Chhattisgarh

एसिडिटी के घरेलू नुस्खों में प्रमुख है करमत्ता भाजी (आइपोमिया एक्वाटिका)

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग 1 करोड़ लोग एसिडिटी  से पीड़ित हैं।एसिडिटी की समस्या लगभग सभी को कभी न कभी हो जाती है। यह पाचन तंत्र से संबंधित आम समस्या है,  हमारे पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड पेपसीन मौजूद होता है जो भोजन के पाचन में अहम भूमिका निभाता है। हाइड्रोक्लोरिक एसिड भोजन को टुकड़ों में तोड़ता है और बाहरी बैक्टेरिया से रोगों को बचाता है। हमारे पेट की परत इस एसिड के लिए अनुकूलित होती है इसलिए यह पेट को नुकसान नहीं पहुँचाती। एसिडिटी (Acidity) (पेट में जलन) से तात्पर्य ऐसी स्थिति से है, जब पेट का एसिड भोजन की नली (food pipe) में आ जाता है।इसकी वजह से पेट के निचले हिस्से में दर्द होने के साथ-साथ खट्टी डकार भी आती हैंएसिडिटी यदि बार-बार होती है तो यह गैस्ट्रो इसोफेगल डिजीज (Gastro Oesophaegal Disease (GERD) में भी बदल सकती है।

आम तौर पर एसिडिटी से राहत पाने के लिए लोग पहले घरेलू नुस्खों (home remedies for acidity) पर ही ऐतबार करते हैं। करमत्ता भाजी नैचुरल एंटी एसिड के रूप में काम करता है और हजम शक्ति को बढ़ाकर अतिरिक्त एसिड बनने से रोकता है।इसकी पत्तियों में खनिज तत्व  एवं विटामिन्स की प्रचुरता  और उत्तम पचनीयता का गुण होने के कारण  इसकी भाजी महिलाओं और बच्चों के लिए विशेषरूप से लाभकारी मानी जाती है।

करमत्ता भाजी में पाए जाने वाले कैरोटीन में मुख्य रूप से बीटा कैरोटीन, जैन्थोफिल तथा अल्प मात्रा में टेराजैन्थिन होता है।  इसकी 100 ग्राम  पत्तियों में 90.3   ग्राम जल, प्रोटीन 2.9  ग्राम, वसा 0.4   ग्राम, रेशा 1.2  ग्राम, कार्बोहाड्रेट 3.1  ग्राम, ऊर्जा 28  कि. कैलोरी,कैल्शियम 110 मि.ग्रा., फॉस्फोरस 46 मि.ग्रा., आयरन 3.9  मि.ग्रा.,के अलावा पर्याप्त मात्रा  में कैरोटिन 1980 माइक्रोग्राम,  विटामिन ‘सी’ 37 मि.ग्रा। एवं राइबोफ्लेविन 0.13 मी.ग्रा. पाया जाता है।

करमत्ता भाजी पाचन क्रिया को सुधार कर पाचन तंत्र को अधिक क्षारीय बनाता है और पेट की अम्लता को कम करता है।कभी-कभी अनुचित भोजन के कारण यह समस्या सभी को हो सकती है परंतु कुछ लोगों में यह समस्या अधिक होने लगती है जिसे नजरअन्दाज नहीं करना चाहिए अधिक होने पर यह समस्या गंभीर रूप भी ले सकती है। इसलिए सबसे पहले घरेलू नुस्खों को आजमाना चाहिए।यह भाजी अमूमन  वर्ष पर्यंत उपलब्ध रहती है।

इसके आलावा करमत्ता भाजी में अनेक औषधीय गुण पाए जाते है जो प्रमुख रूप से रक्त चाप को नियंत्रित करने में लाभदायक होते है।  इसकी भाजी कुष्ठ रोग, पीलिया,आँख के रोगों एवं कब्ज रोग के निदान में उपयोगी पाई गई है।  यह  भाजी दांतों-हड्डियों को मजबूत करती है। शरीर में खून की मात्रा बढाती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होती है।

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