Chhattisgarh

पति और बेटी को पसंद था मशरूम खाना, इसलिए शुरू किया उत्पादन, हर महीने बेच रही हैं 100 किलो से ज्यादा मशरूम

यह महिला दुर्ग जिले की मशरूम लेडी के रूप में पहचान बना ली है। मतवारी गांव की जागृति साहू ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से हर महीने 100 किलो से ज्यादा ओएस्टर मशरूम बेचकर आत्मनिर्भरता का मिसाल बन गई है। यही नहीं अब महिलाओं को भी रोजगार देने के लिए इस कार्य से जोड़ रही है। 850 महिलाओं को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देकर सबल बनाया गया है।

खुद शिक्षिका नहीं बन पाई पर मास्टर ट्रेनर सिखा रही
जागृति साहू बीएससी और एमए पास हैं। इसलिए उनकी इच्छा थी कि नौकरी करें। जागृति बताती है कि शिक्षाकर्मी के लिए चयनित होने के बाद भी कुछ तकनीकी कारणों से जागृति का शिक्षिका बनने का सपना अधूरा रह गया था। वह कुछ उदास रहने लगी थी। अब मास्टर ट्रेनर हैं।

प्रोटीन रिच पिंक मशरूम का भी शुरू कर दिया उत्पादन
गायत्री स्व सहायता समूह द्वारा उत्पादित मशरूम की इतनी डिमांड है कि लोग कई दिन तक इंतजार करते हैं। समूह द्वारा ओयस्टर मशरूम का उत्पादन किया जाता है। जुलाई 2020 से प्रोटीन रिच पिंक ओयस्टर मशरूम का उत्पादन शुरू किया है। जिसकी और भी डिमांड है। हर दिन कम से कम 4 से 5 किलो मशरूम का उत्पादन होता है।

मतवारी की दूसरी महिलाओं को जोड़ा : जागृति न केवल खुद काबिल बनी बल्कि मतवारी गांव की दूसरी महिलाओं को भी उन्होंने अपने काम से जोड़ा। आज घर बैठे महिलाएं अच्छी आमदनी अर्जित कर रही हैं। जागृति साहू बताती है कि उनके समूह में 12 महिलाएं हैं।

प्रदेश की 850 महिलाओं को दिया प्रशिक्षण : जागृति ने मशरूम उत्पादन करना सीखा लेकिन उनकी यात्रा यही समाप्त नहीं हुई उनके कौशल को देखते हुए पीएनबी द्वारा राजधानी रायपुर में संचालित एकमात्र कृषक प्रशिक्षण केंद्र में मास्टर ट्रेनर के रूप में चयनित किया।

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