#culture अच्छे फसल और स्वास्थ्य के लिए मानते है हरेली तिहार - गोंडवाना एक्सप्रेस
gondwana express logo

#culture अच्छे फसल और स्वास्थ्य के लिए मानते है हरेली तिहार

छत्तीसगढ़ में हरेली महोत्सव किसानों का महत्वपूर्ण त्योहार है। हरेली शब्द हिंदी शब्द ‘हरियाली’ से उत्पन्न हुआ है और इसका मतलब है कि वनस्पति या हरियाली। यह छत्तीसगढ़ के ‘गोंड‘ जनजातीय का मुख्य रूप से महत्वपूर्ण त्योहार है यह त्यौहार हिंदू कैलेंडर के सावन (श्रावणी अमावस्या) महीने के अमावस्या के दिन मनाया जाता है, जो जुलाई और अगस्त के बीच वर्षा ऋतु में होता है। यह त्यौहार ‘श्रावण’ के महीने के प्रारंभ को दर्शाता है जो कि हिंदुओं का पवित्र महीना है।

यह त्योहार पूरे दिन मनाया जाता है और किसी को भी कोई काम करने की अनुमति नहीं है। खेतों से संबंधित उपकरण और गायों की इस शुभ दिन पर किसान पूजा करते हैं ताकि पूरे वर्ष अच्छी फसल सुनिश्चित हो सके।




घरों के प्रवेश द्वार नीम के पेड़ की शाखाओं से सजाए जाते हैं। छत्तीसगढ़ में दवाओं के परंपरागत प्रैक्टिशनर्स ने नीम के पौधों के साथ कई शोध किए और वहां के लोगों की भलाई के लिए दवाएं तैयार की।

चिकित्सकों की यह टीम छत्तीसगढ़ राज्य के ‘बैगा जनजाति‘ से संबंधित है। यह जनजाति केवल हरलेली त्योहार के दिन से पंद्रह दिनों के लिए अपने अनुयायियों को शिक्षित करता है। वे अपने छात्रों को ‘पंचमी’ के दिन तक पढ़ना जारी रखते हैं जो कि गणेश चतुर्थी के अगले दिन है। पंचमी के शुभ दिन वे अपने छात्रों के लिए परीक्षाएं करते हैं। चिकित्सा प्रैक्टिस जारी करने के लिए लाइसेंस उनके द्वारा प्रदान किया जाता है अगर वे प्रस्तुतियों या उनके छात्रों के प्रदर्शन से संतुष्ट हो जाते हैं।

रिवाज

त्योहार के इस दिन ‘कुटकी दाई‘ पर, फसलों की देवी की अच्छी पैदावर के लिए किसान पूजा करते है। इस त्योहार किसानो के  बच्चों द्वारा ‘गेड़ी‘ नामक एक खेल खेला जाता है इस खेल में बच्चे बड़े बांस की छड़ियों में चढ़ कर खेतों के आसपास घूमते है। बच्चों को ‘गैदी’ खेल और दौड़ में भाग भी लेते हैं जो कई जगहों पर होता है।

भोज

अधिकांश पारंपरिक भोजन चावल से बनाया जाता है कांदा भाजी, कोचई पत्ता, चौलाई भाजी, लाल भाजी, बोहर भाजी और कोहड़ा जैसे विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियों से खाना तैयार करते हैं। मुठिया, फरा, अंगाकर रोटी, चोसीला रोटी कुछ व्यंजन है जो चावल के आटे से बनाये जाते हैं। बोरे बासी एक महत्वपूर्ण भोजन है।  दुध फरा, बफौली, कुसली, खुरमी और बालूशाही गेहूं और चावल के आटे से मिठाई बनाई जाती हैं। महुआ नामक स्थानीय पेड़ के फल से बनाई जाने वाली पेय ​​आदिवासियों और किसानों द्वारा बहुत पसंद की जाती है।



RO No - 11069/ 17
CM Bhupesh Bhagel Mandi ko Maar

Leave a Reply