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कोंडागांव: 4 झरनों के बीच उपरबेदी की पहाड़ी पर मिले शैलचित्र, इन शैलचित्र में महिलाओं और पुरुषों के चित्र बने हुए हैं, अब होगा रिसर्च

कोंडागांव | केशकाल से करीब 20 किलोमीटर दूर है उपरबेदी की पहाड़ी। ग्राम पंचायत रावबेड़ामारी का आश्रित ग्राम उपरबेदी एक छोटा सा गांव है। यहां तक पहुंच पाना आसान नहीं है, कच्चे और ऊबड़-खाबड़ रास्ते और उनके बीच से बहते हुए नाले यहां तक आने में परेशानी का सबब बनते हैं। लेकिन यहां पहुंचते ही उपरबेदी की पहाड़ी पर शैलचित्र इतिहास की झलक दिखाते हैं। इस पहाड़ी पर बने शैलचित्र थोड़े खास हैं। इन शैलचित्र में महिलाओं और पुरुषों के चित्र बने हुए हैं।

कलेक्टर के अनुसार इस पूरे क्षेत्र को पर्यटन के लिए विकसि करने प्रोजेक्ट बनाकर पर्यटन विभाग को भी भेजा गया है। उपरबेदी की पहाड़ी पर मिले शैलचित्रों के आधार पर अब फूलों की घाटी के नाम से विख्यात मध्य बस्तर के प्रवेश द्वार केशकाल घाटी पर अव्यवस्थित शैलचित्र भी सुर्खियों में आ गए हैं। घाटी में तीन से चार स्थानों पर शैलचित्रों के होने के प्रमाण मिले हैं।

इनमें सबसे पुराना घाटी के पश्चिमी छोर पर कोंडागांव जिले के केशकाल ब्लॉक के ग्राम धनोरा से अंतागढ़ मार्ग पर 5 किलोमीटर दूर पहाड़ी पर हजारों साल पुराने शैलचित्र पाए गए हैं। पहाड़ी पर बसे गांव खालेबेदी के ग्रामीण पीढ़ियों से इन शैलचित्रों को देखते आ रहे हैं। यहां की आकृतियां चंदेली में मिले शैलचित्रों के समान हैं। खालेबेदी से 7 किमी दूर धनोरा के पास ग्राम बदवर की पहाड़ी पर भी शैलचित्र मिले हैं।

शैलचित्रों के बारे में पुरखों से सुना था

धनोरा के सरपंच संतोष उइके ने बताया कि खालेबेदी के शैलचित्रों के बारे में उन्होंने अपने पुरखों से सुना था। बाद में इसे देखने भी गए थे। पहाड़ी पर करीब 50-60 मीटर की ऊंचाई पर एक कोने पर यह शैलचित्र हैं। बरसात में यहां पहुंचना बेहद कठिन हैं। गर्मी में लोग छोटे मारी में पिकनिक मनाने जाते हैं। ग्रामीण रामनारायण सिंह ने बताया कि खालेबेदी में शैलचित्र हैं जिनका रंग कुछ धुंधला जरूर पड़ गया है पर स्पष्ट देखे जा सकते हैं।

वे लोग बरसों से इसे देखते आ रहे हैं। ग्राम खौली के स्कूल में पदस्थ शिक्षक मिथिलेस ने कहा कि जिज्ञासावश कई बार इन शैलचित्रों को देखा है। ग्रामीण इन शैलचित्रों को आदि मानव के चित्र बताते हैं। बदवर व खालेबेदी के शैलचित्र लाल रंग के हैं। इसी के करीब कांकेर जिले के ग्राम कानागांव में भी पहाड़ी पर शैलचित्र हैं। लेकिन यह लाल रंग के न होकर सफेद रंग के हैं।

पर्यंटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है: कलेक्टर

कलेक्टर नीलकंठ टेकाम ने कहा कि उपरबेदी में चार झरनों के साथ ही वहां वर्षों पुराने पत्थरों पर शैलचित्र बने हैं। जो खोज का विषय है और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस पूरे क्षेत्र का हमने प्रोजेक्ट बनाकर पर्यटन विभाग को भेजा है। लोग इसे देख सकें और पर्यटन की दृष्टि से लोग यहां पर आएं इसके लिए योजना बना ली गई है।

शैलचित्र संपदा के लिहाज से महत्वपूर्ण है इलाका

पुरातत्व विभाग के उप संचालक जेआर भगत का कहना है कि चंदेली में शैलचित्र मिलने के बाद अनुमान यही है कि आसपास के इलाकों में और भी शैलचित्र होंगे। उन्होंने कहा कि धनोरा के पास खालेबेदी व उपरवेदी में शैलचित्र चित्र मिल रहे हैं यह इलाका निश्चित तौर पर शैलचित्र संपदा के लिहाज से महत्वपूर्ण और अध्ययन का विषय है। पुरातत्व विभाग का दल खालेबेदी और बदवर जाकर इन शैलचित्रों को देखेगा।

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