13 वर्ष की उम्र में अकलतरा में हुई थी मुनि श्री तरुण सागर की दीक्षा, 2 साल निवास भी किये

ये तस्वीर 18 जनवरी 1982 की है जब छत्तीसगढ़ के अकलतरा में पवन कुमार बने क्षुल्लक 105 तरुण सागर महाराज

अकलतरा(जांजगीर-चांपा) | बचपन में तरुण सागर महाराज ने आचार्य पुष्पदन्त सागर महाराज से वैराग्य की अनुमति मांगी। लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया, पवन कुमार ने 3 दिन न खाया न पीया। जिद देख परिजन छिन्दवाड़ा (म.प्र.) ले गए। वहां, आचार्य पुष्पदन्त सागर से फिर मिलवाया। आचार्य हठ देख आखिरकार मान ही गए। और वे छिन्दवाड़ा में आचार्य से अकलतरा (वर्तमान अकलतरा नगर पालिका जांजगीर चाम्पा, छत्तीसगढ़) की 1008 आदिनाथ पंच कल्याणक एवं गजरथ महोत्सव समिति के सदस्य मिलने पहुंचे और महोत्सव में आने के लिए कहा, जो पवन ने स्वीकार कर लिया।

पदयात्रा करते हुए जब आचार्य ससंघ रायपुर होते हुए अकलतरा पहुंचे। तब पवन कुमार भी साथ थे। और 18 जनवरी 1982 को अकलतरा के हाई स्कूल मैदान महोत्सव में पवन कुमार दीक्षित हुए और उन्हें क्षुल्लक 105 तरुण सागर महाराज की उपाधि मिली। चातुर्मास आयोजन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष सुशील जैन ने बताया, दीक्षा लेने के बाद तरुण सागर महाराज 2 साल अकलतरा में ही रहे। फिर वे आचार्य पुष्पदंत के साथ बिहार स्थित सम्मेद शिखर के लिए रवाना हो गए।



Leave a Reply