#culture पशुधन और कृषि औजारों की पूजा का पर्व हरेली आज

किसान इस मौके पर हल की पूजा करते हैं और लोगों की नजरों से घर और पूरे परिवार को बचाए रखने दरवाजे पर नीम की पत्ती भी टांगते हैं। इस त्यौहार में छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति के सारे रंग दिखते हैं।

रायपुर। सावन की रिमझिम फुहारों के बीच आज छत्तीसगढ़ का पहला लोक त्योहार हरेली मनाया जा रहा है। पशुधन और कृषि औजारों की पूजा-अर्चना के इस त्यौहार के साथ ही छत्तीसगढ़ में त्यौहारों की धूम शुरू हो जाती है। आज छत्तीसगढ़ के घर-घर में चीला-चौसेला बनेगा और महिलाएं सुबह घर की दीवारों पर गाय के गोबर से सुरक्षा रेखा बनाकर पूजा-पाठ होती है। किसान इस मौके पर हल की पूजा करते हैं और लोगों की नजरों से घर और पूरे परिवार को बचाए रखने दरवाजे पर नीम की पत्ती भी टांगते हैं। इस त्यौहार में छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति के सारे रंग दिखते हैं।




आज के दिन पूजा-पाठ के बाद बच्चे बांस की बनी गेड़ी पर चढ़ते हैं। कीचड़ भरे रास्ते में गेड़ी चढ़ने का अलग ही मजा है। इसी वजह से हरेली को गांवों में गेड़ी तिहार भी कहते हैं।

अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति ग्रामीणों के बीच हफ्तेभर तक चलाएगी मुहिम

गांवों में महिलाएं आज भी टोनही प्रताड़ना का शिकार हो रही हैं। इस युग में ऐसे भ्रम चिंताजनक है। ग्रामीणों का यही भ्रम दूर करने का बीड़ा उठाया है अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने। यह समिति शनिवार को हरेली से पूरे एक हफ्ते गांवों में जाकर ग्रामीणों को जागरूक करेगी। इस मुहिम को नाम दिया है, कोई नारी टोनही नहीं…। गांववालों से कहा जाएगा कि जादू-टोने का कोई अस्तित्व नहीं है। भूत-प्रेत, टोनही का खौफ सिर्फ भ्रम है। बीमारियों से बचने के लिए गांव को तंत्र-मंत्र से बांधने के बजाय स्वास्थ्य सुरक्षा के नियमों का पालन करें। समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि, “इस मुहिम के तहत दुर्ग जिले के पाटन ब्लाॅक के ग्राम तेलीगुंडरा में ग्रामसभा होगी।”

डाॅ. दिनेश मिश्र ने कहा अंचल में हरियाली अमावस्या (हरेली) के संबंध में काफी अलग अलग मान्यताएं हैं। अनेक स्थानों पर इसे जादू-टोने से जोड़कर भी देखा जाता है, कहीं-कहीं यह भी माना जाता है कि इस दिन, रात्रि में विशेष साधना से जादुई सिद्धियां प्राप्त की जाती हैं,जबकि वास्तव में यह सब परिकल्पनाएं ही हैं। जादू-टोने का कोई अस्तित्व नहीं है। तथा कोई महिला टोनही नहीं होती।

टहनी तोड़कर नीम के पेड़ को नुकसान न पहुंचाएं 

डाॅ. मिश्र ने कहा, “पिछले कुछ वर्षों से यह देखा जा रहा है कि हरेली अमावस्या को दिन में भी बच्चे व कई लोग जादू-टोने व नजर लगने से बचने के लिए नीम की टहनी साइकिलों, रिक्शे व गाड़ियों में लगाकर घूमते दिखाई देते हैं। कुछ बच्चे तो नीम की पत्तियां लेकर स्कूल तक पहुंच जाते हैं। पालकों व शिक्षकों को बच्चों को ऐसे अंधविश्वास से बचने की सलाह देनी चाहिए। नीम की टहनी तोड़कर वृक्ष को नुकसान पहुंचाने के बजाय घर के आसपास नीम के पौधे लगाएं ताकि वातावरण शुद्ध हो।”



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