Chhattisgarh Gondwana Special

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान: जगदलपुर में हो रहा सुपोषण युक्त मुगफल्ली, गुड युक्त काजू निर्माण

बस्तर संभाग में कुपोषण एवं एनीमिया एक बड़ी चुनौती है। बस्तर एक आदिवासी बाहुल क्षेत्र है जहाँ सामाजिक रहन सहन व खानपान की विविधता अशिक्षा व कुपोषण व एनिमिया का मुख्य कारण है। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान से क्षेत्र को कुपोषण व एनीमिया से मुक्त कर विकास की ओर अग्रसर होना है।

बस्तर जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा उत्तम रणनीति तैयार कर कुपोषण व एनीमिया से बस्तर से मुक्त कराने हेतु प्रयास किया जा रहा है। कुपोषण मे कमी लाने के लिए समुदाय की सहभागिता और शासकीय प्रयासों के समन्वय से लक्ष्यों को प्राप्त किया जा रहा है। वजन त्यौहार के आंकड़ो के अनुसार बस्तर जिले मे कुपोषण का 25.60 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के अंर्तगत 06 माह से 06 आयु वर्ष के बच्चे ‘‘हरिक नानी बेरा‘‘ (खुशहाल बचपन ) व 15 आयु वर्ष से 49 आयु वर्ष के गंभीर एनीमिक महिलाओं के लिए आमचो लेकी, आमचो माय (हमारी लड़की हमारी माता) आरंभ किया गया था।

आदिवासी बहुल क्षेत्र बस्तर में कुपोषण व एनीमिया का कारण गर्भवती, शिशुवती माताओं व बच्चों को पर्याप्त पौष्टिक आहार ना मिलना, बच्चों का बिमारी से ग्रस्त होना, साथ ही समाज में पोषण संबंधी जागरूकता का अभाव है। ‘‘गढबो नवा छत्तीसगढ़‘‘ क्रियान्वयन में मुख्यमंत्री जी की मंशा के अनुरूप जनजातीय बहुल क्षेत्रों में बच्चों के कुपोषण स्तर में कमी लाना, 15 से 49 आयु वर्ष की एनीमिया पीड़ित महिलाओं में एनीमिया को कम करना प्राथमिकता में है। लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बस्तर जिले में ‘‘हरिक नानीबेरा (खुशहाल बचपन)‘‘ अभियान अंतर्गत प्रथम चरण में जिले के 82 सर्वाधिक कुपोषण वाले आंगनबाड़ी केन्द्रों को चयनित किया गया। द्वितीय चरण में 95 आंगनबाड़ी केन्द्रों को चयनित किया गया। अब इस अभियान का विस्तार करते हुए तृतीय चरण में जिले के 1081 आंगनबाड़ी केन्द्रों के जो कि प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से डीएमएफटी प्रभावित क्षेत्र अंतर्गत आते है, उनमें लागू किया गया था जिसमें 41474 बच्चों लाभान्तिव होंगे, जिसमें अतिरिक्त पूरक पोषण आहार में अण्डा, मुंगफल्ली व गुड़ का लड्डू प्रदाय किया जा रहा है और वर्तमान में 1981 आंगनवाडी केंद्र के 72 हजार लाभार्थियों को 3 दिवस लडडू एवं 3 दिवस अण्डा प्रदाय करने हेतु सप्ताह के सोमवार, बुधवार, शुक्रवार को मूंगफल्ली गुड़ का 25 ग्राम का 01 लड्डू तथा मंगलवार, गुरूवार तथा शनिवार को 01 उबला अण्डा दिया जाने हेतु महिला बाल विकास विभाग के समन्वय के माध्यम से बिहान द्वारा गठित स्व-सहायता समूह को दायित्व दिया गया है।

