#culture पाट जात्रा रस्म के साथ ही शुरू हुआ बस्तर दशहरे की तैयारियां

बस्तर | बस्तर दशहरे की शुरुआत श्रावण (सावन) के महीने में पड़ने वाली हरियाली अमावस्या यानि के हरेली से होती है। इस दिन रथ बनाने के लिए जंगल से पहली लकड़ी लाई जाती है।  इस रस्म को पाट जात्रा कहा जाता है।
यह त्योहार दशहरा के बाद 75 दिनों तक चलता है और अश्वनी के महीने में शुक्ल पक्ष के 13 वे दिन मुरिया दरबार की रस्म के साथ समाप्त होती है। इस रस्म में बस्तर के महाराज दरबार लगाकार जनता की समस्याएं सुनते हैं। यह त्योहार देश का सबसे ज्यादा दिनों तक मनाया जाने वाला त्योहार है।

दशहरे में बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की की विशेष पूजा की जाती है। उनके लिए यहां एक भव्य रथ तैयार किया जाता है, इस रथ में उनका छत्र रखकर नवरात्रि के दौरान भ्रमण के लिए निकाला जाता है। मान्यता है कि भगवान राम ने अपने वनवास के लगभग दस साल दंडकारण्य में बिताए थे। छत्तीसगढ़ का बस्तर इलाका प्राचीन समय में दंडकारण्य के रूप में जाना जाता था।लेकिन फिर भी यहां का ऐतिहासिक दशहरा राम की लंका विजय के लिए नहीं मनाया जाता है।



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