लाठीचार्ज : 14 कांग्रेसियों में से 7 ही पहुंचे बयान देने - गोंडवाना एक्सप्रेस
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लाठीचार्ज : 14 कांग्रेसियों में से 7 ही पहुंचे बयान देने

बिलासपुर (एजेंसी) | लाठीचार्ज में न्याय पाने की उम्मीद करने वाले कांग्रेसी बयान देने के लिए भी नहीं आ रहे हैं। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सहित सात कांग्रेसी बयान देने ही नहीं आए। 14 को बयान देने के लिए अतिरिक्त दंडाधिकारी कोर्ट में उपस्थित होना था लेकिन पहुंचे केवल सात। लाठीचार्ज मामले में अतिरिक्त दंडाधिकारी बीएस उइके ने 14 कांग्रेसियों को कोर्ट रूम में बुलाया था। इनमें अभय नारायण राय, विष्णु यादव, स्वाति रजक,रामचरण धुरी, एके शहाबुद्दीन और हबीब अंसारी और हफीज कुरैशी बयान देने के लिए आए।

पर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय केशरवानी, गोपाल दुबे सहित सात लोग नहीं पहुंचे। बता दें कि 28 जनवरी को रायपुर में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के कार्यक्रम में जाने की वजह से नहीं आए थे। वहीं कुछ शहर से बाहर थे। सवाल उठता है कि क्या खुद कांग्रेसी नहीं चाहते कि लाठीचार्ज मामले में जांच का जल्द पूरी हो। अब बाकी बचे कांग्रेसियों की सुनवाई की तारीख तय की जाएगी। फिर पुलिस को प्रतिपरीक्षण के लिए बुलाया जाएगा।




इधर, शुक्रवार को बयान देने पहुंचे कांग्रेसियों ने एएसपी नीरज चंद्राकर और प्रधान आरक्षक हरनारायण पाठक पर जानबूझकर लाठीचार्ज करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई करने कहा। अभय नारायण राय ने कांग्रेस भवन के सामने हुई घटना के सवालों का जवाब देने से इनकार करते हुए कहा कि वे उत्तर इसलिए नहीं देंगे क्योंकि जवाब में सभी बातें नहीं बता सकेंगे। उन्होंने बताया कि बगैर सक्षम अधिकारी के लाठीचार्ज किया गया। इधर जिला कांग्रेस अध्यक्ष केशरवानी ने खुद को बीमार होने की वजह से तो गोपाल दुबे ने दिल्ली में होने की वजह से नहीं पहुंचना बताया।

पुरुष पुलिसकर्मी ने डंडे से मारा और गिरफ्तार किया

एनएसयूआई की स्वाति रजक ने जांच अधिकारी को बताया कि वे लोग महिला मोर्चा के अध्यक्ष के आगमन की तैयारी को लेकर बैठक कर रहे थे। उन्हें गिरफ्तार करने का कारण भी नहीं बताया गया। उनके सिर पर पुरुष पुलिसकर्मी ने एक डंडा मारा और गिरफ्तार किया जबकि वहां महिला पुलिसकर्मी मौजूद थी। उनके अलावा अन्य महिला कांग्रेसियों को पुरुष पुलिसकर्मियों ने गिरफ्तार किया।

यकीन हो गया कि पुलिस को गाली देने की ट्रेनिंग मिलती है

रामचरण धुरी ने बताया कि पुलिस को निरंकुश बताते हुए बताया कि उन्हें पुलिस पीटते हुए कांग्रेस भवन से बाहर निकाली। बाहर आने पर पता चला कि उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पुलिस के दो बड़े वाहन वहां खड़े हैं। उन्होंने बताया कि अब तक सुना था कि पुलिस को गाली देने की ट्रेनिंग दी जाती है लेकिन 18 सितंबर को सुन और देख लिया। इस बात पर यकीन भी हो गया। दोषी पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।



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