नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने राज्य सभा में धान खरीदी का मुद्दा उठाया, सदन से किया वाकआउट - गोंडवाना एक्सप्रेस
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नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने राज्य सभा में धान खरीदी का मुद्दा उठाया, सदन से किया वाकआउट

नई दिल्ली (एजेंसी) | लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने बुधवार को ‘‘सेंट्रल पूल’’ के तहत धान खरीद से जुड़़ी छत्तीसगढ़ सरकार की मांग को उठाया और इस संबंध में नियमों में ढील देने मांग की। उन्होंने इस विषय पर सरकार से जवाब देने की मांग की, लेकिन सरकार से उत्तर नहीं मिलने पर कांग्रेस सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया।

शून्यकाल में इस मुद्दे को उठाते हुए चौधरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सरकार केंद्रीय पूल से धान की खरीद के विषय को पिछले कुछ समय से उठा रही है। लेकिन उसके (राज्य के) वैध अधिकारों को प्रदान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में दो दर्जन से अधिक धान की किस्म हैं जिन्हें राज्य के आदिवासियों ने काफी जतन से संजो कर रखा है।

लेकिन सेंट्रल पूल के तहत धान नहीं खरीदा जाना राज्य की उपेक्षा को दर्शाता है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि ऐसा इसलिये हो रहा है क्योंकि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है, लेकिन जनता ने पार्टी को सत्ता में बैठाया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता किसानों को मजबूत बनाने की है और वह किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के अलावा प्रोत्साहन देने पर जोर दे रही है। केंद्र सरकार पर ‘‘किसान विरोधी’’ होने का आरोप लगाते हुए चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से प्रदेश सरकार के साथ भेदभाव किया जा रहा है।

ऐसे में हम मांग करते हैं कि ‘‘सेंट्रल पूल’’ के तहत धान खरीद से जुड़़ी छत्तीसगढ़ सरकार की मांग को पूरा किया जाए तथा इस संबंध में नियमों में ढील दी जाए। सदन में इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी मौजूद थीं। कांग्रेस नेता ने इस बारे में सरकार से जवाब देने की मांग की लेकिन जवाब नहीं आने पर कांग्रेस नेताओं ने सदन से वाकआउट किया।

शून्यकाल में ही छत्तीसगढ़ से भाजपा सदस्य संतोष पांडे ने आरोप लगाया कि उनके राज्य में कांग्रेस की सरकार ने किसानों को छलने का काम किया है।

चुनाव के दौरान कांग्रेस ने वादा किया था कि सत्ता में आने पर तुरंत कर्जमाफी करेंगे, अनाज खरीदेंगे और शराबबंदी करेंगे, लेकिन ये वादे पूरे नहीं हुए। भाजपा नेता ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ की जनता पूछना चाहती है कि कर्जमाफी, अनाज खरीद और शराबबंदी के वादे पूरे क्यों नहीं हुए। धान खरीद में विलंब क्यों किया गया।

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