ओडिशा के बांध के चार गेट खुलने से इंद्रावती और शबरी नदी उफान पर, पहली बार डूबा सुकमा, 4 हजार लोग राहत शिविरों में

इंद्रावती नदी का जलस्तर हर घंटे 7 से 8 सेमी बढ़ रहा है। इसे देखते हुए लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है। इधर, सुकमा में 4 हजार से अधिक लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। बाढ़ से 50 हजार हेक्टेयर की फसल तबाह हो गई है।

जगदलपुर | पड़ोसी राज्य ओडिशा के खातिगुड़ा बांध के चार दरवाजे खोल देने से एक बार फिर से इंद्रावती नदी उफान पर है। इस बार इसका पानी जोरा नाला से होकर शबरी नदी में मिल रहा है। यही वजह है कि 2006 के बाद पहली बार बस्तर में बाढ़ से हालात इतने बिगड़े हैं। शबरी का जलस्तर बढ़ने से सुकमा में बाढ़ आ गई है। जगदलपुर की ओर कम पानी जा रहा है। इंद्रावती नदी का जलस्तर हर घंटे 7 से 8 सेमी बढ़ रहा है। इसे देखते हुए लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है। इधर, सुकमा में 4 हजार से अधिक लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। बाढ़ से 50 हजार हेक्टेयर की फसल तबाह हो गई है।




20 साल के विवाद के बाद बने थे स्ट्रक्चर, बाढ़ में ये भी डूबे

छत्तीसगढ़ में प्रवेश करने से पहले ही यहां से 30 किमी दूर ओडिशा के सूतपदर में जोरा नाला और इंद्रावती नदी का संगम है। पहले जोरा नाला का पानी इंद्रावती नदी में आता था, लेकिन लगातार रेत जमने और कटाव होने से स्थिति कुछ ऐसी बनी कि ओडिशा की ओर से आने वाली इंद्रावती नदी का लगभग पूरा पानी जोरा नाला में जाने लगा। 20 साल चले विवाद के बाद सीडब्ल्यूसी की मध्यस्थता में 32 करोड़ की लागत से जोरानाला और इंद्रावती नदी में कंट्रोल स्ट्रक्चर बनाए गए। इससे पानी का बहाव इंद्रावती नदी में होता रहे। बाढ़ के चलते ये दोनों कंट्रोल स्ट्रक्चर पानी में डूबकर बेकार हो गए हैं और पानी इंद्रावती नदी होते हुए शबरी नदी में जा रहा है।



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