नहीं हुई कोई मुठभेड़, जवानों ने निर्दोष महिलाओं को पीछे से मारी गोली, वर्दी भी पहना रहे थे, मजिस्ट्रियल जांच के आदेश - गोंडवाना एक्सप्रेस
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नहीं हुई कोई मुठभेड़, जवानों ने निर्दोष महिलाओं को पीछे से मारी गोली, वर्दी भी पहना रहे थे, मजिस्ट्रियल जांच के आदेश

सुकमा (एजेंसी) | सुकमा जिले के गोदेलगुड़ा गांव, पूरे गांव में मातम और सन्नाटा पसरा हुआ है। इसके पीछे की वजह यह है कि गांव की एक महिला गोलीबारी में मारी गई तो दूसरी घायल है। पूरा गांव दहशत के साथ आक्रोश में है। गांव के लोगों की जुबान पर बस एक ही बात है कि जवानों ने उनकी गांव की महिलाओं को गोली मार दी।

गांव में हर छोटा-बड़ा बस एक ही बात कह रहा है कि उनके गांव में कोई मुठभेड़ नहीं हुई थी और जवानों ने निर्दोष महिलाओं पर पीछे से गोली चला दी। गांव के लोगों के आक्रोश के बीच एसपी सुकमा जितेंद्र शुक्ला भी मान रहे हैं कि वे महिलाएं नक्सली नहीं थी, उनको गोली मुठभेड़ के दौरान क्राॅस फायरिंग के दौरान लगी।

मृतिका के परिजनों को 25 हजार और घायल को 20 हजार की मदद

सुकमा एसपी शुक्ला ने कहा है कि मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है और मजिस्ट्रियल जांच भी करवाई जा रही है। मृतिका के परिजनों को 25 हजार और घायल महिला को 20 हजार रुपए की मदद कर दी गई है। पूरा गांव मुठभेड़ की बात को झूठा बता रहा है और कह रहा है कि शनिवार को सिर्फ तीन गोलियां चलीं थीं, जिसमें एक गोली पोड़ियाम सुक्की की पेट में लगी तो दूसरी कलमू देवे के जांघ को चीरते हुए निकल गई।




3 माह का मासूम बिलख रहा, भाई-बहन का ही सहारा

गोलीबारी में मारी गई पोड़ियाम सुक्की के चार बच्चे हैं। इनमें से एक तो तीन महीने का मासूम है और वह मां के दूध पर पूरी तरह से निर्भर था। घटना के बाद से इस तीन माह के बच्चे का रो-रो कर बुरा हाल है। सुक्की के  तीन बच्चे और अपने तीन महीने की बहन को चुप करवाने की कोशिश करते रहे । इन तीनों की उम्र भी सात साल के अंदर की है। इन बच्चों को जो भी देख रहा है उनकी आंखों में आंसू आ रहा है।

सोनी साेड़ी भी पहुंचीं गांव निष्पक्ष जांच की मांग की

इधर रविवार को सोनी साड़ी भी गोदेलगुड़ा पहुंची, यहां गांव वालों से बातचीत के बाद उन्होंने पूरे घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि गोलीबारी से संबंधित कई तथ्य मिले हैं जिसे सोमवार को पत्रवार्ता में वे सार्वजनिक करेंगी।

चश्मदीद ने कहा, “जवान उसे वर्दी पहनाने की कोशिश कर रहे थे।”

घटनास्थल पर मौजूद एक चश्मदीद ने बताया, “पोड़ियाम सुक्की और कलमू देवे सुबह 7 बजे गांव के पास सटे जंगल से लकड़ियां लेने एक साथ निकले थे। हम गांव से पांच या छह सौ मीटर की दूरी पर ही पहुंचे थे कि अचानक हमें जवान नजर आए। जवानों को देखने के बाद हम वापस लौटने लगीं। हम जैसे ही पीछे मुड़े तो एक गोली की आवाज आई। इसके बाद हम चिल्लाने लगे कि हम लकड़ी लेने आए हैं। मैं सबसे पीछे थी मेरे आगे पोड़ियाम सुक्की और कलमू थी। इसके बाद एक गोली पोड़ियाम सुक्की को पीछे से ही लगी और वह गिर पड़ी इसके बाद एक गोली कलमू देवे को लगी। कलमू को गोली लगने के बाद मैंने उसे सहारा दिया और गांव के पास लेकर आई। इसी बीच पोड़ियाम पानी-पानी कर चिल्ला रही थी। जब हम पोड़ियाम सुक्की के लिए पानी लेकर वापस गए तो कुछ जवान उसे वर्दी पहनाने की कोशिश कर रहे थे। गांव वालों ने इसका विरोध किया तो जवानों ने उसे हास्पिटल ले जाने की बात कही। इस दौरान भी सुक्की पानी मांग रही थी। फिर जवानों ने उसे झिल्ली में बांधना शुरू किया तो हमने कहा कि झिल्ली में उसकी सांस रुक जाएगी। इस बीच हम गांव लौटे और घायल कलमू को भी कैंप की ओर ले गए। इस दौरान सिर्फ तीन ही गोलियां चली मुठभेड़ जैसी कोई बात ही नहीं हुई।”

दंडाधिकारी जांच जल्द से जल्द करवाने की कोशिश : एसपी

एसपी जितेंद्र शुक्ला ने भी पक्ष रखा है रविवार की दोपहर पुराने एसपी दफ्तर में एक पत्रवार्ता में उन्होंने जानकारी दी कि महिला की मौत के मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है। इस मामले में दंडाधिकारी जांच जल्द से जल्द करवाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि जंगल में जवानों और नक्सलियों के बीच सिर्फ दस मिनट ही मुठभेड़ चली थी। मुठभेड़ स्थल से एक भरमार बंदूक, पिट्ठू, 9058 रुपए नगद, कोर्डेक्स वायर, डेटोनेटर, जिलेटिन स्टीक समेत अन्य सामग्री बरामद की है। एनकाउंटर के दौरान दोनों महिलाएं एनकाउंटर स्थल से कुछ ही दूरी पर जंगल में लकड़ियां इकट्ठा कर रहीं थीं। फायरिंग की आवाज सुनकर दोनों हड़बड़ाहट में गोलीबारी की दिशा की तरफ ही भागीं और  पोड़ियाम सुक्की के पेट में गोली लगी और वह गिर गई। एक गोली कलमू देवे की जांघ को चीरते हुए निकल गई। बावजूद वह भागते हुए गोदेलगुड़ा पहुंची।

यहां से ग्रामीण उसे लेकर पुसवाड़ा कैंप की ओर आ रहे थे। इसी दौरान सुरक्षाबलों के जवानों की नजर घायल महिला देवे पर पड़ी और वे उसे उपचार के लिए दोरनापाल लेकर पहुंचे। इससे पहले सुक्की को जवान मुठभेड़ स्थल से निकालकर दोरनापाल ले आए थे जहां उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई। देवे का उपचार फिलहाल जिला अस्पताल में जारी है। उसकी हालत सामान्य बनी हुई है 4-5 दिनों में उसे डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।



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