#ViralPhoto सोशल मीडिया पर वायरल हुई दिवाली की रात की ये तस्वीर, ग्राहक के इंतजार में सड़क किनारे दो बच्चो के साथ ही सो गया शख्स

दिवाली की इस तस्वीर के पीछे की कहानी आपको कर देगी भावुक-हर किसी के नसीब मेंनहीं होती खुशियां…

रोशनी का पर्व दीपावली पिछले दिनों पूरे देश में धूमधाम से मनाया गया, दिवाली की खुमारी अभी भी लोगों पर बनी हुई, लेकिन इस बीच एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की गई है, जो दिलों-दिमाग को झकझोर कर रख देगी। इसे इंदौर में रहने वाले ईश्वर शर्मा नाम के यूजर ने फेसबुक पर शेयर किया है। तस्वीर इंदौर की ही बताई जा रही है, हालांकि तस्वीर इंदौर की ना भी हो तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा, ये भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, दिल्ली, कोलकाता या चेन्नई की भी हो सकती है, क्योंकि कमोवेश हालात हर शहर एक जैसे ही है।




तस्वीर में क्या है?

तस्वीर में एक शख्स इत्मिनान से सड़क किनारे सोता हुआ दिखाई दे रहा है, उसके साथ उसके दो बच्चे भी हैं जो गंदा सा कंबल ओढ़े हुए दिखाई दे रहे हैं। इनमें एक लड़की जिसकी उम्र 5 या 7 साल है और दूसरा लड़का है, जो तकरीबन ढाई साल का होगा। इस शख्स के सामने कुछ सामान रखा हुआ है। जिसे देखकर लग रहा है कि यकीनन उसने इन्हें बेचने के लिए ही रखा होगा, इनमें कुछ हाथ से बनी खजूर की डलिया हैं।

लेकिन देखकर लग रहा है तकनीक के इस दौर में दिनभर में दो-तीन भी बिक जाती हों तो बहुत ज्यादा है। मसलन अपने पिता से सर्वश्रेष्ठ हुनर सीखने के बावजूद भी दो वक्त के खाने का इंतजाम मुश्किल, इस मशीनी दौर में ये मुश्किल ही है जो इसने तीन खिलौना साइकिल भी रखी हुई हैं। इस उम्मीद में कि बांस-खजूर की डलिया न सही ये साइकिल ही बिक जाएं। तस्वीर में दूर दिवाली की रोशनी भी दिखाई दे रही है। हकीकत में भी दिवाली की रोशनी इस शख्स या फिर इसके जैसे हजारों, लाखों लोगों की जिंदगी से दूर है। जो दिन भर सड़क पर गुजारा करने की जद्दोजहद करते हैं और रात में वहीं सो जाते हैं।

सोशल मीडिया पर भावुक हुए लोग

इस तस्वीर को देखकर लोग भावुक हो गए, किसी ने इस पर दुख जताया तो किसी ने इसे समाज का असली चेहरा, वहीं किसी ने नेताओं पर अपना गुस्सा निकाला, वहीं एक यूजर ने लिखा- ‘देश की हक़ीक़त यही है। हमें गफलत में जीने की आदत हो गयी’, वहीं एक यूजर ने लिखा- ‘ऐसे दृश्य दिखते हैं, तो पता नहीं क्यों अपराध बोध सताने लगता है। लगता है कि जैसे हम ही ज़िम्मेदार हैं इनकी ज़िंदगी में पसरे अंधेरों के लिए…….’



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