मुगफल्ली एवं गुड युक्त लडडू निर्माण हेतु का कलस्टर आधार पर चयन किया गया एवं चयन के पश्चात् लड्डू बनाने हेतु जिला स्तर पर महिला बाल विकास विभाग की ओर से प्रशिक्षण किया गया। सर्वप्रथम प्रथम चरण हेतु समूह 81 केंद्रो के लिए 5 समूह द्वितीय चरण हेतु 1081 केंद्रो हेतु 11 समूह एवं तृतीय चरण हेतु 1981 केंद्रो 24 बिहान महिला स्व-सहायता समूह का चयन कर लडडू बनाने हेतु चिन्हांकित किया गया है।
आँगनबाड़ी केंद्रो के माध्यम से सुपरवाईजर के द्वारा लड्डू हेतु बच्चों के अनुसार मांग पत्र लड्डू बनाने हेतु प्रस्तुत की जाती है। तद्पश्चात् दिशा निर्देशानुसार प्रति बच्चें को 25 गाम मूंगफल्ली व गुड युक्त लड्डू दिये जाने है, और 1 किलो मे 40 लड्डू मिठाई डिब्बा में प्रदाय किये जाने है, जिसमें मुंगफल्ली  650  ग्राम, गुड 350 ग्राम, ईलायची स्वादानुसार मिक्स कर समूह के माध्यम से लडडू तैयार कर विकासखण्ड के महिला बाल विकास विभाग, सेक्टर, आँगनबाड़ी केंद्र तक सप्लाई की जाती है।

महिला समूह के द्वारा प्रतिदिवस 10 सदस्यों के माध्यम से 2000 से 2500 लड्डू निर्माण किया जाता है, अब तक 65.37 लाख रूपये तक 12.48 लाख लड्डू वितरण किया जा चुका है। प्रति किलो लड्डू बनाने मे 115 रूपये समस्त व्यय के साथ खर्च होता एवं प्रति किलो वर्तमान दर से 45 रूपये प्रतिकिलो फायदा होता है अर्थात् अब तक 31.50 लाख रूपये समूह को आय हुआ। पूर्व में प्रति नग लड्डू की कीमत 6 रूपये एवं वर्तमान मे 4 रूपये की दर से समूह के खाते मे विभाग के माध्यम से राशि प्राप्त होती है।

आंगनवाडी केंद्र मे बच्चे एवं महिलाओं को मुंगफल्ली लड्डू देने के लिए मिठाई डिब्बा में ही मांग की गयी थी ताकि लड्डू टूटे ना इसलिए समूह के द्वारा उक्त डिब्बा बाहर से लेना पड़ता था जिसके कारण से दिक्कत होती थी। इसलिए उक्त मिठाई के डिब्बा बनाने हेतु 5 समूह को जिला स्तर पर प्रशिक्षित किया गया और वर्तमान मे समूहों के द्वारा स्वयं मिठाई डिब्बा बनाकर लड्डू प्रदाय करने वाले समूहों को सप्लाई करते है। डिब्बा बनाने मे समूह के माध्यम से एक लाख रूपए की पूंजी लगाया गया, जिसमें 13335 डिब्बा मिलता है। प्रति डिब्बा 10 रूपये की दर से अर्थात् 1 लाख 35 हजार रूपये मे बेचते है, जिससे शुद्ध समूह को 33 हजार रूपये आमदानी हो जाती है।

जिले में हरिक नानीबेरा, (खुशहाल बचपन) व आमचो लेकी, आमचो माय (हमारी लड़की, हमारी माता) अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए नोडल एजेन्सी पंचायत एवं ग्रामीण विकास है। ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच व पंच की भूमिका महत्वपूर्ण है ग्राम पंचायत स्तर पर समस्त कार्यक्रम की निगरानी व मार्गदर्शन में किया जाता है।स्थानीय एनआरएलएम (बिहान) समुह के द्वारा चयनित आंगबनाड़ी केन्द्र के बच्चों के लिए मुँगफल्ली गुड़ का लड्डु, उबला अण्डा प्रदाय, स्थानीय महिला समूहों की मासिक बैठक आंगबनाड़ी केन्द्रों में किया जा रहा है जिसमें स्वच्छता कुपोषण पोषण आहार इत्यादि पर चर्चा होती है और बिहान समूह के सदस्यों द्वारा बच्चों के माता-पिता को केन्द्र में बुलाने एवं उन्हे परामर्श देने में सहयोग किया जा रहा है।

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