UPSC की तैयारी करते-करते पति-पत्नी ने प्रिंट कर डाले 5 करोड़ के नकली नोट, महिला निकली मास्टरमाइंड

रायपुर (एजेंसी) | अमलीडीह के रजत अपार्टमेंट स्थित फ्लैट नंबर 708 में शनिवार देर रात छापा मारकर पुलिस ने 5 करोड़ के नकली नोट पकड़े हैं। सभी नोट 2 हजार के हैं। बरामदगी जिस दंपति के फ्लैट से हुई वे दोनों यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे, फ्लैट में किराए से रहते थे। इन्होंने 3 माह में 2 हजार के 25 हजार नोट छापे। प्रदेश में अब तक पकड़ा गया नकली नोटों का यह सबसे बड़ा मामला है। गिरफ्तारी से कार्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के नाम पर किया जा रहा फर्जीवाड़ा भी उजागर हुआ है।

दंपति कंपनियों के एजेंटों को झांसा देते थे कि वे सीएसआर की रकम उनके फंड में जमा कर दें। भरोसा दिलाने के लिए वे नोटों से भरा बैग भी उन्हें दिखाते थे, हालांकि उसमें नकली नोट होते थे। फर्जीवाड़े का यह गोरखधंधा करने के आरोप में पुलिस ने निखिल सिंह (29) और पूनम अग्रवाल (30) को पकड़ा है। निखिल पटना (बिहार) का है और उसने 4 साल पहले बिलासपुर की पूनम से प्रेम विवाह किया था। प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली है कि दंपति ने आधा दर्जन कंपनियों से संपर्क किया था। अभी दंपति द्वारा 1 करोड़ रुपए की ठगी किए जाने की जानकारी मिली है। फर्जीवाड़े की मास्टर माइंड पूनम है। दंपति के फ्लैट से कलर प्रिंटर, लैपटाप, कटर और कागज का बंडल भी जब्त किया गया है।

फ्लैट छोड़ होटल भागे

आरोपियों को छापे की भनक लग गई थी। इसलिए फ्लैट में ताला लगा दो-तीन साथियों संग वीआईपी रोड स्थित एक होटल में चले गए। पर पुलिस को पता चल गया। पुलिस होटल पहुंच गई, वहां दोनों दबोच लिया। फ्लैट छोड़ते समय दंपति कुछ नकली नोट ले गए थे और कुछ नया रायपुर के एक फार्महाउस में छिपा दिए थे, वह भी जब्त कर लिए गए।




मंत्रियों-अफसरों की धौंस दिखाते थे

जांच में पता चला है कि पूनम खुद को प्रदेश के मंत्रियों व अफसरों का करीबी बताती थी। इसलिए एजेंट भी उससे घबराते थे। पूनम के पिता बिलासपुर के लोहा कारोबारी है। निखिल के पिता फैक्ट्री में काम करते है। दंपति के साथ 4 लोग और थे। इनमें से दो को पुलिस ने पकड़ लिया है, गिरफ्तारी की भनक लगते ही बाकी 2 भाग गए।

दिल्ली पढ़ने गए थे, नकली नोट बनाने और सीएसआर फंड के फर्जीवाड़े का आइडिया लेकर लौटे

एडिशनल एसपी प्रफुल्ल ठाकुर ने बताया कि निखिल और पूनम दिल्ली में मिले थे। दोनों यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे। दोनों ने वहीं शादी की। 6 माह पहले रायपुर शिफ्ट हुए। नोट प्रिंट करने और ठगी का आइडिया उन्होंने दिल्ली में सीखा था। पूनम ने सीएसआर फंड में घपला करने का तरीका भी सीखा। रायपुर आकर दंपति ने एक कलर स्कैनर लिया और 2 हजार के नए नोट को स्कैन कर प्रिंट करना शुरू किया। नोटों की खुद कटिंग की और बंडल बनाए।

सीएसआर फंड में घपला करने वाले दलालों को नोट दिखाकर एनजीओ के खाते में जमा करवाते थे पैसा

दंपति कंपनियों के अधिकारी या उनके एजेंट से संपर्क करते थे। फिर झांसा देते थे कि सीएसआर में वो जितना खर्च दर्शाएंगे उसका 80% उन्हें वापस मिलेगा और खर्च कंपनी के खाते में भी दिख जाएगा। रकम जमा करवाने के लिए आरोपी कंपनियों को एनजीओ और ट्रस्ट का अकाउंट नंबर देते थे। आरोपी कंपनियों को पैसे जमा होने के 24 घंटे के अंदर कैश देने का वादा करते थे। एजेंटों द्वारा पूछताछ करने पर उन्हें नकली नोटों का बैग दिखा दिया जाता था।



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