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Chhattisgarh

चीन से लाैटे दुर्ग के तीन संदिग्धों में काेराेना वायरस नहीं, पुणे से आई रिपोर्ट में खुलासा, लेकिन मौसम में आए बदलाव से एच1एन1 के सक्रिय होने का खतरा

दुर्ग | चीन से लौटे दुर्ग के तीन संदिग्धों में कोरोना वायरस की पुष्टि नहीं हुई है। पुणे के राष्ट्रीय वायरोलॉजी लैब से शुक्रवार को तीनों की रिपोर्ट भेजी गई। रिपोर्ट आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने राहत की सांस ली। हालांकि अभी दो संदिग्धों की रिपोर्ट आनी बाकी है। इनमें एक दुर्ग व दूसरा अंबिकापुर का है। दोनों वहां पढ़ाई करने गए थे।

दूसरी ओर अचानक हो रही बारिश व तापमान गिरने से स्वाइन फ्लू का खतरा बढ़ गया है। एक संदिग्ध मिल भी गया है। फिलहाल देवेंद्रनगर के एक निजी अस्पताल में स्वाइन फ्लू संदिग्ध का इलाज चल रहा। विशेषज्ञों के अनुसार वातावरण में अभी नमी ज्यादा है। इसी तरह का मौसम में स्वाइन फ्लू के वायरस एच1एन1 पनपते के लिए अनूकुल रहता है। खतरा शुरू भी हो चुका है।

हालांकि अभी जो संदिग्ध मरीज सामने आए हैं, वे किसी काम से अहमदाबाद गए थे। वहां से लौटने के बाद ही उनकी तबीयत बिगड़ी। मरीज के स्वाब का सैंपल जांच के लिए भेजा गया है। अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. सुनील खेमका के अनुसार मरीज काे आइसोलेशन वार्ड में भर्ती रखकर इलाज किया जा रहा है। अंबेडकर अस्पताल के श्वसन रोग विभाग के एचओडी डॉ. आरके पंडा ने बताया कि अचानक तापमान गिरने से वायरस एच1एन1 सक्रिय हाेने का खतरा बढ़ गया है। डाक्टरों के अनुसार इस तरह के मौसम में लोग ज्यादातर समय घरों में रहते हैं।

ऐसे में किसी एक के पीड़ित होने पर बाकी सदस्यों को आसानी से फैलता है। इसलिए सावधानी जरूरी है। अंबेडकर अस्पताल में फ्लू, सर्दी व खांसी के लिए श्वसन रोग विभाग में कमरा नंबर 205 में अलग से ओपीडी बनाया गया है। गुरुवार को ज्यादातर मरीजों को इसकी जानकारी नहीं थी। इस वजह से वे मेडिसिन व पीडियाट्रिक विभाग पहुंच गए। वहीं उनकी जांच की गई। शुक्रवार को 20 से ज्यादा मरीजों का इलाज किया गया। कोरोना या स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीज वहां इलाज करवा सकते हैं। दूसरे मरीजों में संक्रमण न फैले, इसके लिए अलग से ओपीडी बनायी गई है।

वर्कशॉप में सलाह, वायरस से डरें नहीं बल्कि सतर्क रहें

अंबेडकर अस्पताल में नोवेल कोरोना वायरस पर केंद्रित वर्कशॉप का आयोजन किया गया। सैंपल कलेक्शन से लेकर ट्रांसपोर्टेशन, इंफेक्शन, प्रिवेंशन व कंट्रोल पर डॉ. पंडा ने बताया कि नोवेल कोरोना वायरस से डरने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत है। इसके प्रति जागरूकता और एहतियात से बचाव संभव है। इसका टीका अभी तक विकसित नहीं हुआ है लेकिन रिसर्च जारी है।

ऐसा नहीं है कि इसका प्रकोप पहली बार हुआ है, यह मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (मर्स) कोरोना वायरस एवं सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (सार्स) कोरोना वायरस, के रूप में दो बार पहले भी आ चुका है। मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुरेश चंद्रवंशी ने कहा कि कोरोना वायरस के संपर्क में आने के बाद दो से 14 दिनों के भीतर इसके लक्षण दिख जाते हैं। वायरस का असर शरीर में 14 दिनों तक होता है, इसलिए इस दौरान विशेषज्ञ डॉक्टर की निगरानी में रहना चाहिए।

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