कैफे कॉफी डे के फाउंडर वीजी सिद्धार्थ का शव नेत्रावती नदी के पास मिला, दो दिन से लापता थे - गोंडवाना एक्सप्रेस
gondwana express logo
Gondwana Express banner

कैफे कॉफी डे के फाउंडर वीजी सिद्धार्थ का शव नेत्रावती नदी के पास मिला, दो दिन से लापता थे

मेंगलुरु (एजेंसी) | कैफे कॉफी डे (सीसीडी) के फाउंडर और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा के दामाद वीजी सिद्धार्थ (58) का शव बुधवार सुबह मेंगलुरु की नेत्रावती नदी से मिला। वे सोमवार रात से लापता थे। इसके पहले सिद्धार्थ का 27 जुलाई को कंपनी के नाम लिखा पत्र सामने आया था, इसमें कर्जदाताओं और प्राइवेट इक्विटी पार्टनर के दबाव का जिक्र किया था और यह भी लिखा था कि आयकर विभाग के पूर्व डीजी द्वारा शेयर अटैच किए जाने से नकदी का संकट हुआ।

जबकि आईटी विभाग का कहना है कि सिद्धार्थ के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की थी। पुलिस कमिश्नर संदीप पाटिल ने कहा, ‘‘हमें बुधवार सुबह शव मिला। इसकी शिनाख्त के लिए परिवार के सभी सदस्यों को सूचना दे दी गई है।’’

27 जुलाई को लिखा सिद्धार्थ का एक पत्र सामने आया था, जिसमें उन्होंने इक्विटी पार्टनर और कर्जदाताओं के दबाव का जिक्र किया था। उन्होंने लिखा था कि मैं बतौर व्यवसायी नाकाम रहा। पुलिस पूछताछ में ड्राइवर ने बताया था कि सिद्धार्थ उलाल शहर में स्थित पुल तक घूमने के लिए आए थे। वहां उन्होंने कार रुकवाई और पैदल ही निकल गए। मैं उनका इंतजार कर रहा था। 90 मिनट तक वापस नहीं आए तो पुलिस को सूचना दी।

‘कर्जदाताओं के दबाव से टूट चुका हूं’

पत्र में सिद्धार्थ ने लिखा था, ‘‘बेहतर प्रयासों के बावजूद मैं मुनाफे वाला बिजनेस मॉडल तैयार करने में नाकाम रहा। मैंने लंबे समय तक संघर्ष किया लेकिन अब और दबाव नहीं झेल सकता। एक प्राइवेट इक्विटी पार्टनर 6 महीने पुराने ट्रांजेक्शन से जुड़े मामले में शेयर बायबैक करने का दबाव बना रहा है। मैंने दोस्त से बड़ी रकम उधार लेकर ट्रांजेक्शन का एक हिस्सा पूरा किया था। दूसरे कर्जदाताओं द्वारा भारी दबाव की वजह से मैं टूट चुका हूं। आयकर के पूर्व डीजी ने माइंडट्री की डील रोकने के लिए दो बार हमारे शेयर अटैच किए थे। बाद में कॉफी डे के शेयर भी अटैच कर दिए थे। यह गलत था जिसकी वजह से हमारे सामने नकदी का संकट आ गया।’’

‘‘मेरी विनती है कि आप सभी मजबूती से नए मैनेजमेंट के साथ बिजनेस को आगे बढ़ाते रहें। सभी गलतियों के लिए मैं जिम्मेदार हूं। सभी वित्तीय लेन-देनों के लिए मैं जिम्मेदार हूं। मेरी टीम, ऑडिटर्स और सीनियर मैनेजमेंट को मेरे ट्रांजेक्शंस के बारे में जानकारी नहीं है। कानून को सिर्फ मुझे जिम्मेदार ठहराना चाहिए। मैंने परिवार या किसी अन्य को इस बारे में नहीं बताया।’’

‘‘मेरा इरादा किसी को गुमराह या धोखा देने का नहीं था। एक कारोबारी के तौर पर मैं विफल रहा। उम्मीद है कि एक दिन आप समझेंगे, मुझे माफ कर दीजिए। हमारी संपत्तियों और उनकी संभावित वैल्यू की लिस्ट संलग्न कर रहा हूं। हमारी संपत्तियां हमारी देनदारियों से ज्यादा हैं। इनसे सभी का बकाया चुका सकते हैं।’’

न्यूज एजेंसी ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया है कि आयकर विभाग ने सिद्धार्थ के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की थी। माइंडट्री के शेयर बेचने से उन्हें 3,200 करोड़ रुपए मिले थे। उन्होंने 300 करोड़ रुपए के टैक्स में से सिर्फ 46 करोड़ रुपए जमा करवाए थे।

सिद्धार्थ ने पिछले महीने माइंडट्री कंपनी में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेची थी

सिद्धार्थ ने पिछले महीने आईटी कंपनी माइंडट्री में अपनी पूरी हिस्सेदारी लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी) को 3,000 करोड़ रुपए में बेची थी। इससे पहले वे 21% होल्डिंग के साथ माइंडट्री के सबसे बड़े शेयरधारक थे। कॉफी के बिजनेस में सफल कारोबारी के तौर पर उनकी खास पहचान थी। कर्नाटक में सीसीडी के पास 12,000 एकड़ जमीन में कॉफी का प्लांटेशन है। इस साल मार्च तक देशभर में सीसीडी के 1,752 कैफे थे।

Leave a Reply