अगर आप दिन में तीन सेल्फी लेते है तो हो जाइये सावधान, सेल्फाइटिस डिसऑर्डर से पीड़ित हो सकते हैं

हेल्थ न्यूज़ | जो लोग दिन में 3 या इससे ज्यादा बार सेल्फी लेते हैं, वे सेल्फाइटिस डिसऑर्डर से पीड़ित हो सकते हैं। सेल्फी की इस आदत से देश के डॉक्टर भी अछूते नहीं हैं। पीजीआई, रोहतक के 50 डाॅक्टरों के ऊपर किए गए रिसर्च से इस बात का खुलासा हुआ है। 70% डॉक्टर एक दिन में 3 बार सेल्फी लेने के आदी हैं। इतना ही नहीं 72% तो बाथरूम में भी मोबाइल का प्रयोग करते हैं। ये रिसर्च पीजीआई के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के राज्य व्यसन निर्भरता उपचार केंद्र में हुई।

मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के निदेशक कम सीईओ डॉ. राजीव गुप्ता के नेतृत्व में की गई रिसर्च में शोधकर्ताओं ने 50 डॉक्टरों की मोबाइल एक्टिविटी का अध्ययन किया। नतीजा निकला कि 22% डॉक्टर दिन में 6 बार, 6% डॉक्टर 9 बार सेल्फी लेने के आदी हैं।




ज्यादा सेल्फी लेने की इस आदत को लंदन और तमिलनाडु के शोधकर्ताओं ने ‘सेल्फाइटिस’ का नाम दिया है। भारत में फिलहाल करीब 40 करोड़ लोग इंटरनेट का प्रयोग करते हैं। इनमें 19 से 40 साल उम्र के 85% यूजर हैं। रिसर्च में ये भी पता चला कि 24% डॉक्टर हर दिन 2 घंटे से ज्यादा समय तक मोबाइल पर फेसबुक का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा 32% डॉक्टर एक घंटे से कम और 44% डॉक्टर 1 से दो घंटे तक फेसबुक इस्तेमाल करते हैं। 12% डॉक्टर पढ़ाई के लिए मोबाइल का प्रयोग 1 घंटे से भी कम समय करते हैं। 20% डॉक्टर 1 से 2 घंटे, जबकि 68% डॉक्टर 3 घंटे से ज्यादा पढ़ाई के लिए मोबाइल का प्रयोग करते हैं।

रिसर्च टीम ने बताया कि सेल्फाइटिस से पीड़ित लोग ज्यादातर अपना आत्मविश्वास बढ़ाने या मूड ठीक करने, दूसरों के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने या दूसरों से आगे रहने के लिए सेल्फी लेते हैं। इससे पहले लंदन की नॉटिंघम ट्रेंट यूनिवर्सिटी और तमिलनाडु के त्यागराजर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट की रिसर्च में भी सामने आया था कि जिन लोगों का दिन में 3 सेल्फी लिए बिना मन नहीं भरता, वे डिसऑर्डर के शिकार हैं। इस रिसर्च में डिसऑर्डर को सेल्फाइटिस नाम दिया। बीमारी का पता लगाने के लिए 200 लोगों के फोकस ग्रुप और 400 लोगों पर सर्वे किया था।

सेल्फाइटिस डिसऑर्डर भी 3 लेवल का होता है 

सेल्फाइटिस बीमारी के 3 स्तर होते हैं। पहला- ज्यादा सेल्फी लेते हैं, पर सोशल मीडिया पोस्ट नहीं करते। दूसरे, तीसरे स्तर के लोग खूब पोस्ट भी करते हैं।

  • 78% डॉक्टर सुबह जगने के 5-10 मिनट के भीतर ही मोबाइल देखते हैं। 18% डॉक्टर उठने के आधा घंटे में और 4% डॉक्टर 1 घंटे बाद मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं।
  • 78% डॉक्टर रात को सोने से ठीक पहले एक बार जरूर मोबाइल का प्रयोग करते हैं। जबकि 26% डॉक्टर सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करते हैं।
  • 86% डॉक्टरों का कहना है कि मोबाइल का प्रयोग करने से उनका समय बर्बाद नहीं होता। जबकि सिर्फ 14% ने माना कि इससे समय की बर्बादी होती है।




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