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गोंडवाना स्पेशल: बस्तर दशहरा की दुसरी कड़ी – डेरी गड़ाई रस्म……!

बस्तर दशहरा में पाटजात्रा के बाद दुसरी सबसे महत्वपूर्ण रस्म है डेरी गड़ाई। बस्तर का दशहरा 75 दिनों तक चलने वाला विश्व का सबसे लंबा दशहरा है। बस्तर दशहरा की शुरूआत पाटजात्रा की रस्म से हो चुकी है। पाटजात्रा के बाद डेरी गड़ाई की रस्म बेहद महत्वपूर्ण रस्म है। जगदलपुर के सिरासार भवन में माझी चालकी मेंबर मेंबरिन की उपस्थिति में पुरे विधि विधान के साथ डेरी गड़ाई रस्म पूर्ण की गई।

डेरी गड़ाई रस्म मे बिरिंगपाल के ग्रामीण साल की दो शाखा युक्त दस फीट की लकड़ी लाते है जिसे हल्दी का लेप लगाकार प्रतिस्थापित किया जाता है। इसे ही डेरी कहते है। इसकी प्रतिस्थापना ही डेरी गड़ाई कहलाती है। सिरासार भवन में दो स्तंभों के नीचे जमीन खोदकर पहले उसमें अंडा एवं जीवित मोंगरी मछली अर्पित की जाती है। फिर उन गडढो में डेरी को स्थापित किया जाता है।

दशहरा की विभिन्न रस्मों मे मोंगरी मछली की बलि दी जाती है जिसकी व्यवस्था समरथ परिवार करता है। वहां उपस्थित महिलाये हल्दी खेलकर खुशियां मनाती है। इस रस्म के बाद बस्तर दशहरा के विशालकाय काष्ठ रथों का निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाता है। विगत छः सौ साल से डेरी गड़ाई की रस्म मनाई जा रही है। बेड़ा और झार उमरगांव के लगभग 150 कारीगर मिलकर विशाल रथों का निर्माण करते है।
रथ निर्माण में कोई विघ्न ना हो इसलिये देवी को याद कर डेरी गड़ाई की रस्म पुरी की जाती है।

ज्ञात हो कि बस्तर में राजा पुरूषोत्तम देव (1408) के काल से बस्तर दशहरा मनाया जा रहा है। इस दशहरा में रावण ना जलाकर रथ खींचने की अनूठी परंपरा का निवर्हन किया जाता है। 75 दिनों तक चलने वाले इस दशहरें में विभिन्न रस्मों की अदायगी की जाती है। जिसमें से डेरी गड़ाई दुसरी प्रमुख रस्म है। इतने सुंदर फोटो के लिये भाई अजय सिंह जी का बहुत शुक्रिया।

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