल के कर्मचारियों से फिर से बात कर मदद मांगी तो वेंटिलेटर देने का अश्वासन मिला।

भाई की जान बचाने वो भागता रहा मगर…

इसके बाद विवेक ओम प्रकाश को लेकर अस्पताल आया तो डॉक्टर ने कह दिया वेंटिलेटर नहीं है। एक घंटे तक विवेक एक चेंबर से दूसरे चेंबर, कभी ग्राउंड फ्लोर तो कभी सेकंड फ्लोर मदद के लिए भागता रहा। उधर, ओम प्रकाश की सट्रेचर पर पड़े-पड़े मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल वालों ने विवेक से कहा कि जब मरीज हमारे यहां एडमिट ही नहीं हो पाया तो हम मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं दे सकते। चूंकि तुम्हारा भाई संविदा पर काम करता था, इसलिए मुआवजे का प्रवधान नहीं है, बीमा के रुपए क्लेम के लिए आवेदन कर देना…। ये जवाब विवेक को उस अस्पताल के लोग दे रहे थे, जहां कोविड ड्यूटी में उसका भाई बिना वेतन मिले ही बस अपना फर्ज अदा कर रहा था।

ओम ने भाई से एंबुलेंस में कहा- मेरा आईकार्ड दिखाना, मदद मिलेगी

12 तारीख को संक्रमित होने के बाद अंबेडकर अस्पताल से मदद नहीं मिली तो संक्रमित होने के तीन से चार दिन तक डूंडा के प्राइवेट अस्पताल में ओम का इलाज चल रहा था। वहां अचानक 17 अप्रैल को अचानक ओम को खून की उल्टियां होने लगीं। वायरस उसके शरीर में खतरनाक असर दिखा रहा था। विवेक करीब 6 घंटों तक वेंटिलेटर बेड के लिए कोशिश करते रहे। फोन पर अंबेडकर अस्पताल के लोगों ने कहा था वेंटिलेटर खाली है। एंबुलेंस लेकर विवेक ओम के साथ रवाना हुए। रास्ते में ओम ने अपना आईकार्ड विवेक को देकर कहा- इसे अंबेडकर अस्पताल में दिखाकर बताना, वो लोग मदद करेंगे। जब विवेक ने अंबेडकर अस्पताल के एक डॉक्टर से आईकार्ड दिखाकर मदद मांगी, तो जवाब मिला- स्टाफ है तो क्या हुआ जब बेड खाली नहीं तो कहां से दें ?

परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दे सरकार

भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अमित साहू ने इस मामले में सरकार से मांग की है। अमित ने कहा कि संक्रमण के खतरों के बीच काम करने वाले डॉक्टर्स, टेक्नीशियन, नर्सेस और अन्य कर्मचारियों का बीमा करें, मौत होने पर तत्काल परिवार को मुआवजा दे। उन्होंने परिवार के एक सदस्य को शासकीय नौकरी देने की मांग की है। मेडिकल कालेज में पिछले एक साल से कोरोना जांच कर रहे टैक्नीशियन ओम प्रकाश चौहान मौत के बाद भी सरकार को दैनिक वेतनभोगी कर्मियों की कोई फिक्र ही नहीं है और ना ही उसके परिवार की सुध लेने की चिंता। स्वास्थ्य विभाग के लिए इससे ज्यादा शर्मनाक बात हो ही नहीं सकती। ओम प्रकाश को तीन महीने से वेतन नहीं मिला था, मगर वो बेफिक्री से काम पर लगा हुआ था, अब इसके परिजन को सरकार से मदद की आस है।

50 लाख का बीमा योजना ठप, इसे शुरू नहीं कर सकी सरकार

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि पिछले साल जब कोविड अपने चरम पर था तो सरकार ने स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना संक्रमण से मौत पर 50 लाख रुपए का बीमा कवर देने की योजना शुरू की थी। मगर इस योजना का कॉन्ट्रैक्ट मार्च के महीने तक ही था। तो अब ये कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने की वजह से ये योजना भी ठप हो चुकी है। अंबेडकर अस्पताल के कोविड वार्ड के एक डॉक्टर ने बताया कि गुजरात सरकार ने कोविड ड्यूटी कर रहे डॉक्टर्स को तीन महीने तक सैलेरी में 20 हजार रुपए प्रतिमाह का इंसेंटिव दिया। महाराष्ट्र सरकार ने सरकार के लिए काम करने वाले बॉन्ड में छूट दी। मगर छत्तीसगढ़ में ओम प्रकाश जैसे कर्मचारी बिना वेतन के काम कर रहे और इस तरह से जिंदगी से अपना हक खो रहे हैं।

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